Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

'रस्किन एक सेलेब्रिटी नहीं, बच्चों को कहानियां सुनाने वाले बूढ़े दादू हैं'

bhaiअनिमेष इंजीनियर है. जब ये इंजीनियर बन रहे थे, यानी जब पढ़ाई कर रहे थे. तब खूब लिखा करते थे. गिटार-विटार भी बजाते थे. लेकिन अब ये पूरे इंजीनियर हो गए हैं. तो वक़्त नहीं मिल पाता. कुछ साल पहले ये रस्किन बॉन्ड से मिलने मसूरी गए थे. तो लल्लन ने इनसे कहा कि ये हमें अपनी यादें लिख भेजें. और इन्होंने लिख भेजा. आपके पास भी अगर ‘लल्लनटॉप’ कंटेंट हो तो हमें lallantopmail@gmail.com पर भेज सकते हैं. अच्छा लगा तो हम छापेंगे.


साल 2009 की गर्मियों का सेमेस्टर ब्रेक. मैं देहरादून के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम में इंटर्नशिप कर रहा था. मुझे किसी ने बताया कि रस्किन बॉन्ड हर बुधवार को मसूरी की एक बुक शॉप पर आते हैं. और अपने फैन्स के साथ थोड़ा समय गुज़ारते हैं.

बस, उनसे मिलने की चुल्ल उठने लगी. बचपन से उनकी कहानियां पढ़ी थीं. लेकिन अकेले जाने में जरा घबराहट होती है.

इसलिए अपने बैचमेट चुरू भाई को कोंचना शुरू किया. “चुरू भाई, रस्किन बॉन्ड से मिलने चलना है मसूरी? लाइफटाइम ऑपर्चुनिटी है. इसी बुधवार चलते हैं.

चुरू भाई जरा बाबा टाइप के थे. धीरज के साथ सुनते रहे. गहरी सांस ली. और बोले, “चल तो देंगे पांडेजी, लेकिन ये तो बताओ कि ये रस्किन बॉन्ड है कौन. और हमें इससे क्यों मिलना है ?”.

कोई रस्किन बॉन्ड को नहीं जानता होगा, ये मैंने कभी सोचा नहीं था. फिर अपनी गलती समझ आई.

रस्किन बॉन्ड के बारे में जितना मुझे पता था, उन्हें सब बताता चला गया. चुरू भाई को मेरी बातों से ज्यादा मेरी उत्सुकता भा रही थी. उन्होंने बड़े धीरज से सुना. फिर बोले, “तो? इनके लिए मसूरी चले जाएं?”

मुझे लगा, जमीन पर लोट जाऊं. लेकिन चूंकि चुरू भाई ज्ञानी टाइप के आदमी थे, वो गूगल देवता की शरण में पहुंचे. उन्होंने रस्किन बॉन्ड और मसूरी के बारे में विकिपीडिया से इतनी जानकारी हासिल कर ली, जितनी मुझे भी नहीं थी. फिर गौतम बुद्ध की तरह एन्लाइटेंड होकर बोले, “अच्छा एक्सपीरियंस रहेगा पांडेजी, हमें चलना चाहिए. अरे वो अपना नवदीप है ना, देहरादून का ही है, उसके घर जाकर उसकी बाइक ले लेंगे, और उसी से चलेंगे.” चुरू भाई की यही खासियत है, हर जगह जुगाड़ बिठा लेते हैं. नवदीप को मैं भी जानता था, हमारे कॉलेज का ही था, लेकिन नॉलेज का सही समय पर एप्लीकेशन और यूज तो बस चुरू भाई ही जानते थे.

तो मैं रस्किन से मिलने, और चुरू भाई बाइक से घूमने के लक्ष्य से निकल पड़े. नवदीप की बाइक पर. दोपहर के तीन बज गए थे निकलते निकलते. हलकी धूप और पहाड़ों की सोहबत ने मुझे अपने आप ही रस्किन साहब की कहानियों में पंहुचा दिया. चुरू भाई ने पहले ही बाइक चलाने का ज़िम्मा अपने मजबूत कंधों पर ले लिया था. “पहाड़ी रास्ता है पांडेजी, संभलकर चलाना पड़ेगा”, यह सुनकर ही मैं समझ गया था कि चुरू भाई क्या चाहते हैं.

