Submit your post

Follow Us

'अखिलेश ने किया ही क्या, सिवाय साइकिल चलाने के'

एक पहेली है. कटोरे में कटोरा, बेटा बाप से भी गोरा. जाहिर है जवाब नारियल है. अब इस पहेली को जरा यूपी की करेंट पॉलिटिक्स की तरफ सरकाइए. बाप मुलायम हैं. न सिर्फ नाम से, बल्कि भाइयों पर बरसाए प्यार से भी. लेकिन यही मुलायम से मुलायम अब अपने लड़कन अखिलेश पर कठोर हुए जा रहे हैं. वजह वही हाल फिलहाल का सियासी लोचा-ए-उल्फत.

मुलायम सिंह यादव बोले,

‘अखिलेश मेरा बेटा है. लेकिन अगर मैं तैयार नहीं हुआ होता, तो अखिलेश 2012 में कभी मुख्यमंत्री न बन पाते. हर किसी को ये जान लेना चाहिए कि अगर आप एक हाई पोस्ट पर हैं तो आपको सबको साथ लेकर चलना होगा. आपको आलोचना सहनी होगी. 2012 चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने किया ही क्या है, सिवाय साइकिल चलाने के? 2012 में शिवपाल ने कही थी कि मुझे मुख्यमंत्री बनना चाहिए. और अखिलेश को 2014 लोकसभा चुनाव के बाद ही सत्ता दी जानी चाहिए.

अब मुझे लगता है कि शिवपाल ठीक ही कह रहा था. 2014 लोकसभा चुनावों में मिली हार इस बात का सबूत है. 2014 लोकसभा चुनावों में जब हम हारें तो सीएम कौन था. हमें सिर्फ 5 सीटें मिलीं. एक वक्त ऐसा था, जब मैं सीएम था और हमने 27 सीटें जीती थीं. एक बार 39 सीटें भी हमें मिली थीं.’

‘अरे नेताजी, 2014 में तो मोदी हवा चल रही थी न?’

पार्टी के असंतोषी वर्कर्स के बीच मुलायम सिंह जब ये बातें कर रहे थे. तब ऊपर एक लाइन का लिखा ये मासूम सवाल एक पार्टी वर्कर पूछ बैठा था. मुलायम दद्दा वर्कर से इतना ही बोले- चुपचाप नीचे बैठ जाओ.

मुलायम सिंह ने ये सारी बातें गुरुवार नाइट कहीं. पार्टी के जितने यूथ विंग और बुढौती विंग टाइप नेता थे, सबको समेटते हुए, बेटे को लपेटते हुए मुलायम सिंह ये सब बोले. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, मुलायम कहिन,

‘अखिलेश यादव की वजह से पार्टी नहीं, पार्टी की वजह से अखिलेश यादव हैं. मैंने और शिवपाल ने पार्टी को खून से सींचा हैं. शिवपाल ने पार्टी के लिए बहुत कुछ सहा है. मैं एक बार कितना बीमार था. गुड़गांव के अस्पताल में भर्ती था. देश के प्रधानमंत्री से लेकर सारे बड़े नेता मिलने आए. लेकिन मेरा अपना बेटा मुझसे पांच दिन बाद मिलने आया. पार्टी को खड़ा करने में अखिलेश यादव का नहीं, शिवपाल और रामगोपाल की मेहनत रही है.’


ये भी पढ़ें…

‘क्रीज पर अखिलेश यादव के साथ राजा भैया हैं, OUT करके तो दिखाओ’

अखिलेश यादव को देख शायरी भी कहती है, मैं बाहर आऊं?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

ग्राउंड रिपोर्ट

इस नेता ने राजा भैया का रिकॉर्ड ऐसा तोड़ा कि सब चौंक गए!

उस नेता का नाम बहुत कम लोग जानते हैं.

Live UP Election Result 2017: चौचक नतीजे, चौकस कमेंट्री वाला लल्लनटॉप टीवी देखें

दी लल्लनटॉप की टीम न सिर्फ अपडेट दे रही है, बल्कि नतीजों के पीछे की पूरी कहानी भी बतला रही है.

पिंडरा से ग्राउंड रिपोर्ट : 'मोदी पसंद हैं, वो विधायक तो बनेंगे नहीं, फिर क्यों जिता दें'

इस सीट पर वो नेता मैदान में है जो 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा.

ग्राउंड रिपोर्ट वाराणसी साउथ : बनारस के चुनाव में वो मुद्दा ही नहीं है, जिसे बड़ा मुद्दा बताया जा रहा है

इतने सारे रोड शो का असर सीधा पड़ेगा या उल्टा

रामनगर ग्राउंड रिपोर्ट: एक-एक बनारसी की पॉलिटिक्स मोदी-अखिलेश की पॉलिटिक्स से कहीं आगे है

पोलिंग से एक दिन पहले यहां का वोटर एकदम साइलेंट हो गया है.

ग्राउंड रिपोर्ट सोनभद्र: KBC में इस शहर पर बने एक सवाल की कीमत 50 लाख रुपए थी

यहां के लोग गर्व से कहते हैं, 'मुंबई वाले हमारी एक बोरी बालू में 6 बोरी पतला बालू और एक बोरी सीमेंट मिलाकर यूज करते हैं.'

ग्राउंड रिपोर्ट : ये बागी बलिया है, जहां सांड को नाथ कर बैल का काम लिया जाता है

यूपी के इस आखिरी छोर पर सियासत बहुत पीछे छूट जाती है.

पथरदेवा ग्राउंड रिपोर्ट: जब-जब ये नेता चुनाव जीतता है, यूपी में बीजेपी सरकार बनाती है

यहां बीजेपी के सूर्य प्रताप शाही के लिए एक वोटर रियासत अली कहते हैं, 'अबकी इनका वनवास खत्म कराना है'.

नौतनवा ग्राउंड रिपोर्ट: मां-पापा और भाई जेल में, तो बहन लंदन से आई चुनाव प्रचार के लिए

पेश है बाहुबलियों की सीट का हाल.

ग्राउंड रिपोर्ट पडरौना: जहां के लोगों को याद है कि पीएम ने ढाई साल पुराना वादा पूरा नहीं किया

यहां बीजेपी नेता के लिए नारा था, 'राम नगीना बड़ा कमीना, फिर भी वोट उसी को देना'.