The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Business
  • India Faces Potential ₹37000 Crore Monthly Hit from Gulf Conflict

ईरान युद्ध एक महीना चला तो भारत को कितना नुकसान होगा?

पश्चिम एशिया के साथ भारत का सालाना ट्रेड अब लगभग 180 अरब डॉलर है. भारतीय मुद्रा में यह रकम 16 लाख 62 हजार 260 करोड़ रुपये के अल्ले-पल्ले बैठती है. इसमें से भारतीय निर्यात लगभग 5 से 5.5 लाख करोड़ के आसपास है, जबकि आयात लगभग 11 लाख करोड़ से 11.5 लाख करोड़ है.

Advertisement
pic
13 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 08:03 PM IST)
Iran war impact on India Trade
भारत के बासमती चावल के निर्यात का 80% से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशिया को होता है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
Quick AI Highlights
Click here to view more

खाड़ी युद्ध की वजह से कच्चे तेल के बाजार में उबाल देखने को मिल रहा है. अगर युद्ध लंबा चला तो इससे भारत को हर महीने अरबों रुपये की चपत लग सकती है. इकोनॉमिक टाइम्स के पत्रकार आनंद सिंघा की एक खबर में बताया गया है कि ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध भारत पर भारी पड़ने लगा है. 

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने ईटी से कहा कि अगर हालात एक महीने तक ऐसे ही बने रहते हैं तो भारत को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा. उनका कहना है कि जिन प्रमुख समुद्री रास्तों से भारत व्यापार करता है उनमें रुकावट आने से भारत का एक्सपोर्ट कम हो जाएगा.

अजय सहाय के मुताबिक, 

“हर महीने एक्सपोर्ट में 4 अरब डॉलर (करीब 37 हजार करोड़) तक की कमी आ सकती है. भारत हर महीने पश्चिम एशिया को करीब 6 अरब डॉलर (55 हजार 400 करोड़ रुपये) कीमत का सामान निर्यात करता है.”

दूसरे रास्ते तलाश रहे कारोबारी 

इस बीच, भारत के निर्यातक इस कोशिश में लगे हैं कि दूसरे समुद्री रास्तों से सामान विदेशों में भेजा जाए. साथ ही नए देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. फियो के सीईओ का कहना है कि पश्चिम एशिया भारत के विदेशी व्यापार नेटवर्क का बड़ा केंद्र है. इस रास्ते से न सिर्फ तेल और गैस भारत आता है बल्कि भारतीय सामान भी इसी रास्ते से विदेशों में निर्यात किया जाता है. सहाय ने कहा कि यह इलाका भारत के सबसे अहम आर्थिक साझेदारों में से एक बना हुआ है. 

ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध का असर आपकी थाली तक पहुंच ही गया, खाने के तेल, चीनी और खाद सब पर खतरा 

उन्होंने आगे बताया कि भारत के पश्चिम एशिया के साथ व्यापारिक रिश्ते पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं. FIEO के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया के साथ भारत का सालाना ट्रेड अब लगभग 180 अरब डॉलर है. भारतीय मुद्रा में यह रकम 16 लाख 62 हजार 260 करोड़ रुपये के अल्ले-पल्ले बैठती है. इसमें से भारतीय निर्यात लगभग 5 से 5.5 लाख करोड़ के आसपास है, जबकि आयात लगभग 11 लाख करोड़ से 11.5 लाख करोड़ है. 

पश्चिम एशिया में, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है.

भारत के बासमती चावल के निर्यात का 80% से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है. रत्न और आभूषणों का लगभग 30% निर्यात इसी क्षेत्र में होता है. वाहनों के निर्यात का लगभग 25 परसेंट हिस्सा पश्चिमी एशियाई बाजारों में भेजा जाता है. 

वहीं, भारतीय कंपनियां इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, विद्युत मशीनरी और रसायन से लेकर कपड़े, दवाएं , प्लास्टिक और पेट्रोलियम उत्पादों तक सब कुछ निर्यात करती हैं. इसके अलावा कृषि निर्यात भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. भारत खाड़ी देशों को बड़े पैमाने पर चावल, मांस, मसाले, फल और सब्जियां वगैरा बेचता है.

वीडियो: मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इजरायल को क्या संदेश दिया?

Advertisement

Advertisement

()