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फंस गया 10 लाख टन चावल, सरकार ने लगाया था निर्यात शुल्क, विदेशी खरीदारों ने लेने से मना किया

भारतीय बंदरगाहों पर चावल की लोडिंग बंद. विदेशी खरीदारों ने कहा कि उन्हें पुराने रेट पर ही चावल की सप्लाई की जाए.

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Rice Import Duty
सरकार ने चावल के निर्यात पर लगाया था टैक्स. (सांकेतिक फोटो: रॉयटर्स)
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12 सितंबर 2022 (Updated: 12 सितंबर 2022, 02:55 AM IST)
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भारत का दस लाख टन चावल पोर्ट्स पर फंस गया है. विदेशी ख़रीदारों ने ये कहते हुए चावल की खेप लेने से इनकार कर दिया है कि उन्हें पुराने रेट पर ही चावल की सप्लाई की जाए. अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पांच निर्यातकों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है. न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बंदरगाहों पर चावल की लोडिंग बंद हो गई है. दरअसल, सरकार ने हाल ही में चावल की कई किस्मों पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने का फैसला लिया था. विदेशी खरीदारों ने ये शुल्क देने से मना कर दिया है. उनका कहना है कि जब उन्होंने कांट्रैक्ट साइन किया था, तब ये ड्यूटी लागू नहीं थी. ऐसे में क्योंकि कांट्रैक्ट पहले हो चुका है इसलिए वो नए शुल्क को नहीं चुकाएंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है. इसके साथ ही बीते 8 सितंबर को विभिन्न प्रकार के चावल की किस्मों के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला लिया था. चावल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने सरकार की चिंता बढ़ा रखी है. इसलिए भारत सरकार अपनी घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है. आपको बता दें कि नए खरीफ सीजन में देश में धान की बुआई का रकबा काफी कम रहा है क्योंकि कई इलाकों में इस बार मानसून ने निराश किया.

पोर्ट्स पर चावल फंस जाने के बारे में बात करते हुए अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (AIREA) के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव ने मीडिया को बताया कहा,

“जब से सरकार ने निर्यात शुल्क लागू किया है तब से विदेशी खरीददार भुगतान करने के लिए तैयार नहीं है. इसलिए हमने लोडिंग बंद कर दी हैं."

'पहले पुराना कॉन्ट्रैक्ट लागू रहता था'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत हर महीने लगभग 20 लाख टन चावल का निर्यात करता है. भारत के सबसे बड़े चावल निर्यातक सत्यम बालाजी कंपनी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि इससे पहले अक्सर सरकार इस तरह से फैसले लेने पर पुराने कांट्रैक्ट को इस दायरे से बाहर रखती थी. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है. अग्रवाल ने कहा कि चावल के कारोबार में मार्जिन बहुत कम है और निर्यातक 20 फीसदी शुल्क का भुगतान नहीं कर सकते. ऐसे में सरकार को पहले से जारी लेटर्स ऑफ क्रेडिट (LC) के आधार पर ही निर्यात की अनुमति देनी चाहिए.

व्यापारियों का अनुमान है कि करीब 7.5 लाख टन चावल पोर्ट पर पड़ा है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में टूटा चावल भी पोर्ट पर पड़ा है. भारत 150 देशों से भी अधिक को चावल निर्यात करता है. शिपमेंट में किसी भी कमी से खाद्य कीमतों पर असर पड़ेगा, जो पहले से ही कई वजहों से प्रभावित है.

इधर कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, और पश्चिम बंगाल में कम बारिश के कारण धान की खेती में कमी आई है. इस वजह से चावल महंगा हो रहा है. मंत्रालय द्वारा जारी 2 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, धान की खेती का कुल बुआई एरिया 5.6 फीसदी से घटकर 383.99 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले खरीफ सीजन में देश में धान की बुआई का रकबा 406.89 लाख हेक्टेयर था.

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिवानी ने लिखी है.)

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