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दूध के मिलावटखोरों पर आई मुसीबत, FSSAI ने साफ कहा- 'बेचना है तो लाइसेंस लेना ही होगा'

FSSAI ने दूध उत्पादकों (Milk Producers) और दूध बेचने वालों को निर्देश दिया है कि अगर वे दूध से जुड़ा फूड बिजनेस कर रहे हैं या करने जा रहे हैं तो FSSAI में रजिस्ट्रेशन कराना या लाइसेंस लेना जरूरी होगा.

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12 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 09:02 PM IST)
Milk quality
सरकार दूध में मिलावट पर कड़ाई बरतने के मूड में दिख रही है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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देश के अलग-अलग इलाकों से कई बार खबरें सुनने को मिलती हैं कि कभी दूध में यूरिया तो कभी कुछ और मिलावट की जा रही है. लेकिन अब सरकार दूध में मिलावट को लेकर काफी सख्ती बरत रही है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक अडवाइजरी जारी की है. 

FSSAI ने दूध उत्पादकों (Milk Producers) और दूध बेचने वालों को निर्देश दिया है कि अगर वे दूध से जुड़ा फूड बिजनेस कर रहे हैं या करने जा रहे हैं तो FSSAI में रजिस्ट्रेशन कराना या लाइसेंस लेना जरूरी होगा. यह नियम डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों पर लागू नहीं होगा. इस आदेश में कहा गया है कि नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई की जा सकती है.

कौन हैं दूध उत्पादक?

जो दुधारू पशु पालकर दूध का उत्पादन करते हैं. फिर चाहें किसान हों या डेयरी बिजनेस में लगी कोई फर्म. इस नियम का पालन उन किसानों को करना अनिवार्य होगा जो अपना दूध सीधा बाजार में या डेयरी फर्मों को बेचते हैं. 

खबर में बताया गया है कि लेकिन जो किसान सीधे डेयरी सहकारी समिति को दूध बेचते हैं उनको FSSAI में रजिस्ट्रेशन कराने या लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है.

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11 मार्च को जारी अडवाइजरी में FSSAI ने कहा कि उसे जानकारी मिली है कि कुछ दूध उत्पादक और विक्रेता रजिस्ट्रेशन और फूड बिजनेस करने का लाइसेंस लिए बिना ही दूध बेच रहे हैं. FSSAI ने कहा है कि सहकारी समिति अधिनियम के तहत यह नियम दूध बेचने वाले विक्रेताओं पर भी लागू होगा. आदेश में कहा गया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दूध में मिलावट की हालिया घटनाओं को देखते हुए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस संबंधी जरूरतों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

FSSAI ने केंद्र और राज्यों के प्रवर्तन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह सत्यापित करने का निर्देश दें कि ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या लाइसेंस मौजूद है. अधिकारियों को ये भी अडवाइजरी दी गई है कि वे दूध उत्पादकों या बिक्री करने वाले लोगों के यहां लगे दूध के चिलर की समय-समय पर जांच करें ताकि दूध खराब होने से बच सके. 

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