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घर खरीदने जा रहे हैं, टैक्स से जुड़ा ये नियम जान लीजिए वर्ना पछताएंगे

इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदता है, तो इस पर TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स देना जरूरी है. यह प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 1% TDS होता है.

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TDS on Property
अगर कोई आदमी 50 लाख रुपए या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदता है, तो इस पर TDS देना जरूरी है (फोटो क्रेडिट: Unsplash.com)
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प्रदीप यादव
12 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 12 फ़रवरी 2026, 09:11 PM IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने महंगी संपत्ति खरीदने से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर ये मांग की गई थी कि सरकार 50 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को TDS नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए एक ठोस तंत्र बनाए. लेकिन 11 फरवरी को कोर्ट ने ये याचिका खारिज कर दी. अगर आप भी प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं तो ये खबर आपके काम की है. जानते हैं कि 50 लाख से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने पर घर खरीदार को कितना TDS देना होता है.

कितना TDS जमा करना होगा?

टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदता है, तो इस पर TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स देना जरूरी है. यह प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 1% TDS होता है. 

उदाहरण के लिए, अगर किसी प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख है तो इस पर 50 हजार रुपये टीडीएस बनता है. यह राशि बिल्डर/विक्रेता को भुगतान करने से पहले या उसी समय काटी जाती है. लेकिन आमतौर पर बिल्डर या प्रॉपर्टी एजेंट इस बारे में पूरी जानकारी नहीं देते. इस वजह से खरीदार को अचानक एक बड़ा खर्च उठाना पड़ सकता है.

रजिस्ट्री के समय कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे यह पता चल सके कि उक्त प्रॉपर्टी का TDS जमा हुआ है भी या नहीं. खासकर पहली बार घर खरीदने वाले लोग अनजाने में नियम का पालन नहीं कर पाते और बाद में परेशान होते हैं. टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल का कहना है कि TDS काटने के बाद इसे 30 दिन के भीतर ऑनलाइन आयकर विभाग को जमा करना जरूरी है. अगर यह पैसा समय पर जमा नहीं कराते हैं तो ब्याज और पेनल्टी चुकानी पड़ सकती है.

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TDS जमा करने का प्रोसेस क्या है?

टैक्स एक्सपर्ट ने बताया कि प्रॉपर्टी खरीदते समय Form 26QB के जरिए TDS जमा करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन Income Tax e-Filing पोर्टल पर होती है. 

- सबसे पहले incometax.gov.in पर जाएं और अपने PAN और पासवर्ड के माध्यम से लॉग-इन करें. 
- लॉग-इन करने के बाद ऊपर दिए गए e-File मेनू में जाकर e-Pay Tax विकल्प चुनें. 
- इसके बाद New Payment पर क्लिक करें. 
- सूची में से 26QB (TDS on Property) का चयन करें. 
- अब आपको खरीदार और विक्रेता दोनों की जानकारी भरनी होती है. 
- इसमें PAN के अलावा प्रॉपर्टी का पूरा पता, एग्रीमेंट या भुगतान की तारीख और इससे जुड़ी दूसरी जानकारियां भरें. 
- इसके बाद कुल प्रॉपर्टी की कीमत और उस पर लागू 1% TDS राशि भरने का विकल्प चुनें. 
- ये सभी जानकारियां सही तरीके से भरने के बाद पेमेंट का विकल्प जैसे नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, यूपीआई आदि और ऑनलाइन पेमेंट पूरा करें.

भुगतान सफल होने पर एक चालान और CIN नंबर जनरेट होगा. इसे भविष्य के रिकॉर्ड और प्रमाण के तौर पर सेव या डाउनलोड कर लेना चाहिए. भुगतान के लगभग 7 दिन बाद यह एंट्री विक्रेता के Form 26AS में दिखाई देने लगती है. 

वहीं करीब 10-15 दिन बाद आप TRACES पोर्टल से Form 16B (TDS सर्टिफिकेट) डाउनलोड करके विक्रेता को देना जरूरी होता है. अगर प्रॉपर्टी में एक से ज्यादा खरीदार या विक्रेता हैं, तो हर खरीदार-विक्रेता कॉम्बिनेशन के लिए अलग-अलग Form 26QB भरना और जमा करना अनिवार्य होता है.

प्रॉपर्टी खरीदारों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जब आप 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स के मामले में कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है. जैसे कि खुद TDS चेक करें. बिल्डर या रियल एस्टेट एजेंट पर पूरी तरह भरोसा न करें. फॉर्म 26QB समय पर भरें. अगर इसे निर्धारित 30 दिनों के अंदर जमा नहीं किया गया, तो आयकर विभाग ब्याज और पेनल्टी लगा सकता है. 

इसके अलावा फॉर्म 16B सुरक्षित रखें. यह प्रमाणपत्र है कि आपने TDS जमा करवा दिया है. ध्यान रहे कि यह दस्तावेज प्रॉपर्टी बेचते समय या टैक्स रिटर्न भरते समय काम आता है.

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