बजट के बाद सोना-चांदी का भौकाल ठंडा, कीमतें लुढ़कीं, वजह भी जान लीजिए
मल्टी कमोडिटी एक्सचेज पर सोने का अप्रैल वायदा भाव 3 परसेंट या करीब 4000 रुपये की गिर गया है. चांदी भी करीब 30 हजार रुपये या 11 परसेंट गिरकर 2 लाख 36 हजार रुपये तक लुढ़क गया है.
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से केंद्रीय बजट पेश किए जाने के एक दिन बाद सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है. सोमवार 2 फरवरी को दोपहर 2 बजे के आसपास कमोडिटी एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेज (MCX) पर सोने का अप्रैल वायदा भाव 3 परसेंट या करीब 4000 रुपये की गिरावट के साथ 1 लाख 43 हजार रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया. इसी तरह से चांदी का भाव भी करीब 30 हजार रुपये या 11 परसेंट गिरकर 2 लाख 36 हजार रुपये तक लुढ़का गया है.
वहीं हाजिर यानी सर्राफा मार्केट की बात करें तो आज तक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिशन के मुताबिक सोमवार 2 फरवरी को दोपहर एक बजे के आसपास 24 कैरेट सोने का भाव 1 लाख 42 हजार 270 रुपये था. इसी तरह से 999 शुद्धता वाली चांदी भी सस्ती होकर 2 लाख 36 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई . इंटरनेशनल मार्केट में हाजिर सोने की कीमत में 3.3% की गिरावट के साथ 4,703.27 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. चांदी की हाजिर कीमत में 5% की गिरावट आई और यह 80.28 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई.
सोने-चांदी में गिरावट के बड़े कारणनिवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू की
पिछले महीने सोना और चांदी ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए थे. ऐसे में बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी. जब बिकवाली बढ़ती है तो दाम तेजी से फिसलते हैं.
CME Group ने Comex Gold और Silver Futures पर मार्जिन बढ़ा दिया. इसका मतलब ट्रेडर्स को अब ज्यादा कैश ब्लॉक करना होगा. सट्टेबाजों को पोजीशन काटनी पड़ी. जब CME (Chicago Mercantile Exchange) किसी कमोडिटीके फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाता है, तो ट्रेडर्स को उसी कॉन्ट्रैक्ट के लिए पहले से ज्यादा कैश/गारंटी जमा करनी पड़ती है.
चांदी की तेजी जरूरत से ज्यादा तेज थी. इंडस्ट्रियल डिमांड की उम्मीदों पर दाम बहुत आगे निकल गए. तकनीकी चार्ट पर सिल्वर Overbought Zone में थी.Overbought Zone वह स्थिति होती है जब किसी एसेट की कीमत बहुत तेजी से इतनी बढ़ जाती है कि आगे गिरावट या करेक्शन की संभावना बढ़ जाती है.
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डॉलर में मजबूतीअमेरिकी डॉलर में मजबूती आने से गोल्ड-सिल्वर दूसरी करेंसी वालों के लिए महंगे हो जाते हैं. इसके चलते डिमांड घटती है और
कीमतों पर दबाव आ जाता है.
फिलहाल संकेत हैं कि अमेरिका में कर्ज महंगा नहीं होगा. माना जा रहा है कि US Fed जल्दबाज़ी में ब्याज दरें नहीं घटाएगा
निवेशकों को सोने-चांदी में क्या करना चाहिए?सेबी रजिस्टर्ड इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित सुरेश जैन ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि गोल्ड फिलहाल कुछ समय के लिए रेंज बाउंड नजर आ रहा है. ऊपर की ओर अगर 1 लाख 55 हजार के ऊपर ब्रेक मिलता है, तो तेजी ट्रिगर हो सकती है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो गोल्ड के 1 लाख 18 हजार से 1 लाख 50 हजार के दायरे में बने रहने की संभावना है.
वहीं, सिल्वर को लेकर जैन ने कहा है कि अगर चांदी का भाव जब तक 3 लाख 5 हजार के ऊपर नहीं जाता है, तब तक इसके 2 लाख से 3 लाख के बीच के बीच ट्रेड करने की उम्मीद है. कुल मिलाकर सोने-चांदी का बाजार अब इस दिशा में जाता दिख रहा है जहां न तो बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना है और न ही बहुत तेज तेजी की.
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