कार का इंजन ऑयल, गियर ऑयल और एयर फ़िल्टर कब बदलवाना चाहिए? सब जानिए
गाड़ी के इंजन ऑयल से लेकर गियर ऑयल और एयर फ़िल्टर को सर्विस सेंटर के कहने से नहीं बल्कि किलोमीटर और समय के हिसाब से बदलवाना चाहिए. क्योंकि सर्विस सेंटर का काम है सर्विस करना. आगे आप समझ ही गए होंगे. किलोमीटर हम बताते हैं.

आप अपनी कार का इंजन ऑयल तो बदलवाते ही होंगे. गियर ऑयल भी चेंज करवाते होंगे और AC बढ़िया काम करता रहे इसलिए एयर फ़िल्टर भी चेंज करवा लेते होंगे. गड्डी गरम नहीं हो इसलिए कूलेंट भी डलवाते होंगे. खच्च से ब्रेक लगे इसलिए ब्रेक पैड्स भी रिप्लेस करवाते होंगे. टायर रोटेशन भी करवाते होंगे. यहां तक स्टोरी की गाड़ी आते-आते आप कहोगे हां-भई-हां. एकदम करवाते हैं. तुम क्या कहना चाहते हो. कहना कुछ नहीं था जी. बस पूछना था ये सब किसके कहने से करवाते (five car maintenance checkpoint everyone should know) हैं. सर्विस सेंटर के कहने से. अजी यही तो नहीं करना है.
गाड़ी के इंजन ऑयल से लेकर गियर ऑयल और एयर फ़िल्टर को सर्विस सेंटर के कहने से नहीं, बल्कि किलोमीटर और समय के हिसाब से बदलवाना चाहिए. क्योंकि सर्विस सेंटर का काम है सर्विस करना. आगे आप समझ ही गए होंगे. किलोमीटर हम बताते.
इंजन ऑयलइंजन ऑयल सबसे जरूरी चीज है तो ध्यान रखें कि हमेशा अच्छी क्वालिटी का डलवाना चाहिए. अगर मिनिरल ऑयल इस्तेमाल करते हैं तो 10 हजार किलोमीटर पर हर 6 महीने में बदल दीजिए. जो आप सिंथेटिक ऑयल डलवाते हैं तो हर एक साल में 10 हजार किलोमीटर पर बदल दीजिए. जब भी इंजन ऑयल चेंज करवाते हैं तो पुराना ऑयल पूरा खाली कर दीजिए.

एयर फ़िल्टर बदलने का कार्यक्रम इस बात का डिपेंड करता है कि आप किस जगह गाड़ी चलाते हैं. धूल भरा इलाका है या प्रदूषण की मार झेल रहे हैं तो हर 6 महीने में बदल दीजिए. अगर मौसम सुहाना वाले इलाके में रहते हैं तो एक साल में बदलने से भी काम चलेगा.

टायर रोटेशन मतलब चक्कों की अदला-बदली. आगे का पीछू और पीछू का आगे. इसके साथ साइड भी बदल देते हैं ताकि चारों टायर एक साथ घिसें. 10 हजार किलोमीटर पर रोटेट करवा दीजिए और भी आजू-बाजू की नई टायर वाली दुकान पर. सर्विस सेंटर पर मत करवाना क्योंकि वो भी ये काम बाहर से ही करवाते हैं. आपको सर्विस का पैसा फिजूल में देना पड़ता है.
गियर ऑयलये कोई जल्दी बदलने वाली चीज है ही नहीं. 50 हजार से 60 हजार किलोमीटर के पहले इसको बदलने का कोई तुक नहीं. मोटा-माटी आम इस्तेमाल वाली गाड़ी में 5 साल से पहले बदलने की कोई जरूरत नहीं.
ब्रेक पैडगाड़ी का सबसे ज्यादा घिसा जाने वाला पार्ट स्पेशली जब हम शहर में और ट्रैफिक में गाड़ी चलाते हैं. इसलिए 10 हजार किलोमीटर पर बदलवा दीजिए. अगर उसके पहले भी ब्रेकिंग में समस्या लगे तो बदल दीजिए.
इसी तरह कूलेंट और स्पार्क प्लग भी 40 हजार किलोमीटर से पहले चेंज करवाने की जरूरत नहीं है. वैसे भी गाड़ी आपकी है तो सबसे अच्छे से आपको ही पता होता है कि कैसे चल रही है. इसलिए सर्विस सेंटर का ज्ञान पूरा मत लीजिए. गाड़ी के मैनुअल के हिसाब से सही रहेगा.
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