अपनी यात्रा शुरू हुई. घुमावदार रास्ते, जिनका ख्याल चुरू भाई बखूबी रख रहे थे. जंगल, पहाड़, नहर, बादल और आने-जाने वाले लोगों पर मेरी नज़रें इधर-उधर गोते खा रही थी. वो हर चीज़ जो मुझे दिखती उसे कहीं न कहीं मैं रस्किन की कहानियों से जोड़ने की कोशिश करता. “अरे वो लड़का, बिलकुल उस सूरज की तरह है! नहर में नहाने आया है अपने दोस्तों के साथ. अरे वो सुरंग! वहां पक्का वो चौकीदार रहता होगा जो आती-जाती ट्रेनों को बत्ती दिखाता होगा. इन जंगलों में चीते रहते होंगे. वो बड़े भारी पेड़ पे तो किसी का भी घर बन सकता है, रस्किन की नानी वहीं रहती होंगी शायद.”

dehradun to mossurie

न जाने उनकी ऐसी कितनी कहानियों, कविताओं की घटनाओं का हर दृश्य, हर मंज़र से जोड़ता-तोड़ता, बाइक के हिचकोलों और ‘तीव्र मोड़ों’ के साथ बदलता-बुनता आखिर मसूरी शहर में दाखिल हो गया.

शहर में घुसते ही हमने उस किताब की दुकान का पता मालूम किया. उनके आने के निर्धारित समय से आधा घंटा पहले ही हम वहां पहुंच गए. पहुंचने पर पता चला कि दुकान उनके बचपन के दोस्त की है. वो हर हफ्ते एक-दो बार यहां आते हैं. यहां उनकी किताबों का सेक्शन अलग से है. वो वहां अपने फैन्स से मिलते हैं, कुछ देर पढ़ते हैं और फिर निकल जाते हैं. यह जानकर लगा की ये तो वही कहानियों वाला प्यारा रस्किन है, जो दोस्तों के लिए जीता है. आसपास की छोटी छोटी चीज़ें जिन पर हम कभी ध्यान नहीं देते, वो उसकी ज़िन्दगी का अहम हिस्सा हैं. जिसके जीवन में बुरे लोग हैं ही नहीं, सब हीरो हैं. और अपने-अपने तरीके से सब इस धरती को सजाते रहते हैं.

जैसे-जैसे उनके आने का समय पास आता जा रहा था, उनसे मिलने के लिए आने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी. मम्मियां अपने बच्चों को सिखा रही थीं कि उनसे कैसे बात करनी है. क्या नहीं बोलना है, जैसे उनके बच्चे का किसी प्राइवेट इंग्लिश स्कूल में एडमिशन इंटरव्यू हो. ये सब देख मैं भी थोड़ा नर्वस हो गया. अभी तक तो सोचा था, एक किताब खरीद कर, लाइन में लग कर, उनके ऑटोग्राफ ले लूंगा और चलता बनूंगा. लेकिन यहां का माहौल देखकर लगा कि शायद बात करने को भी मिल जाए. अब अगर ऐसा हुआ तो क्या बोलूंगा. दिमाग में रिहर्सल होने लगी जिसमें मैं क्रीपी दिखने लगा, फिर एम्बैरस भी होने लगा. तभी मेरी नज़र चुरू भाई पर गयी, जिनको पता लग चुका था कि वो किसी सेलिब्रिटी से मिलने आए हैं. वो अपना कैमरा चेक करने के बहाने से आस-पास खड़ी लड़कियों की फोटो खींचना शुरू कर चुके थे.

और तभी मुझे एक जाना-पहचाना चेहरा दिखाई पड़ा. जो आजतक मैंने सिर्फ किताबों के पीछे वाले कवर पेज पर देखा था. या फिर चुरू भाई के विकिपीडिया सर्च में.

