प्रोटीन पर PEPSICO INDIA और EUROMONITOR की स्टडी

12 Oct 2026

Author: Suryakant

पेप्सिको इंडिया और यूरोमॉनिटर की स्टडी में एक दिलचस्प मगर विरोधाभासी बात सामने आई है. देश में प्रोटीन को लेकर जागरूकता तो बढ़ रही है लेकिन  खपत अभी भी एक चुनौती है.

भारत का प्रोटीन विरोधाभास

Image Credit: PEPSICO INDIA

शहरी भारत के 70% लोगों का प्रोटीन सेवन 41 ग्राम से कम है, जबकि 61% लोग रोज़ाना ज़रूरी फ़ाइबर की मात्रा से कम फ़ाइबर लेते हैं. 

प्रोटीन सेवन 

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ज़्यादा कीमत और सुविधाजनक विकल्पों की कमी, प्रोटीन और फ़ाइबर के सेवन में सबसे बड़ा बैरियर है. 

ज़्यादा कीमत

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मिलेट रिसर्च (IIMR) के साथ मिलकर की गई नई स्टडी में देखा गया है कि कंज्यूमर प्रोटीन, फाइबर और ओट्स के बारे में क्या सोचते हैं और बेहतर न्यूट्रिशन को ज़्यादा प्रैक्टिकल और आसानी से उपलब्ध कैसे बनाया जा सकता है. 

IIMR

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'द स्टेट ऑफ़ प्रोटीन एंड फ़ाइबर इन अर्बन इंडिया' नाम की इस स्टडी में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि में 18-50 साल की उम्र के 1,250 लोगों का सर्वे किया गया.

1,250 लोगों का सर्वे

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अलग-अलग पीढ़ियों के लगभग 10 में से 9 कंज्यूमर चाहते हैं कि अपनी डाइट में प्रोटीन शामिल करना आसान और ज़्यादा नैचुरल लगे, जबकि 89% लोग प्रोटीन को जाने-पहचाने, रोज़मर्रा के रूपों में चाहते हैं.

डाइट में प्रोटीन

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फाइबर के मामले में जानकारी का अंतर और भी ज़्यादा है. जहां 59% लोग दावा करते हैं कि उन्हें अपनी रोज़ाना की फाइबर की ज़रूरत के बारे में पता है, वहीं 89% लोगों को गलत जानकारी है. सिर्फ़ 11% लोग ही सही मात्रा बता पाते हैं. 

फाइबर

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स्टडी से पता चलता है कि 74% ग्राहकों का कहना है कि उन्हें अपनी रोज़ाना की प्रोटीन की ज़रूरतों के बारे में पता है, लेकिन 56% लोगों को गलत जानकारी है या तो उन्हें पता नहीं है. 

रोज़ाना की ज़रूरत 

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