डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के पार जाएगा? RBI की 'बनावटी अस्थिरता' उल्टी पड़ गई?
भारत सरकार के नीति निर्माताओं (RBI और सरकार के बड़े अधिकारी) के बीच पिछले कुछ हफ्तों में इस बात पर चर्चा तेज हुई है कि साल 2025 में रुपये की गिरावट शुरू होने से पहले रुपये को कृत्रिम रूप से स्थिर रखने (artificial stabilization) का उल्टा असर पड़ा है.

रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. 18 मई को भी डॉलर के बरक्स रुपया 96.39 पैसे तक के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया. अब कयास इस बात के लग रहे हैं कि डॉलर के मुकाबले रुपया जल्द ही 100 का भी आंकड़ा पार कर सकता है.
भारत सरकार के नीति निर्माताओं (RBI और सरकार के बड़े अधिकारी) के बीच पिछले कुछ हफ्तों में इस बात पर चर्चा तेज हुई है कि साल 2025 में रुपये की गिरावट शुरू होने से पहले रुपये को कृत्रिम रूप से स्थिर रखने (artificial stabilization) का उल्टा असर पड़ा है. कृत्रिम रूप से स्थिर रखने का मतलब जब RBI मार्केट की चाल के विपरीत अपने दखल से रुपये को एक तय स्तर पर स्थिर रखने की कोशिश करे. डॉलर महंगा होने के बावजूद RBI डॉलर बेचकर रुपये को ज्यादा गिरने से रोकता है तब इसे रुपये को गिरने से रोकने का बनावटी तरीका माना जाता है.
पहली बार शुक्रवार 16 मई को रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया था. फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये 5.2% गिर चुका है. अब सरकार और RBI के बड़े अधिकारियों को चिंता सता रही है कि अगर रुपये की तुलना में डॉलर 100 के पार गया तो इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा और भी कम हो सकता है.
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इस मसले पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “ऐसा लगता है जैसे अतीत का भूत हमारा पीछा कर रहा है. अगर आप साल 2023 और साल 2024 के स्तरों को देखें, तो रुपये की कीमत बहुत कम नहीं हुई और उसे स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल किया गया. इतने लंबे समय तक कृत्रिम रूप से रुपये को गिरने से रोका गया था. अब कयास लग रहे हैं कि रुपया 100 के नीचे जा सकता है. अगर रुपया इस स्तर को पार कर जाता है, तो इसमें और गिरावट आ सकती है."
केन्द्र सरकार और RBI के बड़े फैसले लेने वाले अधिकारियों का मानना है कि आगे भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि किसी तय स्तर पर रुपये को बचाए रखने के लिए सरकारी दखल की क्षमता सीमित मानी जा रही है.
इस पूरे मामले से वाफिक एक अन्य व्यक्ति के मुताबिक रुपया आगे और तेजी से गिर सकता है. उन्होंने कहा, “अगर आप पिछले 2-3 सालों में रुपये के मूल्य के ग्राफ को देखें, तो यह एक सीमित दायरे में स्थिर हो गया था. उस समय की कृत्रिम स्थिरता के प्रभाव अब महसूस किए जा रहे हैं.”
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सितंबर 2022 में पहली बार 81 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार करने के बाद अगले दो सालों तक डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 81-83 रुपये प्रति डॉलर के सीमित दायरे में ही रहा. अक्टूबर 2024 में यह 84 के स्तर को पार कर गया और दिसंबर 2024 में 85 के स्तर को पार कर गया. वहीं, साल 2025 की शुरुआत से रुपये में 11% की गिरावट आई.
हालांकि, RBI की तरफ से 2023 और 2024 में किए गए विदेशी मुद्रा बाजार हस्तक्षेपों के बारे में जानकारी रखने वाले लोग इन दावों से असहमत हैं. उनका तर्क है कि उस समय भुगतान संतुलन (Balance Of Payment) भारी सरप्लस में था. बैलेंस ऑफ पेमेंट का मतलब ये है कि भारत ने दुनिया से कितना कमाया और कितना खर्च किया. इसके कारण रुपये पर दबाव बढ़ रहा था. अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यह कहना मुश्किल है कि रुपये से जुड़ी मौजूदा समस्याओं को पिछले वर्षों में विनिमय दर में हुए उतार-चढ़ाव ने और बढ़ा दिया है या नहीं.
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