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HDFC बैंक ने करोड़ों रुपये किससे और क्यों छिपाए?

रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंक की ऑडिट समिति ने मार्केटिंग खर्च के रूप में छिपाए गए इन पैसों के भुगतान की जांच के लिए 'इंटरनल विजिलेंस इन्वेस्टीगेशन' का आदेश दिया था.

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27 मई 2026 (पब्लिश्ड: 09:07 PM IST)
HDFC Scam
18 मार्च 2026 को एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक से जुड़ा हैरान कर देना वाला खुलासा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार संदीप सिंह एक रिपोर्ट के मुताबिक HDFC बैंक ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये का भुगतान ब्याज के मद में किया, लेकिन इसे अपने मार्केटिंग खर्च में दिखाया.

रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंक की ऑडिट समिति ने मार्केटिंग खर्च के रूप में छिपाए गए इन पैसों के भुगतान की जांच के लिए 'इंटरनल विजिलेंस इन्वेस्टीगेशन' का आदेश दिया था. यह भुगतान महाराष्ट्र की एक सरकारी कंपनी को किया गया था. इंटरनल विजिलेंस इन्वेस्टीगेशन तब किया जाता है जब किसी कंपनी या सरकारी या प्राइवेट संस्था के भीतर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी या किसी तरह के नियमों के उल्लंघन के बारे में पता लगाना होता है.

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क्या है पूरा मामला ?

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर में बताया गया है कि 12 मार्च को ऑडिट कमेटी ऑफ बोर्ड (ACB) ने वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2025 के दौरान महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को किए गए कुल 45 करोड़ रुपये के भुगतान की 'इंटरनल विजिलेंस इन्वेस्टीगेशन'का आदेश दिया था. ये कंपनी महाराष्ट्र में एक्सप्रेसवे, पुल, फ्लाईओवर वगैरा बनाती और देखरेख करती है.

अखबार ने इससे जुड़े रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि ये भुगतान निगम को 'अतिरिक्त ब्याज' के रूप में दिए जाने थे. यहां अतिरिक्त ब्याज का मतलब ये हुआ है कि इस कंपनी को जमा राशि पर निर्धारित दर से ज्यादा ब्याज का भुगतान किया गया है. इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2021 में हुई थी. 

हुआ यूं कि HDFC बैंक ने MSRDC के अधिकारियों से संपर्क किया और आग्रह किया कि कंपनी अपने बचत खाते में जमा पैसों को HDFC बैंक में जमा कराये. बैंक के अधिकारियों ने इस कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि कुछ वित्तीय संस्थान बचत खाते पर 6 पर्सेंट ब्याज की पेशकश कर रहे हैं. साथ ही कहा कि अगर HDFC इनसे कुछ ज्यादा यानी 6.01 पर्सेंट ब्याज ऑफर करे तो वे अपना पैसा HDFC में जमा कर देंगे.

जब ये सब बात चल रही थी तो महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मौजूदा बैंक खाते में 25 हजार करोड़ रुपये पड़े थे. कंपनी को यह पैसा भूमि अधिग्रहण प्रोजेक्ट से मिला था. बैंक को उम्मीद थी कि निगम कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये तो बैंक में जमा कराएगा.

HDFC जब मुंह मांगे ब्याज को देने को राजी हो गया तो साल 2022 से निगम ने बैंक में पैसे जमा करने शुरू किए. शुरू में 200 करोड़ रुपये जमा किए. साल 2023 में सिर्फ कुछ महीनों के लिए ही HDFC के बैंक खाते में MSRDC के करीब 3000 करोड़ रुपये जमा रहे. इस जमा रकम के बदले साल 2023-2025 के बीच HDFC बैंक ने निगम को कई किश्तें दीं. रिपोर्ट में दावा है कि इसी पैसे को ब्याज के मद में न दिखाकर विजिलेंस रिपोर्ट में परोक्ष ब्याज क्षतिपूर्ति के रूप में दिखाया गया.    

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बैंक ने जिस समय कंपनी से ज्यादा ब्याज देने का वादा किया था, उस समय वह अपने बचत खातों पर 3.5 पर्सेंट ब्याज दे रहा था. निगम से डील होने के बाद बैंक ने नियम बदलते हुए कुछ खास जमाओं यानी मोटे डिपॉजिट के लिए 4.5 पर्सेंट ब्याज का नियम बनाया. हालांकि ये निगम से किए गए वादे के हिसाब से अब भी 2.51 पर्सेंट कम था. इसलिए बैंक के कुछ बड़े अधिकारियों ने कथित तौर पर इसका रास्ता निकालने के लिए तय किया कि इस ब्याज के पैसे का भुगतान दूसरे तरीके से किया जाए.

बैंक ने अपने मार्केटिंग डिपार्टमेंट के जरिये चार स्थानीय विक्रेताओं के जरिए इस पैसे का भुगतान कराया. लेकिन यह पैसा कंपनी को भुगतान किये ब्याज के मद में न दिखाकर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान में योगदान के रूप में दिखाया गया. इस तरह से बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को न सिर्फ मार्केट रेट से ज्यादा ब्याज का भुगतान किया गया और इस 'खेल' को छुपाने के लिए दूसरा तरीका अपनाया.

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बैंक के चेयरमैन ने दे दिया था इस्तीफा  

12 मार्च 2026 को एसीबी ने 'आंतरिक जांच' का आदेश दिया था. उसके ठीक 6 दिन बाद यानी 18 मार्च को HDFC बैंक के तत्कालीन चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक से अपनी कुर्सी छोड़ दी थी. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि बैंक में पिछले दो साल से कुछ ऐसी चीजें हुई हैं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से 'मेल' नहीं खाती हैं. उनके इस फैसले के बाद कई लोगों ने हैरानी जताई थी.

इस घटना के बाद बैंक के अंतरिम चेयरमैन केके मिस्त्री को एक बयान जारी करना पड़ा था. उन्होंने 19 मार्च को कहा कि बैंक के नैतिक मूल्य बहुत मजबूत हैं. मिस्त्री ने कहा कि अगर बैंक के कामकाज में किसी तरह की गड़बड़ी होती तो वह खुद बैंक के बोर्ड में नहीं रहते.

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इस पूरे मामले पर बैंक की सफाई भी आई है. 27 मई को बैंक ने कहा कि वहां ऐसी कोई गलती नहीं हुई है और ये सब 'कयास' भर हैं. बैंक के कामकाज पर नजर रखने और किसी भी संभावित गड़बड़ी को रोकने की पर्याप्त व्यवस्था है.

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