Submit your post

Follow Us

ये तो कुछ नहीं है, मुलायम ने एक कविता पर इस इंसपेक्टर को मंच पर पटका था

5
शेयर्स

मुलायम सिंह यादव ने आज अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को उठा के पटक दिया है. पर मुलायम ने ये पहली बार नहीं किया है.

1960 में मैनपुरी के करहल के जैन इंटर कॉलेज में एक कवि सम्मेलन चल रहा था. उस समय के विख्यात कवि दामोदर स्वरूप ‘विद्रोही’ ने अपनी लिखी एक कविता सुनानी शुरू की. कविता थी दिल्ली की गद्दी सावधान. तभी एक पुलिस इंसपेक्टर ने उनसे माइक छीनकर कहा कि सरकार के खिलाफ कविताएं मत पढ़ो. बंद करो ये सब. उसी समय एक लड़का दर्शकों में से निकल कर आया. बड़ी फुर्ती से मंच पर चढ़ा. इंसपेक्टर को उठा कर मंच पर ही पटक दिया. ये लड़का मुलायम सिंह यादव था. बरसों बाद मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, तो दामोदर को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान से नवाजा.

मुलायम सिंह यादव को अपनी ताकतवर मेमोरी के लिए जाना जाता है. मेमोरी भी स्ट्रांग रही और देह भी. पहलवान थे. ये सब काम तो उनको आता ही था. राजनीति में भी वही दांव खेलते रहे. हमेशा पहलवानी वाले तरीके से राजनीति की. यहां तक कि जब मायावती के साथ मिलकर सरकार बनाये, तो झगड़े को बातचीत से नहीं सुलझा रहे थे. मायावती के विधायकों को अगवा करने का आरोप लगा. कुख्यात गेस्टहाउस कांड हुआ. जिसमें मायावती को गालियां दी गईं. जान से मारने की धमकी दी गई. उस दिन लग रहा था कि मायावती को मार ही दिया जाएगा.

अभी भी अखिलेश को डांटते वक्त यही कहते हैं कि इन बच्चों के दम पर मत उछलो. एक लाठी पड़ेगी तो उठ नहीं पाएंगे. मुलायम शायद 90 के दशक में ही जी रहे हैं. समझ नहीं पाते कि राजनीति अब बदल गई है.

पार्टी से निकाले गए अखिलेश की दोबारा CM बनने की राह खुल गई!

आज सपा कुख्यात है, पर नशे में एक बार अखिलेश ने भी दिखाई थी गुंडई

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

ग्राउंड रिपोर्ट

इस नेता ने राजा भैया का रिकॉर्ड ऐसा तोड़ा कि सब चौंक गए!

उस नेता का नाम बहुत कम लोग जानते हैं.

Live UP Election Result 2017: चौचक नतीजे, चौकस कमेंट्री वाला लल्लनटॉप टीवी देखें

दी लल्लनटॉप की टीम न सिर्फ अपडेट दे रही है, बल्कि नतीजों के पीछे की पूरी कहानी भी बतला रही है.

पिंडरा से ग्राउंड रिपोर्ट : 'मोदी पसंद हैं, वो विधायक तो बनेंगे नहीं, फिर क्यों जिता दें'

इस सीट पर वो नेता मैदान में है जो 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा.

ग्राउंड रिपोर्ट वाराणसी साउथ : बनारस के चुनाव में वो मुद्दा ही नहीं है, जिसे बड़ा मुद्दा बताया जा रहा है

इतने सारे रोड शो का असर सीधा पड़ेगा या उल्टा

रामनगर ग्राउंड रिपोर्ट: एक-एक बनारसी की पॉलिटिक्स मोदी-अखिलेश की पॉलिटिक्स से कहीं आगे है

पोलिंग से एक दिन पहले यहां का वोटर एकदम साइलेंट हो गया है.

ग्राउंड रिपोर्ट सोनभद्र: KBC में इस शहर पर बने एक सवाल की कीमत 50 लाख रुपए थी

यहां के लोग गर्व से कहते हैं, 'मुंबई वाले हमारी एक बोरी बालू में 6 बोरी पतला बालू और एक बोरी सीमेंट मिलाकर यूज करते हैं.'

ग्राउंड रिपोर्ट : ये बागी बलिया है, जहां सांड को नाथ कर बैल का काम लिया जाता है

यूपी के इस आखिरी छोर पर सियासत बहुत पीछे छूट जाती है.

पथरदेवा ग्राउंड रिपोर्ट: जब-जब ये नेता चुनाव जीतता है, यूपी में बीजेपी सरकार बनाती है

यहां बीजेपी के सूर्य प्रताप शाही के लिए एक वोटर रियासत अली कहते हैं, 'अबकी इनका वनवास खत्म कराना है'.

नौतनवा ग्राउंड रिपोर्ट: मां-पापा और भाई जेल में, तो बहन लंदन से आई चुनाव प्रचार के लिए

पेश है बाहुबलियों की सीट का हाल.

ग्राउंड रिपोर्ट पडरौना: जहां के लोगों को याद है कि पीएम ने ढाई साल पुराना वादा पूरा नहीं किया

यहां बीजेपी नेता के लिए नारा था, 'राम नगीना बड़ा कमीना, फिर भी वोट उसी को देना'.