स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से यूरोप में भी हाहाकार, तेल-गैस संकट के बीच WFH का निर्देश
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद कर दिया है. रविवार को इस रास्ते एक भी तेल या गैस से लदा जहाज नहीं गुजरा. इस वजह से एशिया के बाद यूरोप में भी तेल, गैस और हवाई जहाज के ईंधन (जेट फ्यूल) वगैरा का संकट गहरा गया है

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद कर दिया है. रविवार को इस रास्ते एक भी तेल या गैस से लदा जहाज नहीं गुजरा. इस वजह से एशिया के बाद यूरोप में भी तेल, गैस और हवाई जहाज के ईंधन (जेट फ्यूल) का संकट गहरा गया है. यूरोप का करीब 40 फीसदी जेट फ्यूल इसी रास्ते से जाता है. ईंधन की किल्लत को देखते हुए यूरोपीय आयोग (European Commission) ने लोगों से कहा है कि ज्यादा से ज्यादा घर से काम करें . साथ ही, लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अधिकतम इस्तेमाल की अपील की गई है.
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं. इससे यूरोप के कई देश दबाव में हैं. यूरोपीय आयोग ने कहा है कि कंपनियों को जहां संभव हो, वहां हफ्ते में कम से कम एक दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करना चाहिए. इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर सब्सिडी देने और हीट पंप, बॉयलर, सोलर पैनल पर टैक्स कम करने की भी सिफारिश की गई है. आगे चलकर बिजली के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए बड़े लक्ष्य तय किए जाएंगे. इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लोगों को इलेक्ट्रिक कार, बैटरी और हीट पंप जैसी तकनीकें आसान लीज या किस्तों पर उपलब्ध कराई जाएंगी.
इन सिफारिशों के साथ तेल और गैस की खपत कम करने के लिए एक बड़ा पैकेज तैयार किया जा रहा है. इसके तहत ऊर्जा प्रणाली को बिजली आधारित बनाना और ईंधन की खरीद में देशों के बीच तालमेल बढ़ाना शामिल है. इसके अलावा आयोग यह भी चाहता है कि तेल-गैस की तुलना में बिजली पर टैक्स कम रखा जाए.
क्या ठप हो जाएंगी एयरलाइंस ?इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक यूरोप के पास केवल 6 हफ्ते का जेट फ्यूल रह गया है. 16 अप्रैल को न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के साथ एक इंटरव्यू में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के डायरेक्टर फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट ईंधन की सप्लाई 6 हफ्ते के लिए ही बची है. उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अपने "सबसे बड़े ऊर्जा संकट" का सामना कर रही है.
इस कारण एयरलाइंस कंपनियां अपनी उड़ानों की संख्या घटा सकती हैं. पश्चिम एशिया में फिलहाल भले ही सीजफायर चल रहा है लेकिन इस युद्ध की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल के दामों में तेजी आई है. 20 अप्रैल को दुनियाभर में कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 7 परसेंट के उछाल के साथ 96.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
इसी तरह से ईरान युद्ध से अब तक जेट फ्यूल के दाम करीब दोगुने हो चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईंधन के दाम बढ़ने से कुछ एयरलाइंस हवाई किराया भी बढ़ाने पर विचार कर रही हैं. जेट फ्यूल से ही एयरलाइंस चलती हैं और ये उनके लिए सबसे बड़ा खर्च है. एयरलाइंस कंपनियों की कुल लागत का लगभग 30 परसेंट जेट फ्यूल में खर्च हो जाता है.
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