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हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप को सबसे तगड़ा झटका तो अब लगा है!

एक बड़ी डील अडानी ग्रुप के हाथ से निकल गई है. ग्रुप के 10 लाख करोड़ रुपये उड़ चुके हैं.

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16 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 16 फ़रवरी 2023, 07:14 PM IST)
Gautam Adani DP Power
गौतम अडानी (फाइल फोटो)
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अमेरिका की रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Report) आने के बाद से अडानी ग्रुप (Adani Group) के शेयरों में 70 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है. इसके चलते अडानी समूह का मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपये घट चुका है. शेयरों में आई सुनामी का असर अडानी समूह के मुखिया गौतम अडानी (Gautam Adani) पर भी साफ दिखाई दिया है. 24 जनवरी को जब ये रिपोर्ट आई थी, उस समय गौतम अडानी पैसे के मामले में दुनिया के चौथे सबसे अमीर आदमी गिने जाते थे. लेकिन अब गौतम अडानी ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स में 20 पायदान फिसलकर 24 नंबर पर आ चुके हैं और 16 फरवरी को दोपहर 3 बजे के आसपास उनकी कुल संपत्ति 4.39 लाख करोड़ रुपये थी. 

इतना नुकसान होने के बाद भी अडानी समूह की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं. अब खबर आई है कि अडानी समूह की कंपनी अडानी पावर, डीबी पावर का अधिग्रहण करने में फेल हो गई है. अडानी पावर ने 15 फरवरी को रेगुलटर को दी जानकारी में बताया कि डीबी पावर का अधिग्रहण तय समय पर पूरा नहीं हो पाया है. कंपनी ने कहा है कि इस अधिग्रहण के लिए तय की गई लॉन्ग स्टॉप डेट यानी डील पूरी करने की तारीख निकल चुकी है.

ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा दांव, लेकिन…

आगे बढ़ने से पहले जानते हैं कि गौतम अडानी जिस कंपनी का अधिग्रहण करने वाले थे, वो काम क्या करती है और अडानी ये डील कितने में करने वाले थे. दरअसल डीबी पावर दैनिक भास्कर समूह की सब्सिडियरी कंपनी है. डीबी पावर के पास छत्तीसगढ़ के जंजगीर चंपा जिले में 1200 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट है. इसलिए अडानी पावर  इस कंपनी को खरीदकर छत्तीसगढ़ में अपने कारोबार को विस्तार देने की तैयारी में थी, इसीलिए अडानी समूह के लिए यह डील काफी मायने रखती है. 

एसबी एनर्जी इंडिया के अधिग्रहण के बाद, यह डील ऊर्जा क्षेत्र में अडानी का दूसरा बड़ा दांव था. इसी के तहत अडानी पावर ने पिछले साल 18 अगस्त को एक समझौते पर दस्तखत किए थे औऱ तय हुआ था कि अडानी समूह 7017 करोड़ रुपये में डीबी पावर का अधिग्रहण करेगी. यह डील पूरी करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2022 थी. हालांकि, बाद में इसे एक महीने के लिए बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया गया था. हालांकि, डील तब भी पूरी नहीं हो पाई. इसके बाद अडानी पावर ने डील पूरी करने की तारीख बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दी थी. इसके बाद इसे 15 दिन और बढ़ाकर 15 जनवरी कर दिया गया था. फिर 15 फरवरी को खबर आई है कि अब तक यह डील पूरी नहीं हो पाई है.

यह डील ऐसे समय पर टूटी है, जब अडानी समूह पहले से ही काफी संकट से गुजर रहा है. 24 जनवरी को अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर स्टॉक मैनुपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड समेत कई तरह के आरोप लगाए थे. इसके बाद से करीब तीन हफ्ते बीत चुके है लेकिन अडानी समूह का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार 15 जनवरी को शेयर मार्केट बंद होने के समय तक के आंकड़े देखें तो अडानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों में से एक अडानी पावर के शेयरों में करीब 50 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है. 

15 फरवरी को भी अडानी पावर के शेयर में  5 फीसदी की लोअर सर्किट लगा. इतना ही नहीं पिछले कई दिनों से अडानी पावर के शेयर में लोअर सर्किट लग रहा है. हालांकि, 16 फरवरी को दोपहर डेढ़ बजे के आसपास अडानी शेयर का 5 फीसदी की तेजी के साथ करीब 148 रुपये पर कारोबार कर रहा था. अडानी पावर को तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर तक) कंसोलिटेड नेट प्रॉफिट 96 फीसदी गिरकर 8.77 करोड़ रुपये रहा था. जबकि एक साल पहले की इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 218.49 करोड़ रुपये रहा था. कंपनी ने इसी महीने 8 फरवरी को अपने वित्तीय नतीजे जारी किये थे.  

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद से अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर की कीमत भी अपने लाइफटाइम हाई से गिरकर आधे से कम रह गई है. अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 4190 की ऊंचाई से गिरकर 1800 रुपये के आसपास आ गया है. लेकिन देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार कृष्ण मूर्ति सुब्रमण्यन ने टाइम्स ऑफ इंडिया के एक कॉलम में लिखा है कि अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर का भाव 3800 पहुंचना अकल्पनीय नहीं हैं.

डैमेज कंट्रोल में जुटा अडानी ग्रुप

आपको बता दें कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह ने अपना 20,000 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर पूरी तरह से सब्सक्राइब होने के बाद वापस ले लिया था. वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंडनबर्ग के झटके से उबरने के लिए अडानी समूह लगातार डैमेज कंट्रोल में लगा है. हाल ही में समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया था कि अडानी समूह अगले वित्त वर्ष के लिए रेवेन्यू टारगेट को 40 फीसदी से घटाकर 15 से 20 फीसदी कर सकता है. सूत्रों का कहना था कि अडानी समूह अब अपना पूरा ध्यान कर्ज चुकाने, कैश बचाने और नए निवेश में कम पैसा खर्च करने पर रहेगा. इसके अलावा अडानी समूह अपने गिरवी रखे शेयरों को छुड़ाने के लिए भी लगातार काम कर रहा है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी समूह की तीन कंपनियों ने बैंकों के पास अपने अतिरिक्त शेयर गिरवी रखे हैं जिन्हें जल्द से जल्द छुड़ाने का प्लान तैयार किया जा रहा है. अडानी समूह की जिन कंपनियों के शेयर गिरवी हैं उन कंपनियों में अडानी पोर्ट्स, अडानी ट्रांसमिशन और अडानी ग्रीन एनर्जी शामिल है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से समूह लगातार अपने कर्जों को घटाने पर भी काम कर रहा है. 

इससे पहले 6 फरवरी को समूह ने कहा था कि अडानी समूह अपनी तीन फर्मों के गिरवी शेयरों को छुड़ाने के लिए करीब 9100 करोड़ रुपये का लोन समय से पहले चुकाएगा. 8 फरवरी को अडानी समूह की प्रमुख कंपनियों में से एक अडानी पोर्ट्स ने भी अपना 5000 करोड़ रुपये का लोन चुकाने की घोषणा की थी. इसके अलावा अडानी समूह ने अगले महीने अपने करीब 4200 करोड़ रुपये के ब्रिज लोन को भी समय से पहले अदा करने की बात कही है. 

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