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डीजल महंगा होने से करीब 20 लाख ट्रकों का चक्का चाम, अब रसोई का बजट भी बिगड़ेगा

Diesel Price Surge Impact: इस वजह से माल ढुलाई में दिक्कत आनी शुरू हो गई है. कई राज्यों में डीजल की कमी और ईंधन की कीमतों में करीब 8 रुपये का इजाफा होने से परिवहन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

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26 मई 2026 (पब्लिश्ड: 01:38 PM IST)
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डीजल महंगा होने से माल ढुलाई दरें बढ़ रही हैं (फोटो क्रेडिट: Business today)
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डीजल के दाम बढ़ने के साइड इफेक्ट जमीन पर दिखने शुरू हो गए हैं. ईंधन महंगा होने और सप्लाई किल्लत से करीब 20 परसेंट ट्रक खड़े हो गए हैं. ट्रकों के परिचालन का असर माल ढुलाई और पूरे सप्लाई चेन पर पड़ता है.  इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक,  इस वजह से माल ढुलाई में दिक्कत आनी शुरू हो गई है. कई राज्यों में डीजल की कमी और ईंधन की कीमतों में करीब 8 रुपये का इजाफा होने से ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है. 

डीजल की सप्लाई में कमी से 20% ट्रक खड़े, मालभाड़ा महंगा 
  • रिपोर्ट बताती है कि ट्रांसपोटर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों का कहना है कि डीजल की सप्लाई में कमी से 95 लाख ट्रकों के बेड़े में से लगभग 20% ट्रक खड़े हो गए हैं. ईंधन की कीमतों में आए उछाल के साथ माल ढुलाई दरें भी बढ़ रही हैं. 
  • इससे खाने-पीने की चीजों  और अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से आम लोगों पर महंगाई का दबाव पड़ने का खतरा है. डीजल के दाम बढ़ने का सबसे ज्यादा असर छोटे ट्रक मालिकों पर पड़ा है . ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में 70% से ज्यादा छोटे ट्रक मालिकों की भागीदारी है.
पंपो पर ट्रकों की लंबी लाइन 

ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने मात्र 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार इजाफा किया है. इसके बाद कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर पंपों के बाहर ट्रकों की लंबी कतारें देखी गई हैं. साथ ही माल ढुलाई दरें बढ़ी हैं.

उद्योग जगत के अधिकारियों का मानना ​​है कि इसका कारण थोक डीजल ग्राहकों की बढ़ती मांग है. थोक डीजल और रिटेल पंपों पर डीजल की कीमतों में 40-42 रुपये प्रति लीटर के भारी अंतर के कारण ज्यादातर ट्रक संचालक  रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं.

ये भी पढ़ें: पेट्रोल अभी और महंगा होगा, सरकार के अधिकारियों ने 'मजबूरी' बता दी

ट्रक चलाने की आधी लागत डीजल पर खर्च

इस बारे में देशभर के करीब 90 लाख ट्रक चालकों और 3,400 संघों का प्रतिनिधित्व करने वाली अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा, " कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. परिचालन लागत का 40-45% हिस्सा डीजल पर खर्च होता है."

वहीं, बड़े फ्लीट ऑपरेटर भी दबाव महसूस कर रहे हैं. 6,000 ट्रकों के बेड़े वाली वीआरएल लॉजिस्टिक्स ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों के पंपो से डीजल खरीदने के बाद भी उनके कुछ वाहनों को छह से आठ घंटे तक बंद रहना पड़ा है. कंपनी के चेयरमैन विजय संकेश्वर ने ईटी से कहा, “अभी तक कोई भी ट्रक उस समय सीमा से अधिक नहीं रुका है, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है.”

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