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क्या है 'बिरयानी टैक्स स्कैम' जिसमें रेस्टोरेंट्स 7,00,00,00,00,000 रुपये 'डकार' गए?

Biryani Tax Scam: टैक्स चोरी का ये नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है. इसमें रेस्टोरेंट्स ने सही टैक्स नहीं भरा जिससे सरकार को करीब 70 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हाल में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इसका पर्दाफाश किया है.

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biryani tax Scam
बिरयानी टैक्स स्कैम एक बहुत बड़ा टैक्स चोरी का मामला है जो पूरे भारत में फैला हुआ है. (फोटो क्रेडिट: Unsplash.com)
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प्रदीप यादव
20 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 20 फ़रवरी 2026, 07:43 PM IST)
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चार मीनार और बिरयानी के लिए मशहूर हैदराबाद टैक्स चोरी को लेकर सुर्खियों में है. वो भी बिरयानी टैक्स घोटाला. इसे भारत की सबसे बड़ी टैक्स चोरियों में से एक कहा जा रहा है. दावा है कि इससे भारत सरकार को करीब 70 हजार करोड़ का चूना लगाया गया है.

बिरयानी टैक्स स्कैम क्या है?

बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबाकि टैक्स चोरी का ये नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है. इसमें रेस्टोरेंट्स ने सही टैक्स नहीं भरा जिससे सरकार को करीब 70 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हाल में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इसका पर्दाफाश किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद के कुछ प्रमुख बिरयानी चेन, जैसे पिस्ता हाउस, शाह घौस और महफिल के रूटीन चेकअप से इस टैक्स चोरी का पता चला. जल्दी ही यह जांच पूरे भारत में फैल गई. इसमें देशभर के 1.7 लाख से ज्यादा रेस्टोरेंट्स में जाकर टैक्स का हिसाब-किताब देखा गया.

बिरयानी की दुकानें कैसे काम करती हैं?

बिरयानी बेचने वाले आउटलेट में ग्राहक जल्दी आते हैं और खाना खाते हैं. बड़े पैमाने पर बिरयानी पैक कराकर घर ले जाते हैं. इसके अलावा एक ही रसोई से कई अलग-अलग ब्रांड की बिरयानी बनाई और बेची जाती है. कीमत और सामग्री की मात्रा तय होती है. रॉ मैटेरियल खरीद से अधिकारी यह देख सकते हैं कि रेस्टोरेंट ने कितनी बिरयानी बनाई और बेची.

घोटाले को कैसे अंजाम दिया गया?

देशभर के रेस्टोरेंट्स बिलिंग के लिए एक सॉफ्टेवयर का इस्तेमाल करते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की हैदराबाद ब्रांच ने 1.7 लाख से अधिक ऐसे रेस्टोरेंट्स के इसी बिलिंग सॉफ्टेवयर के डेटा का विश्लेषण किया. करीब 60 टेराबाइट के इस विशाल डेटा की जांच से पता चला कि इन रेस्टोरेंट्स ने वित्त वर्ष 2019-20 से लगभग 70 हजार करोड़ रुपये कीमत के सेल्स टर्नओवर को छिपा रखा था. 

अधिकारियों ने अखबार को बताया कि भारत में हर 10 में से 1 रेस्टोरेंट बिलिंग सिस्टम में यह सॉफ्टवेयर था. इससे रेस्टोरेंट्स एक क्लिक में बिक्री रिकॉर्ड के पूरे ब्लॉक को डिलीट कर सकते थे. कुछ मामलों में तो 30 दिनों तक के लेन-देन भी डिलीट किए जा सकते थे. रेस्टोरेंट्स अक्सर कैश में किए गए बिलों को डिलीट कर देते हैं. केवल कुछ को ही रिकॉर्ड में रखते हैं.

स्कैमर्स को पकड़ने के लिए AI का इस्तेमाल

अधिकारियों ने इन 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स के डेटा का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उपकरणों का इस्तेमाल किया. पता चला बिलिंग सॉफ्टेवयर की मदद से हजारों करोड़ रुपये के बिलों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया. बताया गया कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 40 रेस्टोरेंट्स में 5,141 करोड़ रुपये की कमाई को छिपाया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में रेस्टोरेंट्स से जुड़े कुल 3,734 पैन कार्डों में से 2,650 में धोखाधड़ी पाई गई. 684 मामलों में एक करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री को छिपाया गया था. इनमें से 416 मामले हैदराबाद के थे. 231 मामलों में जीरो या कोई बिजनेस दर्ज नहीं किया गया. अधिकारियों ने रेस्टोरेंट्स के GST नंबरों को इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से मिलाकर देखा. इससे पुलिस को जल्दी पता चल गया कि कौन से रेस्टोरेंट्स ने टैक्स चोरी की.

यह घोटाला सिर्फ हैदराबाद तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर के कई राज्यों में फैले रेस्टोरेंट्स में भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गईं. जिन 5 राज्यों में सबसे ज्यादा जीएसटी चोरी का पता चला है उनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात शामिल हैं. 

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