एक लम्बा, मोटू, बुढ्ढा और कुछ ज़्यादा ही गोरा आदमी, जिसके चेहरे पर एक हल्की और स्थायी सी मुस्कान पसरी हुई थी. आस्था चैनल के संतों जैसी नहीं, बल्कि एक छोटे बच्चे की तरह जिसे अभी-अभी बहुत ज़िद करने के बाद अपने पसंद की चीज़ दिला दी गयी हो. ऊपर स्कूलों में पहना जाने वाला गहरे नीले रंग का ऊनी स्वेटर और नीचे ग्रे रंग की पैंट पहने, बड़ी सहजता से आकर अपने नाम वाले सेक्शन के पास रखी कुर्सी पर बैठ गया.

लोग पहले थोड़ा सकुचाए, अपने-अपने दिमाग में चल रही रिहर्सल को शायद फिर से प्ले किया. फिर एक अंकल जिन्हें उनके रस्किन होने का यकीन होने लगा था, अपने साथ आए 11-12 साल के बच्चे से गंभीर आवाज में बोले, “बेटा, अंकल के पैर छुओ.” ये हमारे समाज में छोटों और बड़ों को आपस में इंट्रोड्यूस कराने का फेवरेट अंदाज़ है. बच्चा आज्ञाकारी निकला और लपककर पैर छूने के लिए झुका. तभी रस्किन ने अपना हाथ उसके सर पर रखा. और थोड़ा जोर देकर उसे उठने से रोकते हुए बोले, “now you are locked my son, you can’t move unless you’ve got all the blessings you need.” इतना कहकर एक शैतानी मुस्कराहट उनके चेहरे पर आ गयी. और वहां खड़े सारे लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए. एक ही पल में उन्होंने माहौल को हल्का कर दिया. ऐसा लगा की वो कोई सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि हमारे ही घर के एक मस्तमौला बुज़ुर्ग हैं. जो आज अपने बच्चों को कहानियां सुनाने बैठे हैं.

ruskin
अपने फैन्स से मिलते रस्किन

एक-एक कर लोगों ने उनसे मिलना शुरू कर दिया. कुछ किताबों पर ऑटोग्राफ लेते, कुछ उनको ये बताते की उन्हें उनकी कौन सी कहानियां अच्छी लगती हैं. और उनका धन्यवाद देते. हैरानी तो तब हुई जब चुरू भाई ने भी अपनी पसंदीदा कहानी उनको बताई और उनके ऑटोग्राफ़ लिए. उनकी इस अदाकारी को देख के मैं, वो क्या कहते हैं, ‘भावविभोर’ हो उठा. और याद आया की मुझे भी उनसे मिलना है. उनकी एक किताब जो मैंने वहीं से खरीदी थी, उसपर उनके ऑटोग्राफ लिए. उनका आशीर्वाद लिया. और उनकी कहानियों और कविताओं के बारे में मैं क्या महसूस करता हूं, एक-एक कर जल्दी-जल्दी बताता चला गया. बड़े आराम से उन्होंने सब कुछ सुना और कहा, “गॉड ब्लेस यू माइ सन”. मेरे पीछे मिलने वालों की भीड़ और बढ़ गयी थी, इसलिए फटाफट मैंने और चुरू भाई ने उनके साथ फोटो खिंचाई और बहार निकल आये.

कुछ इतना जल्दी हुआ, कि दिमाग सन्न था. और दिल धड़क रहा था. कहानियां, कल्पनाएं और भावनाएं मैं उनकी किताबों में अनुभव करता आया था, आज उनको खुद महसूस किया. बिना वजह ख़ुशी कैसे मिल जाया करती है. और बिना किसी बड़ी घटना के बावजूद लोगों को सुनाने के लिए कहानियां कैसे मिल जाया करती हैं, इसका पूरा अंदाज़ा आज लग गया.

चुरू भाई को भी लौटते वक़्त मार्केट में अपनी पोटेंशियल गर्लफ्रेंड के लिए एक कड़ा मिल गया. जिसे लेकर उन्होंने कहा, “उसे ये देकर बताऊंगा कि मैं आज रस्किन बॉन्ड से मिला था. वो तो पक्का उन्हें जानती होगी, बहुत अंग्रेजी किताबें पढ़ती है.” इस पर मैंने कोई टिप्पणी नहीं की. और उन्हें खुश करते हुए बोला, “चुरू भाई, लौटते वक्त गाड़ी बिना स्टार्ट किए हुए चलाएंगे, पूरे रास्ते ढलान है, आराम से ऐसे ही चली जाएगी.”

