10 Feb 2026
Author: Suryakant
इंटरनेट का इस्तेमाल भले ही सेफ हो गया है मगर अभी भी साइबर ठगी का खतरा बना रहता है, स्पेशली घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ.
Image Credit: HelpAge India
भारत में करीब 15 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं, जो डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म इस्तेमाल करते हैं. इंटरनेट की उपलब्धता ने उनकी ज़िंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें साइबर धोखाधड़ी के खतरे में भी डाल दिया है.
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फ़िशिंग, फर्जी कॉल और स्कैम्स तो पहले से ही थे. डिजिटल अरेस्ट और डीप फेक ने बुज़ुर्गों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
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डिजिटल दुनिया से बुज़ुर्गों को अलग भी नहीं किया जा सकता है. मतलब UPI सहित बैंकिंग ऐप्स का इस्तेमाल तो होगा ही. ऐसे में उनको ठगी से सेफ रखने का एकमात्र तरीका उनको जागरूक रखना है.
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ऐसे मामलों में HelpAge India का Project Surakshit बुज़ुर्गों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचा सकता है.
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HelpAge India देश के करीब 20 राज्यों में बुज़ुर्गों के लिए डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा की ट्रेनिंग और वर्कशॉप्स करता है. यह काम सीनियर सिटीजन एसोसिएशनों के साथ मिलकर किया जाता है.
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इन वर्कशॉप्स में बुज़ुर्गों को मज़बूत पासवर्ड बनाना, ऑनलाइन स्कैम और नकली वेबसाइट पहचानना, स्मार्टफ़ोन सुरक्षित रखना, सुरक्षित तरीके से कैब बुक करना, ऑनलाइन बैंकिंग और बिल पेमेंट जैसे ज़रूरी काम सिखाए जाते हैं.
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अलग-अलग राज्यों के लिए यह ट्रेनिंग स्थानीय भाषाओं में तैयार की गई है. अगर कोई बुज़ुर्ग साइबर अपराध का शिकार हो जाता है, तो उन्हें राष्ट्रीय टोल-फ़्री साइबर हेल्पलाइन 1930 की जानकारी भी दी जाती है.
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