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भारतीय तेल कंपनियों को अमेरिका-वेनेजुएला को 'तरजीह देने का आदेश', रिपोर्ट में दावा

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा हुई. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा.

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Crude oil price
भारतीय तेल कंपनियां अमेरिका से हर साल करीब 2 करोड़ टन कच्चा तेल खरीद सकती हैं (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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प्रदीप यादव
11 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 07:38 PM IST)
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केंद्र सरकार ने सरकारी तेल रिफाइनरीज से कथित तौर पर कहा है कि वे अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने पर विचार करें. ब्लूमबर्ग की एक खबर के मुताबिक इन सरकारी रिफाइनरीज के कुछ अधिकारियों ने बताया कि उन्हें टेंडर के जरिये कच्चा तेल स्पॉट मार्केट से खरीदते समय अमेरिकी ग्रेड के तेल को तरजीह देने को कहा गया है.

जब रिफाइनरीज को जल्दी तेल चाहिए होता है, तो वे स्पॉट मार्केट से खरीद करती हैं. इसके लिए ये रिफाइनरीज टेंडर जारी करती हैं. इसमें अलग-अलग देशों और कंपनियों से ऑफर आते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि तेल रिफाइनरी कंपनियों से इसी तरह का आग्रह वेनेजुएला से कच्चे तेल खरीदने को लेकर किया गया है. इस पर दोनों देशों के व्यापारी आपस में बातचीत करेंगे. 

ट्रंप का दावा सच होगा?

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा हुई. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा. हालांकि, भारत सरकार ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. सरकार कई बार बता चुकी है कि वह कच्चे तेल के लिए किसी एक देश पर निर्भर न रहकर अपने तेल खरीद के स्रोतों में विविधता (अलग -अलग देशों से) लाने की कोशिश कर रही है. उसका कहना है कि एनर्जी सिक्योरिटी उसकी प्राथमिकता है.

अमेरिका-वेनेजुएला से कितना तेल खरीदेंगी भारतीय तेल कंपनियां ?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिफाइनरीज अमेरिका और वेनेजुएला के कच्चे तेल की कितनी मात्रा ले सकती हैं, इसकी एक सीमा है. अमेरिकी कच्चा तेल हल्का और मीठा होता है. इसमें सल्फर की मात्रा कम होती है. रिपोर्ट का दावा है कि भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियां इस अमेरिकी कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम ‘नहीं’ हैं.

इसके अलावा अमेरिका से ज्यादा तेल आयात करना आर्थिक रूप से फायदे का सौदा नहीं है. इसकी वजह है शिपिंग कॉस्ट. अमेरिका से तेल के जहाज भारत पहुंचने में रूस के मुकाबले कुछ ज्यादा समय लेते हैं. इस वजह से भाड़ा बढ़ जाता है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय रिफाइनरीज के पास तेल खरीदने के लिए पश्चिम अफ्रीका और कजाकिस्तान जैसे विकल्प मौजूद हैं. इन देशों से तेल खरीदना भारत के लिए कुछ सस्ता पड़ता है. अधिकारियों का कहना है कि भारतीय तेल कंपनियां अमेरिका से हर साल करीब 2 करोड़ टन (करीब 4 लाख बैरल रोजाना) कच्चा तेल खरीद सकती हैं. यह पिछले साल से दोगुना होगा. डेटा और एनालिटिक्स कंपनी केप्लर (Kpler) के अनुमान के मुताबिक पिछले साल भारत ने अमेरिका से रोजाना करीब 2 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा.

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