तालिबान ने मांगी टोयोटा से कारें, कंपनी ने देने से साफ मना कर दिया
Taliban Toyota Cars: तालिबान टोयोटा की कार चाहता है. इसके लिए Afghanistan की सरकार ने कंपनी से संपर्क भी किया. लेकिन कंपनी का कहना है कि वो तालिबान को अपनी कार नहीं दे रही है.

कार खरीदने का मन किया, तो कार कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर उनके बारे में सर्च करना शुरू कर दिया. बस इतना करते ही आपके पास कार कंपनियों के फोन आने शुरू हो जाते हैं. सोशल मीडिया पर कार के विज्ञापन दिखने लगते हैं. अब कौन सी कंपनी अपनी कार नहीं बेचना चाहेगी? तो कंपनी का नाम है ‘टोयोटा’, ग्राहक है ‘तालिबान’ और जगह है 'अफगानिस्तान'.
दिल्ली से करीब 1000 किलोमीटर दूर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बैठी तालिबान सरकार जापानी कंपनी टोयोटा से कारें खरीदना चाहती है. लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी कार कंपनी टोयोटा ने तालिबान को कार देने से इनकार कर दिया है.
कंपनी ने खुद माना है कि तालिबान सरकार ने उनसे कार खरीदने के लिए संपर्क किया था. लेकिन उन्होंने इस मांग को ‘ठुकरा दिया’. अब ये 'ठुकरा दिया' कुछ ड्रामेटिक नहीं हो गया? लेकिन तालिबान ने टोयोटा से कार क्यों मांगी और टोयोटा ने कार देने से क्यों मना कर दिया. इस पर बात करते हैं.
तालिबान और टोयोटा का किस्साअफगानिस्तान में पहले अमेरिका की फोर्ड मोटर कंपनी की रेंजर गाड़ियों का इस्तेमाल होता था. तालिबान सरकार सत्ता में आई, तो वो भी इसका इस्तेमाल करने लगी. लेकिन अब तालिबान 'चेंज' चाहता है. तालिबानी फोर्ड रेंजर से छुटकारा पाना चाहते हैं. एक तो इसके स्पेयर पार्ट्स जल्दी से नहीं मिलते और जो मिलते हैं, तो वे बहुत महंगे होते हैं.
ऊपर से तालिबान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं. इसलिए वो Ford कंपनी से कोई समझौता भी नहीं कर सकता. इन सब कारणों से तालिबान ने टोयोटा से कार खरीदने के लिए कॉन्टैक्ट किया था.

अफगानिस्तान में टोयोटा की डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी ‘हबीब गुलजार मोटर्स लिमिटेड’ के डायरेक्टर अहमद शाकिर अदील ने BBC हिंदी को बताया कि अफगान तालिबान ने टोयोटा से 27 सितंबर 2025 को कारों के लिए संपर्क किया था. मगर उन्होंने सरकार को मना कर दिया है.
अदील ने आगे कहा कि अफगानिस्तान में वे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, कुछ गैर-सरकारी संगठनों और दूतावासों को टोयोटा कार बेच सकते हैं. देश में टोयोटा की स्थानीय डीलरशिप 'हबीब गुलजार मोटर्स' के पास ही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 9/11 हमलों के दो महीने बाद अमेरिकी न्यूजपेपर ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि TV फुटेज में तालिबान को Land Cruiser चलाते देखा गया. इसके बाद टोयोटा ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि पिछले पांच सालों में अफगानिस्तान ने सिर्फ एक Land Cruiser कानूनी ढंग से इंपोर्ट की थी.
कंपनी ने कहा था कि अफगानिस्तान में मौजूद टोयोटा के प्रोडक्टस को पड़ोसी देशों से स्मगल किया गया होगा. टोयोटा को पसंद नहीं है कि उसकी गाड़ियों का नाम तालिबान और अल-कायदा से जुड़े. रिपोर्ट में दावा किया गया कि इसी वजह से जब तालिबान सत्ता में आया, तब कंपनी ने उन्हें गाड़ियां बेचने से मना कर दिया.
अब तालिबान क्या करेगा?टोयोटा कंपनी तालिबान के ऑप्शन में से एक थी. अब भइया टोयोटा ने तो हाथ पीछे कर लिए मगर तालिबानी सरकार इसके बदले कौन-सी गाड़ियां लेगी, वो अभी पता नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिम सरकार के गृह मंत्रालय ने बताया था कि दूसरे मॉडल पर अभी फैसला नहीं किया गया है. लेकिन अफगानिस्तान पुलिस की नई वर्दी टोयोटा की Hilux को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई थी. Hilux एक पिकअप ट्रक है, जो अपनी मजबूती और ऑफ-रोडिंग के लिए जाना जाता है.
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