अडानी ग्रुप के ऑडिटर ने कंपनी छोड़ी, वजहों में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का जिक्र कर क्या कह दिया?
इसी वजह से सोमवार को अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 3 से 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.
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अडानी ग्रुप का हिंडनबर्ग से पीछा ही नहीं छूट रहा है. खबर आई है कि अडानी पोर्ट्स की ऑडिटर फर्म डेलॉइट ने इस्तीफा दे दिया है. कंपनी ने इस्तीफा देते हुए जो कारण गिनाए हैं, उनमें हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का भी जिक्र है. कहा गया कि इसी वजह से सोमवार, 14 अगस्त को अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 3 से 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. हालांकि, अडानी पोर्ट्स ने डेलॉइट के कारणों को बेबुनियाद बताया है. साथ ही नए ऑडिटर के तौर पर अडानी पोर्ट्स के लिए MSKA एंड असोसिएट्स अकाउंटेंट्स के नाम की घोषणा भी कर दी.
दोबारा बनी थी ऑडिटरअडानी पोर्ट्स ने 2017 में डेलॉइट को अपना ऑडिटर बनाया था. 5 साल पूरे होने के बाद 2022 में डेलॉइट को एक बार फिर अडानी पोर्ट्स ऑडिटर बनाया गया. डेलॉइट ने 2023 के लिए ऑडिट रिपोर्ट सौंपी और साथ में दिया इस्तीफा. इस्तीफा देते हुए डेलॉइट ने कहा है,
‘हम 5 साल तक अडानी पोर्ट्स के ऑडिटर रहे. इसके बाद भी हम अडानी ग्रुप की एक ही कंपनी के ऑडिटर हैं. बतौर ऑडिटर हमारी भूमिका बेहद सीमित है.’
दूसरे शब्दों में कहें तो डेलॉइट चाहती थी कि उसे अडानी ग्रुप की अन्य सहायक कंपनियों का भी ऑडिटर बनाया जाए.
अपने इस्तीफे में डेलॉइट ने कुछ लेनदेन का भी जिक्र किया है. ये वही लेनदेन हैं जिनका जिक्र हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में हुआ था और इन्हें सेबी के नियमों के खिलाफ बताया गया था. कंसल्टिंग फर्म ने अडानी ग्रुप को सलाह दी थी कि उसे इन लेनदेन को लेकर अलग से एक ऑडिट करानी चाहिए, मगर अडानी ग्रुप ने ये सलाह नहीं मानी.
डेलॉइट ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में कहा,
"अडानी पोर्ट्स ने हमारी सलाह पर इन आरोपों की अलग से जांच करवाना जरूरी नहीं समझा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेबी भी इस मसले की जांच कर रहा है. उसकी रिपोर्ट आनी बाकी है. इसलिए हम नहीं बता सकते कि हिंडनबर्ग ने जिन लेनदेन को गलत बताया था वे असल में सेबी के नियमों के खिलाफ हैं या नहीं."
डेलॉइट ने कहा कि इन लेनदेन के अलावा अडानी पोर्ट्स की अकाउंटिंग में कोई ‘गड़बड़ी’ नहीं हुई है.
अडानी ग्रुप नहीं है सहमतडेलॉइट के इस्तीफे की वजहों पर अडानी ग्रुप ने भी अपना बयान जारी किया. उसके मुताबिक डेलॉइट अडानी ग्रुप की सिर्फ एक कंपनी यानी अडानी पोर्ट्स की ऑडिटर है. बाकी मुख्य कंपनियों की वह ऑडिटर नहीं है. उसके पास जितनी जानकारियां होनी चाहिए थी वो पहसे से उसके पास थीं.
रही बात ग्रुप का ऑडिटर बनाने की तो अडानी ग्रुप की सभी कंपनियां अलग-अलग काम करती हैं. उनके बोर्ड अलग हैं, शेयरहोल्डर अलग हैं. कोई एक कंपनी ग्रुप के लिए कोई नियुक्ति नहीं कर सकती.
इसी बीच एक और डेवलपमेंट हुआ. अडानी ग्रुप में कथित गड़बड़ी पर सेबी की जो रिपोर्ट 14 अगस्त को आनी थी, वो अब कुछ दिनों बाद आएगी. सेबी ने सोमवार (14 अगस्त) को कहा कि उसे रिपोर्ट देने के लिए 15 और दिनों का समय चाहिए होगा.

