क्या Ola की ई-बाइक Roadster X में कुछ भी अच्छा नहीं? इस रीव्यू ने पुर्जा-पुर्जा कर दिया
Electric Scooters तो देश में हौले-हौले रफ्तार पकड़ रहे हैं, मगर इलेक्ट्रिक बाइक का क्या हाल है? आज इसी की बात करेंगे. मगर क्यों करेंगे, क्योंकि ईवी में कभी मार्केट लीडर रही Ola की पहली मोटर साइकिल Roadster X (Ola first electric motorcycle Roadster X+) का रीव्यू चर्चा में है.

इलेक्ट्रिक स्कूटर ने इंडिया में हल्लु-हल्लु रफ्तार पकड़ ही ली है. बड़े शहरों के बाद मझोले शहरों में भी इनको देखा जा सकता है. प्रीमियम सेगमेंट में TVS, बजाज, Ather जैसे बड़े नाम हैं तो कई लोकल कंपनियां बजट में भी ई-स्कूटर बना रही हैं. लेकिन ई-बाइक का क्या सीन है? आज इसी की बात करेंगे. मगर क्यों करेंगे? क्योंकि ईवी में कभी मार्केट लीडर रही Ola की पहली मोटर साइकिल Roadster X (Ola first electric motorcycle Roadster X+) का रीव्यू चर्चा में है. इस रीव्यू ने सोशल मीडिया पर ई-बाइक के फ्यूचर पर ब्रेक सा लगा दिया है.
क्या है रीव्यू में?देश की सबसे प्रतिष्ठित ऑटो पत्रिका Autocar India ने लिखा,
एक महीने से अधिक समय तक ओला इलेक्ट्रिक रोडस्टर का रीव्यू करने के बाद, हमें भारत में बनी अब तक की सबसे खराब बाइक के बारे में कुछ भी अच्छा कहने को नहीं मिला! यह चौंकाने वाली बात है कि ओला ने वास्तव में इतना खराब प्रोडक्ट बाजार में उतारा है.
ऑटोकार ने ओला के पहले असली प्रोडक्ट का 14 मिनट का रीव्यू पब्लिश किया है जिसमें शायद 14 खामियां गिनाई गई हैं. हम आपको पूरी 14 तो नहीं, 7 ही बता देते हैं. असली प्रोडक्ट, तो क्या स्कूटर असली प्रोडक्ट नहीं है. चलो ये भी बता देते हैं. Ola S1 तो एक डच कंपनी Etergo का प्रोडक्ट था जिसे ओला ने 2020 में खरीदा था.
(1) कंपनी के फ्लैगशिप प्रोडक्ट में जगह-जगह पैनल गैप है. स्पेशली सीट के नीचे तो इतना गैप है कि इंसान का हाथ आराम से चला जाएगा. सीट के नीचे से चार्जर निकाल लेने पर भी गैप खत्म नहीं होता है.
(2) बैटरी से पीछे के चक्के को जोड़ने वाली स्विंग आर्म कुछ ज्यादा ही पतली है. ऐसा लगता है जैसे बचे हुए लोहे से जुगाड़ लगाकर ढांचा बनाया गया है. गाड़ी में अगर दो लोग बैठे तो पक्का रिस्क है.
(3) बाइक में लगे बोल्ट पुराने लगते हैं. इसी तरफ जो बटन लगे हैं उनका प्लास्टिक एकदम प्लास्टिक वाली गाड़ी जैसा है. एकदम बेकार. चार्जिंग का ढक्कन भी कबाड़ वाले प्लास्टिक से बनाया लगता है.
(4) आज के जमाने में एलसीडी डिस्प्ले दिया है जो अजीब-अजीब चीजें दिखाता है. जैसे ईको मोड में सबसे कम रेंज बताता है. जबकि इसमें रेंज सबसे ज्यादा होती है. कई बार इसमें रेंज एकदम जीरो हो जाती है. माने रास्ते पर अगर डिस्प्ले देख लिया तो मिनी हार्ट अटैक आना तय है.
(5) ऐप का हाल बेहाल है. कंपनी ने बाइक तो सड़क पर उतार दी मगर ऐप अपडेट नहीं किया. ओला का ऐप अभी भी बाइक को स्कूटर ही समझता है और कई बार चार्जिंग ऑन बताता है, जबकि बाइक बिना प्लग के खड़ी होती है.
(6) सीट में फोम भरा है. कंपनियां जहां सीट को आरामदायक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं, वहीं ओला ने सीट में सस्ता फोम लगाया है. 15 मिनट बैठने के बाद तशरीफ़ को तकलीफ होने लगती है.
(7) ईको मोड में स्पीड 42 किलोमीटर से ऊपर नहीं जाती. मतलब किसी बड़े शहर में तो ये किसी काम का नहीं. नॉर्मल मोड में जैसे ही बैटरी 90 फीसदी से नीचे आती है, परफ़ोर्मेंस एकदम गिर जाता है. चलाते समय राइडर को सड़क की जगह इस बात पर ज्यादा फोकस करना पड़ता है कि कौन से मोड में गाड़ी चलानी है.
भईया अपन तो बिना चलाए ही थक गए इसलिए आप पूरा वीडियो देख लो. अपन बात करते कि ई-बाइक का होगा क्या. आपको लगेगा कि एक रीव्यू से क्या होता है. दोस्त किसी प्रोडक्ट में इतनी खामियां मिलना बताता है कि कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ गड़बड़ है दया. प्रोडक्ट रीव्यू में खामियां मिलती हैं, मगर कुछ तो अच्छा होता है बताने को.
लेकिन जैसा हम हमेशा से कहते हैं कि रीव्यू से कोई खास फर्क नहीं पड़ता. ओला की ये बाइक MP, UP और बिहार में बिक रही है. रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने मार्च-अप्रैल में 500 बाइक बेची हैं. वैसे ऐसा रिस्पॉन्स उसके स्कूटर को भी मिला था. स्कूटर से याद आया कि कंपनी ई-स्कूटर में बहुत पीछे है. सेल 25 हजार महीने से 7 हजार पर आ गई है. सर्विस की बात तो रहने देते हैं. उसके लिए तो खराब शब्द भी काफी नहीं. कंपनी का AI असिस्टेंट Kruti भी कुछ दिनों से ऑफलाइन है.
वैसे मार्केट में Ultraviolette, Revolt जैसी कंपनियां भी हैं. Royal Enfield Flying Flea C6 भी लॉन्च हो गई है. MATTER भी है जो गियर वाली मोटर बाइक बनाती है. लेकिन चावल पका है या नहीं, ये एक चावल से चेक होता है. इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर हमारा अनुभव भी ठीक ही है. माने अच्छा से एक नीचे. किसी दिन अपनी भी बताएंगे, मगर आपको सलाह होगी कि किसी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल में पैसा लगाने से पहले 14 बार सोच लेना, नहीं तो जेब को 440 वोल्ट का झटका लग सकता है.
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