BMW और मर्सिडीज को कंटेनर से भोपाल से विशाखापट्टनम भेजा, बीच रास्ते कंपनी ने कांड कर दिया
भोपाल से विशाखापट्टनम भेजी जा रही दो लग्जरी कारों BMW और Mercedes को कंटेनर में सुरक्षित पहुंचाने के बजाय रास्ते में उतारकर सैकड़ों किलोमीटर तक चलाने का मामला सामने आया है. कमाल की बात ये है कि दोनों ही मामलों में एक ही कंपनी शामिल है.

तमाम तरीके के स्कैम, फर्जीवाड़े और ठगी के तरीके आपने देखे और सुने होंगे. लेकिन आज हम आपको ऐसे फर्जीवाड़े के बारे में बताने वाले हैं जिसको जानकर आपकी हंसी छूटने वाली है. फर्जीवाड़े का मीटर जब आपके सामने आएगा तो शायद आप ये सोचकर माथा पीट लें कि भई ये भी होता है. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपनी BMW और Mercedes की सीट बेल्ट बांध लीजिए. अंदाजा आपने लगा लिया होगा कि बात कार के किसी कारनामे की होने वाली है.
दरअसल भोपाल से विशाखापट्टनम भेजी जा रही दो लग्जरी कारों बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज को कंटेनर में सुरक्षित पहुंचाने के बजाय रास्ते में उतारकर सैकड़ों किलोमीटर तक चलाने का मामला सामने आया है. कमाल की बात ये है कि दोनों ही मामलों में एक ही कंपनी शामिल है.
BMW चला दी 760 किमीदैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इनर्जी ट्रेडिंग एंड सर्विसेस लिमिटेड ने अपनी बीएमडब्ल्यू कार को भोपाल से विशाखापट्टनम भेजने के लिए दिलीप रोड लाइंस से कंटेनर बुक किया. इसके लिए 60 हजार रुपए का भुगतान किया गया. बुकिंग के समय वाहन की मीटर रीडिंग करीब 3864 किलोमीटर थी लेकिन जब कार विशाखापट्टनम में डिलीवर हुई तो मीटर रीडिंग 4624 किलोमीटर हो गई. फास्टैग और मीटर रीडिंग की जांच में पता चला कि भोपाल से हैदराबाद तक तो वाहन कंटेनर में लाया गया, लेकिन उसके बाद कंपनी के कर्मचारियों ने बिना ग्राहक की अनुमति के कार को कंटेनर से उतारकर करीब 760 किलोमीटर सड़क मार्ग से चलाकर पहुंचा दिया.
मर्सिडीज भी 757 किमी चला दीकेआरएस डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की मर्सिडीज बेंज कार भोपाल से विशाखापट्टनम जाना थी. इस बार भी एजेंसी दिलीप रोड लाइंस थी. पैसा भी 60 हजार लगा था. इस बार भी कार को हैदराबाद के पास कंटेनर से उतारकर करीब 757 किलोमीटर तक सड़क मार्ग से चलाकर विशाखापट्टनम पहुंचाया गया.
कोर्ट ने सुधार दियाइसके बाद दोनों वाहन मालिकों ने पुलिस में शिकायत और कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा. सुनवाई के दौरान दिलीप रोड लाइंस की ओर से तर्क दिया गया कि हैदराबाद के पास रास्ते में जुलूस निकलने के कारण बहुत ट्रैफिक था और समय पर डिलीवरी करने के लिए कारों को कंटेनर से उतारकर चलाना पड़ा. हालांकि आयोग ने माना कि ग्राहक की अनुमति के बिना ऐसा करना सेवा में कमी है और इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता.
जिला उपभोक्ता आयोग भोपाल की पीठ ने दोनों मामलों में कंपनी को आदेश दिया कि दो माह के भीतर 60 हजार रुपये वापस करे. इसके अलावा 25 हजार रुपये सेवा में कमी के लिए, 20 हजार मानसिक कष्ट के लिए और 5 हजार वाद व्यय के रूप में भुगतान करे. निर्धारित अवधि में राशि नहीं देने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
बताइए क्या-क्या हो रहा है. इतने पैसे में तो कार खुद से चलकर भोपाल से विशाखापट्टनम पहुंच जाती.
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