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Budget 2026 में ये 7 काम हो जाएं तो हर आदमी नाच उठेगा

1 फरवरी, 2026 को आम बजट पेश होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगी. यह उनका लगातार नौवां बजट होगा.

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Budget 2026
1 फरवरी, 2026 को आम बजट पेश होगा. (फोटो क्रेडिट: PTI और Unsplash.com)
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प्रदीप यादव
30 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 30 जनवरी 2026, 08:08 PM IST)
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1 फरवरी, 2026 को आम बजट पेश होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगी. यह उनका लगातार नौवां बजट होगा. इसके साथ ही साल 2017 के बाद ये पहली बार होगा कि रविवार को बजट पेश किया जाएगा. आगामी बजट से आम लोगों से लेकर नौकरीपेशा तक को कई उम्मीदें हैं. हमने 7 सवालों और मांगों को समेटते हुए एक लिस्ट तैयार की है. अगर बजट में इन बातों पर सरकार ने अमल किया तो आम लोगों की ‘भयंकर’ मौज हो जाएगी.

15 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री होगी?

बजट की बात शुरू होते ही सबसे ज्यादा अगर किसी बात को लेकर उत्सुकता रहती है तो वह है इनकम टैक्स छूट. पिछले साल सरकार ने 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री करके सबको चौंका दिया था. अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन को शामिल कर लिया जाए तो 12 लाख 75 हजार की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया गया था. इस बार भी चर्चा है कि इनकम टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाया जा सकता है और टैक्स रेट्स को और भी आसान बनाया जा सकता है. 

लल्लनटॉप से बातचीत में टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल ने बताया कि सरकार इनकम टैक्स छूट की सीमा 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर सकती है. उनका कहना है कि ये भी हो सकता है कि अभी जो 30 पर्सेंट वाला सबसे ऊंचा टैक्स ब्रैकेट है, उसकी सीमा 24 लाख से बढ़ाकर 30 या 35 लाख रुपये हो सकती है. 

स्टैंडर्ड डिडक्शन का दायरा बढ़ेगा

आम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है. कई मीडिया रिपोर्ट्स और फाइनेंस एक्सपर्ट का मानना है कि इसकी लिमिट को 75 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की भी चर्चा चल रही है. टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल का कहना है कि वित्त मंत्री आगामी बजट में न्यू टैक्स रिजीम के तहत यह सीमा 1 लाख रुपये कर सकती हैं.

होम लोन ब्याज पर ज्यादा टैक्स छूट

रियल एस्टेट सेक्टर सरकार से अफोर्डेबल हाउसिंग यानी सस्ते घरों को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा टैक्स राहत की मांग कर रहा है. रियल एस्टेट समेत कई सेक्टर में काम करने वाली भारत की पहली नेट जीरो इंजीनियरिंग कंपनी बूट्स इंडिया (BOOTES India) के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक राय ने लल्लनटॉप को बताया कि पिछले कई सालों से होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 2 लाख रुपये पर कायम है. इस लिमिट को बढ़ाकर कम से कम 4-5 लाख किया जाना चाहिए. यह छूट इनकम टैक्स के सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलती है.

राय का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में प्रॉपर्टी के दाम भाग रहे हैं उस हिसाब से देखें तो ये लिमिट बेहद कम है. हाल ही में बूट्स रियल्टी ने नोएडा समेत कई शहरों में अपनी आवासीय योजनाएं लॉन्च की हैं. कंपनी की योजना भारत के सभी उभरते शहरों में अपने प्रोजेक्ट लॉन्च करने की है. उनका कहना है कि अगर सरकार वाकई अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देना चाहती है प्रॉपर्टी पर लगने वाले टैक्स की दरों को भी तर्कसंगत बनाना होगा. इसके अलावा ऐसे घरों का निर्माण करना होगा जो इको-फ्रेंडली हों. यह तभी संभव है जब इन घरों में रिन्यूबल एनर्जी पर फोकस बढ़ाया जाए.

होम लोन के मूलधन पर अलग से टैक्स छूट मिले

होम लोन के मूलधन की अदायगी पर टैक्स छूट इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत मिलती है. अब तक यह छूट अलग नहीं, बल्कि 80C की कुल 1.5 लाख सीमा के अंदर ही आती है. विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि इसे अलग किया जाए. बूट्स रियल्टी के मालिक दीपक राय का कहना है कि रियल एस्टेट उद्योग काफी समय से इस बात की मांग कर रहा है कि होम लोन के मूलधन अदायगी को 80C वाली छूट लिमिट से अलग किया जाए. उनका कहना है कि अगर सरकार इस बार बजट में यह इस मांग को मान लेती है तो जो घर खरीदने वाले लोगों को टैक्स में राहत मिलेगी. ऐसे में जो ज्यादा लोग घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे.

LTCG की छूट सीमा बढ़ेगी

इस बार के बजट में एलटीसीजी यानी लॉन्ग कैपिटल गेन छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है. इससे जो लोग शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं उनको फायदा होगा. पिछले बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को 10 पर्सेंट से बढ़ाकर 12.5 पर्सेंट कर दिया गया था. अभी तक 1.25 लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री है. टैक्स एक्सपर्ट विपिन जैन का कहना कि हो सकता है बजट में सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दे. अगर ऐसा होता है तो निवेशकों को काफी लाभ होगा.

सेक्शन 80C की सीमा बढ़ाने की मांग 

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regeme) में इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है. अब बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के मुकाबले ये कम पड़ रही है. आज के समय में EPF, PPF, लाइफ इंश्योरेंस, ELSS, बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन के मूलधन जैसे निवेश इसी सीमा में आते हैं. इसके चलते टैक्सपेयर्स के पास अतिरिक्त बचत पर टैक्स लाभ लेने की गुंजाइश कम रह जाती है. टैक्स विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि 80C की सीमा बढ़ाकर लगभग 3 से 3.5 लाख तक की जानी चाहिए. इससे लोगों को ज्यादा बचत होगी और लोग पहले के मुकाबले ज्यादा निवेश करेंगे.

HRA छूट में बदलाव हो सकता है

HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस छूट वह टैक्स राहत है जो नौकरीपेशा लोगों को किराए के घर में रहने पर मिलती है. यह छूट सैलरी का हिस्सा होती है और इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(13A) के तहत दी जाती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में घरों के किराए तेजी से बढ़े हैं, लेकिन HRA से जुड़े नियम और गणना का ढांचा लगभग वही बना हुआ है. इसलिए कई लोगों को वास्तविक किराए के मुकाबले कम टैक्स राहत मिल पाती है. 

इसी वजह से विशेषज्ञ HRA छूट में संशोधन की मांग कर रहे हैं. अगर सरकार इसमें बदलाव करती है, तो किराए के घर में रहने वाले करदाताओं का टैक्स बोझ कम हो सकता है और उन्हें ज्यादा वित्तीय राहत मिल सकती है. बजट में क्या होगा ये तो बाद में ही पता चलेगा. लेकिन अगर ये सभी बातें मान ली जाती हैं तो आम आदमी की मौज आने वाली है.

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