सैलरी जल्द म्यूचुअल फंड में मिल सकती है, जानिए इसके क्या फायदे होंगे
सेबी ने कहा कि कई कंपनियां पहले से ही कर्मचारियों को अलग-अलग बचत और निवेश सुविधाएं देती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए नया प्रस्ताव लाया गया है. इसके तहत कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से एक हिस्सा काटकर सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगी.

भारतीय कंपनियों को कर्मचारियों की सैलरी का एक हिस्सा म्यूचुअल फंड यूनिट्स (MF Units) में पेमेंट करने की अनुमति मिल सकती है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक 20 मई को जारी एक परामर्श पत्र में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ चुनिंदा मामलों में म्यूचुअल फंड में थर्ड पार्टी द्वारा भुगतान की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है.
म्यूचुअल फंड में यूनिट का मतलब निवेश का छोटा हिस्सा होता है. जैसे किसी कंपनी में हिस्सेदारी को शेयर कहते हैं, वैसे ही म्यूचुअल फंड में हिस्सेदारी को यूनिट कहा जाता है.
इसके अलावा सेबी म्यूचुअल फंड बेचने वाले (MF डिस्ट्रीब्यूटर्स) को कमीशन, म्यूचुअल फंड यूनिट्स के रूप में देने की अनुमति देने पर भी विचार कर रहा है. फिलहाल म्यूचुअल फंड में निवेश सीधे निवेशक के अपने बैंक खाते से ही किया जाना जरूरी होता है. सेबी ने कहा कि रेगुलेटर यह कदम इसलिए उठा रहा है ताकि किसी तरह की गलत गतिविधि पर रोक लगे और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों का पालन किया जा सके.
हालांकि, सेबी ने कहा कि म्यूचुअल फंड एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर, वह कुछ खास परिस्थितियों में थर्ड पार्टी द्वारा भुगतान की अनुमति देने की योजना बना रहा है. एक प्रस्ताव के तहत कंपनियों (नियोक्ताओं) को कर्मचारियों की ओर से म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी.
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कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?सेबी ने कहा कि कई कंपनियां पहले से ही कर्मचारियों को अलग-अलग बचत और निवेश सुविधाएं देती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए नया प्रस्ताव लाया गया है. इसके तहत कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से एक हिस्सा काटकर सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगी. वहीं, अगर कर्मचारियों की सैलरी का एक हिस्सा म्यूचुअल फंड यूनिट्स में मिलता है, तो उन्हें कई फायदे हो सकते हैं.
-लंबी अवधि में अच्छा खासा पैसा जमा कर सकेंगे
-हर महीने अपने-आप निवेश होने से सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान( SIP) जैसी निवेश की आदत बनेगी.
-इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश होने पर बैंक सेविंग से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है.
-कर्मचारियों को सैलरी के साथ बचत और निवेश दोनों का फायदा मिलेगा.
-शेयर बाजार बढ़ने पर MF यूनिट्स की वैल्यू भी बढ़ सकती है, इससे कमाई बढ़ेगी
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हालांकि, कर्मचारियों को इसमें निवेश करना है या नहीं, ये पूरी तरह वैकल्पिक यानी उनकी मर्जी पर निर्भर होगा. इस व्यवस्था में AMC (एसेट मैनेजमेंट कंपनियां) कर्मचारियों के लिए एक साथ जमा किया गया पैसा स्वीकार करेंगी. यह सुविधा लिस्टेड कंपनियों, EPFO में रजिस्टर्ड कंपनियों और खुद एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को मिलेगी.
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