हम लोग वापस देहरादून आ गए. अगले दिन ऑर्कुट पर मैंने और चुरू भाई ने पूरी दुनिया को सबूत के तौर पर फोटो के साथ अपनी यात्रा के बारे में बताया.

और हां, हमने नवदीप की बाइक बिना सर्विसिंग कराए, देहरादून छोड़ने तक वापस नहीं की.


ये भी पढ़ेंः

मंटो को समझना है तो ये छोटा सा क्रैश कोर्स कर लो

अश्लील, फूहड़ और गन्दा सिनेमा मतलब भोजपुरी सिनेमा

चेतन भगत क्या वाकई बुरे लेखक हैं?

इकबाल के सामने जमीन पर क्यों बैठे नेहरू?

वो गायिका जिनकी आवाज़ में बगावत धड़ धड़ धड़कती है

 

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.

विजय, अमिताभ बच्चन नहीं, जितेंद्र थे. क्विज खेलो और जानो कैसे!

आज जितेंद्र का बड्डे है, 75 साल के हो गए.

पापा के सामने गलती से भी ये क्विज न खेलने लगना

बियर तो आप देखते ही गटक लेते हैं. लेकिन बियर के बारे में कुछ जानते भी हैं. बोलो बोलो टेल टेल.

सत्ता किसी की भी हो इस शख्स़ ने किसी के आगे सरेंडर नहीं किया

मौकापरस्ती को अपने जूते की नोक पर रखने वाले शख्स़ की सालगिरह है आज.

सुखदेव,राजगुरु और भगत सिंह पर नाज़ तो है लेकिन ज्ञान कितना है?

आज तीनों क्रांतिकारियों का शहीदी दिवस है.

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?

Quiz: आप भोले बाबा के कितने बड़े भक्त हो

भगवान शंकर के बारे में इन सवालों का जवाब दे लिया तो समझो गंगा नहा लिया

Quiz: विराट कोहली को कितने अच्छे से जानते हैं आप?

कोहली को मिला पद्मश्री, समझते हो, बड़ी चीज है. आओ टेस्टिंग हो जाए तुम्हाई.

'काबिल' देखने जाओगे? पहले ये क्विज खेल के खुद को काबिल साबित करो

सलमान ने ऐसा क्या कह दिया था जिससे हृतिक हो गए थे नाराज़? खेल लो. जान लो.

न्यू मॉन्क

असली बाहुबली फिल्म वाला नहीं, ये है!

अगली बार जब आप बाहुबली सुनें तो सिर्फ प्रभाष के बारे में सोच कर ही ना रह जाएं.

द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन क्यों नहीं गए थे?

महाभारत के दस रोचक तथ्य.

परशुराम ने मां की हत्या क्यों की थी और क्षत्रियों को क्यों मारते थे, यहां जानो

परशुराम से जुड़े वो सारे मिथ, जो लोग आपको बिना किसी प्रूफ के बताते हैं. आज जयंती है.

कहानी कार्तवीर्य की, जिसने रावण को दबोचा, जिसको परशुराम ने मारा

रावण को बांध के पीटने वालों में एक ये भी था.

इक्ष्वाकु और भगवान राम में था 53 पीढ़ियों का जेनरेशन गैप

भगवान राम के पूर्वजों का फ्लोचार्ट भी बड़ा इंटरेस्टिंग है.

नाम रखने की खातिर प्रकट होते ही रोने लगे थे शिव!

शिव के सात नाम हैं. उनका रहस्य जानो, सीधे पुराणों के हवाले से.

अपनी चतुराई से ब्रह्मा जी को भी 'टहलाया' नारद ने

नारद कितने होशियार हैं इसका अंदाजा लगा लो.

इस गांव में द्रौपदी ने की थी छठ पूजा

छठ पर्व आने वाला है. महाभारत का छठ कनेक्शन ये है.

नारद के खानदान में एक और नारद

पुराणों में इन दोनों नारदों का जिक्र है एक साथ.

नारद कनफ्यूज हुए कि ये शाप है या वरदान

नारद को मिला वासना का गुलाम बनने का श्राप.