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ब्याज दर कम होते ही होम लोन की EMI घटा दी, लाखों का नुकसान तय है!

होम लोन का गणित थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. होम लोन में शुरुआत में आपकी EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और मूलधन बहुत धीरे-धीरे घटता है. ऐसे में अगर आप EMI घटाते हैं, तो लोन लंबा चलता है और कुल ब्याज बढ़ जाता है.

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23 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 06:57 PM IST)
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EMI कम करने के बजाय लोन का टेन्योर कम करवाने से ज्यादा फायदा होगा (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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पिछले कुछ महीनों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कटौती की है. इस वजह से होम लोन सस्ता हुआ है. कई बैंकों ने ब्याज दरें कम की हैं. इस कटौती का फायदा लेने के लिए कई लोगों ने अपनी किस्त (EMI) कम करवा ली हैं ताकि हर महीने का बोझ घटे. लेकिन यहीं पर एक बड़ी गलती हो जाती है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि EMI कम करवा लेना ही फायदा है. बैंकिंग जानकार इस फैसले को ठीक नहीं मानते हैं. ऐसा क्यों? बड़ा सवाल यह है कि ऐसा क्या किया जाए कि ब्याज दरों में कटौती का फायदा मिल सके?

लोन का टेन्योर कम करवाना समझदारी

होम लोन का गणित थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. होम लोन में शुरुआत में आपकी EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और मूलधन बहुत धीरे-धीरे घटता है. ऐसे में अगर आप EMI घटाते हैं, तो लोन लंबा चलता है और कुल ब्याज बढ़ जाता है. इस तरह से आज भले ही किस्त को लेकर आपको थोड़ी राहत मिले, लेकिन आपको ज्यादा लोन की रकम चुकानी पड़ेगी.

जम्मू एंड कश्मीर बैंक के रीजनल हेड रणधीर कोतवाल लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि EMI को वही रखा जाए और लोन का टेन्योर कम करवा लिया जाए. इस तरह से आप लोन जल्दी खत्म कर देते हैं और लाखों रुपये ब्याज की मद में बचा सकते हैं.

यही वजह है कि बैंकिंग एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि EMI कम करने के बजाय लोन का टेन्योर कम करवाएं. इससे आप बैंक को देने वाले कुल ब्याज में भारी कटौती कर देते हैं. अब इसे दो उदाहरणों से अच्छे से समझते हैं.

पहला उदाहरण 

मान लीजिए किसी बैंक से आपने 8% ब्याज पर 50 लाख रुपये का होम लोन लिया. इस लोन की अवधि 20 साल है. इसकी EMI लगभग 41,800 रुपये के आसपास बनती है. अब मान लीजिए कि आपके बैंक ने ब्याज दर 0.5% घटाकर 7.5% कर दी. ऐसे में आपके सामने दो विकल्प आते हैं. या तो EMI कम कर लें या फिर EMI वही रखते हुए लोन का टेन्योर घटा दें. 

अगर आप EMI कम कर लेते हैं, तो होम लोन की हर महीने की किस्त करीब 40,200 रुपये के आसपास आ जाएगी. यानी हर महीने 1,600 की राहत मिलेगी. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि लोन की अवधि लगभग 20 साल ही बनी रहेगी और करीब 46 लाख रुपये ब्याज चुकाना होगा.

वहीं अगर आप EMI को 41,800 रुपये ही बनाए रखते हैं और बैंक से टेन्योर कम करने को कहते हैं, तो लोन की अवधि घटकर करीब 17 साल के आसपास आ जाएगी. इसका मतलब हुआ कि आपकी 36 किस्तें बच जाती है. इस स्थिति में आपका कुल ब्याज भुगतान लगभग 40 लाख रह जाता है. इस तरह से एक छोटे से फैसले से आप करीब 5 लाख रुपये की बचत कर सकते हैं और 3 साल पहले कर्ज से मुक्त हो जाते हैं.

दूसरा उदाहरण

अब 30 लाख रुपये के होम लोन को समझते हैं. मान लीजिए आपने 8% ब्याज पर 30 लाख रुपये का कर्ज लिया. इस लोन की EMI करीब 25,100 बनती है. अगर आप पूरे 20 साल तक यही EMI देते रहते हैं, तो कुल मिलाकर आप लगभग 60 लाख रुपये चुकाते हैं. इसमें करीब 30 लाख सिर्फ ब्याज होता है. अब मान लीजिए कि ब्याज दर 0.5% घटकर 7.5% हो जाती है. ऐसे में अगर आप EMI कम करवा देते हैं, तो आपकी नई EMI लगभग 24,200 रुपये रह जाएगी. इससे आपको हर महीने करीब 900 की राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लोन की अवधि 20 साल ही रहेगी.

इस स्थिति में आप मूलधन और ब्याज मिलाकर करीब 58 लाख रुपये चुकाएंगे. इसमें लगभग 28 लाख रुपये ब्याज होगा. वहीं अगर आप EMI कम नहीं करते और 25,100 रुपये ही रहने देते हैं, तो लोन की अवधि 17 साल रह जाती है. इस स्थिति में आप कुल करीब 51 लाख 70 हजार रुपये चुकाते हैं. इसमें ब्याज लगभग 22 लाख रुपये होता है. 

इस तरह आप करीब 6.4 लाख रुपये की बचत करते हैं और लगभग 3 साल पहले लोन से मुक्त भी हो जाते हैं.

बैंकिंग एक्सपर्ट अश्विनी राणा का कहना है, “ज्यादातर लोग ब्याज दर घटते ही EMI कम करने की गलती करते हैं, क्योंकि उन्हें तुरंत राहत दिखती है. लेकिन असल खेल लंबे समय का है. होम लोन में शुरुआत के सालों में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है, इसलिए अगर आप EMI घटाते हैं तो आप उसी ब्याज के चक्र को लंबा कर देते हैं."

अश्विनी सलाह देते हैं कि समझदारी इसी में है कि EMI को छेड़ा न जाए और लोन का टेन्योर घटाया जाए. इससे न सिर्फ कुल ब्याज में लाखों रुपये की बचत होती है, बल्कि आप जल्दी कर्जमुक्त भी हो जाते हैं.

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