E30 फ्यूल से चल पाएगी आपकी कार? BMW के सीईओ का जवाब सरकार को जरूर सुनना चाहिए
'कार एंड बाइक' न्यूज़ पोर्टल के साथ बातचीत में, हरदीप सिंह बरार ने ज़्यादा इथेनॉल ब्लेंड और मौजूदा गाड़ियों पर उनके असर के (Existing Cars Cannot Be Upgraded For E30 Fuel) बारे में बात की.

E20 फ्यूल की वजह से 2023 से पहले की गाड़ी वाले परेशान हैं. गाड़ी में टूट-फूट बढ़ गई है तो सर्विस का खर्चा भी बढ़ गया है. लेकिन आपके पास तो 2023 वाली कार है. E20 कंपैटिबल है, इसलिए आपको बे-कार में परेशान होने की जरूरत नहीं. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो तनिक अपनी सोच को और कार को ब्रेक (Existing Cars Cannot Be Upgraded For E30 Fuel) लगाइए. MINI India और BMW Group India के प्रेसीडेंट और सीईओ Hardeep Singh Brar जो कह रहे, वो पढ़ लीजिए.
'कार एंड बाइक' न्यूज पोर्टल के साथ बातचीत में, हरदीप सिंह बरार ने ज़्यादा इथेनॉल ब्लेंड और मौजूदा गाड़ियों पर उनके असर के बारे में बात की. जब उनसे पूछा गया कि क्या अभी इस्तेमाल हो रही कारों को E30 फ़्यूल के लिए अपग्रेड किया जा सकता है, तो बरार ने बताया कि ऐसा बदलाव शायद आसान न हो.
कोई कार सेफ नहींबरार ने बताया कि E30 फ़्यूल लागू करने से पहले, ज़्यादा इथेनॉल वाले फ़्यूल का इंजन, फ़्यूल सिस्टम और गाड़ी के दूसरे हिस्सों पर क्या असर पड़ेगा, इसकी अच्छी तरह से स्टडी की जानी चाहिए. चिंता का विषय ये भी है क्योंकि भारत की सड़कों पर लाखों गाड़ियां दस साल से ज़्यादा पुरानी हैं. इनको E30 और उन्हें E20 फ़्यूल तो छोड़िए, E15 के हिसाब से भी नहीं बनाया गया था.
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि 1 अप्रैल 2026 से देश में E20 फ्यूल अनिवार्य हो गया है. E20-कम्पैटिबल गाड़ियां बनाना भी अप्रैल 2023 में ही शुरू हुआ. ऐसे में पुरानी गाड़ियों के लिए मुश्किल हो रही है. कई सारे सर्वे बताते हैं कि पुरानी गाड़ियों में माइलेज भी कम हुआ है. हालांकि सरकार इन सब दावों से इंकार करती है. सरकार E22, E27 और E30 फ्यूल के लिए भी नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है.
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बरार ने यह भी बताया कि MINI ग्राहकों के बीच कुछ चिंताएं सामने आई हैं. हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से बात नहीं की, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि ईंधन से जुड़ी कम्पैटिबिलिटी की समस्याएं मैन्युफैक्चरर्स और ग्राहकों, दोनों के लिए ऐसी चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं जिनसे बचा जा सकता था. बरार ने ज़ोर दिया कि सरकारी एजेंसियों को यह पक्का करना चाहिए कि नए फ़्यूल ब्लेंड्स को लागू करने से सड़कों पर पहले से चल रही गाड़ियों पर बुरा असर न पड़े.
टाइम लाइन भी सेट होBMW Group India के सीईओ ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जब भी ईंधन से जुड़े नए नियम लागू किए जाएं, तो उनके लिए साफ़ समय-सीमा पहले से ही बता दी जानी चाहिए. उनके अनुसार, ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों को इंजीनियरिंग में बदलाव करने, वैलिडेशन टेस्ट करने और आने वाले नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए काफ़ी समय की ज़रूरत होती है.
कहने का मतलब फिलहाल के लिए भले आप सुकून की ड्राइव कर सकते हैं मगर E30 आने से आपके सुकून को ब्रेक लग सकता है.
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