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इस बार अमित शाह ने अमेठी की इमोशनल नस पकड़ ली है

‘जनता परेशान थी. राजा साहब ने अपने वजीर से कहकर जनता के लिए एक गाय भिजवा दी.

कुछ दिन बाद राजा ने वजीर से पूछा, “जनता कैसी है?”

वजीर ने जवाब दिया, “जनता तो दूध मलाई खा रही है जी.”

पर जो गाय दी थी, उसकी हालत तो आकर देखिए सर. कौन सा दूध और कहां की मलाई! गाय तो बीमार पड़ी है.’

अमेठी के गांधी चौक पर एक नौजवान ने ये किस्सा सुनाया. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तीन बार से यहां से सांसद हैं. उनसे पहले सोनिया गांधी सांसद रहीं. उनसे पहले ‘राजा’ संजय सिंह, सतीश शर्मा और चार बार राजीव गांधी सांसद रहे. लेकिन दिग्गजों ने इसे अपने क्षेत्र की तरह नहीं, रियासत की तरह रखा. परियोजनाएं तो आईं पर उनकी हालत खस्ता ही रही. इसलिए जबरदस्त बेरोजगारी आज भी पसरी है. ये वैसी हालत नहीं है कि मुंबई का कोई अदाकार ‘सो सैड’ कहकर निकल जाए. यह इससे कहीं बुरा है.

वीपी सिंह के ज़माने में संजय सिंह कांग्रेस छोड़ गए तो बीजेपी को जगह बनाने का मौका मिल गया. 2003 में वो कांग्रेस में लौट आए. लेकिन तब तक काफी पानी बह चुका था. यहां गांधी परिवार के लिए दीवानगी की मिसालें दी जाती हैं. लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जब सपा के गायत्री प्रजापति चुनाव जीत गए. इस बार भ्रष्टाचार के आरोप, मुख्यमंत्री की स्पष्ट नापसंदगी और चुनाव से ठीक पहले गैंगरेप की एफआईआर के धब्बों के साथ वो चुनाव मैदान में उतरे हैं.

फिर भी इस बार यहां चुनावी मुद्दों में विकास किनारे हो गया है. लोगों के दिमाग में राजपरिवार के निजी मसले हावी हैं और मामला ‘इमोशनल’ हो गया है. एक राजा हैं जो यहां के बड़े आदमी हैं. एक वज़ीर है, जिसकी कमीज़ पर दाग ही दाग हैं. दो रानियां हैं, जिनमें से एक को ‘राजा’ अपनी रानी नहीं मानते. क्या जनता दूसरी रानी को न्याय दिलाने निकल पड़ी है, अमेठी तहसील से लेकर मुसाफिरखाना तक हर नुक्कड़ का सबसे ज्वलंत प्रश्न अब यही है.

SP Jeep 2

अमेठी उन सीटों में से है, जहां गठबंधन के बावजूद सपा और कांग्रेस कैंडिडेट लड़ रहे हैं. कांग्रेस से संजय सिंह की दूसरी पत्नी ‘रानी’ अमिता सिंह और सपा से सिटिंग विधायक गायत्री प्रजापति, जिन्हें यहां सब ‘मंत्री जी’ कहते हैं. बीजेपी ने मास्टर स्ट्रोक खेला है. संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह को टिकट दे दिया है.

संजय सिंह के साथ अमिता सिंह
संजय सिंह के साथ अमिता सिंह

अमिता सिंह मुंबई के अंग्रेजीदां माहौल में पली बढ़ीं. उनकी शादी बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी से हुई. लेकिन चार साल बाद ही 1988 में लखनऊ में सैयद मोदी की हत्या हो गई. इसका आरोप अमिता और संजय सिंह पर लगा. कहा गया कि शादी के इतर हुए प्रेम संबंध के चलते ही सैयद मोदी की हत्या हुई. 1995 में संजय सिंह और अमिता सिंह ने शादी कर ली. संजय ने अपनी पहली पत्नी गरिमा सिंह को छोड़ दिया.

BJP

अमेठी सिटी में एक पान वाले को अपना परिचय देते हुए माहौल पूछा तो वो खड़े हो गए. मैंने कहा कि आप बैठे रहिए, खड़े होने की जरूरत नहीं. फिर उन्होंने हाथ से इशारा किया और पिच्च थू करके पान थूका. फिर आकर अपनी जगह पर बैठ गए और कहने लगे, “देखिए यहां इस बार मामला उलट गया है. जनता को लग रहा है कि संजय सिंह ने अपनी पत्नी के साथ ठीक नहीं किया. प्रेम व्रेम ठीक है, लेकिन पहली पत्नी को नहीं छोड़ना था. इसलिए गरिमा सिंह सब पर भारी पड़ रही हैं. अलगाव की सहानुभूति और मोदी की लहर, दोनों उनके पक्ष में काम कर रहे हैं.”

गरिमा सिंह.
गरिमा सिंह.

“और स्मृति ईरानी का कोई असर?”

“उनका कोई फैक्टर नहीं है. मैंने बताया ना आपको. बस गरिमा के लिए सहानुभूति और मोदी.”

दो और चौराहों पर बात करके लगा कि ये बात गलत नहीं थी. लेकिन संग्रामपुर में बीएड कर रहे कुछ नौजवानों ने बताया कि प्रजापति ने अमेठी में थोड़ा बहुत काम तो कराया है. चुनावों से पहले ही सही, सड़कें बनी हैं, हैंडपंप लगे हैं, गांवों में शौचालय भी बने हैं. लेकिन उनमें भ्रष्टाचार बहुत हुआ. फेसबुक लाइव में ही एक अंकलजी ने कहा, ‘पहले गड्ढा खुदवावा गवा. फिर दूसरी जगह से पइसा आई गवा तौ दूसरा गड्ढा खोदवाई के हुआं बम्बा (हैंडपंप) बनाय दिहिन. कइयों जगह तीसरा गड्ढा खुदवावा गवा. जहां से पइसा मिला, तहां बम्बा बना.’

बीएड वाले नौजवानों ने ही बताया कि गायत्री प्रजापति की छवि अब बहुत खराब हो गई है. भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों के अलावा उनके कार्यकाल में छोटे स्तर पर पांच-पांच सौ रुपये वाला करप्शन भी खूब हुआ है. और अभी तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ 3 साल पुराने मामले में गैंगरेप का केस दर्ज हो गया. उनके लोगों ने गुंडई भी खूब की है. पुलिस उनको ले जाती थी तो मंत्रीजी फोन करवा के छुड़वा देते थे. उनके प्रताड़ित लोगों को संजय सिंह ने शरण दी. हाल की एक सभा में संजय सिंह ने एक नारा दिया जो अपने भदेसपन की वजह से यहां लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है, “साइकिल गई इनारा में. गायत्री गए छि*रा में.” ‘इनारा’ एक अवधी शब्द है, जिसका मतलब होता है कुआं.

लेकिन साइकिल ‘इनारे’ में अभी नहीं गई है. प्रजापति अब भी कमजोर नजर नहीं आते. अपने दाग धोने के लिए वो पूरी जान झोंके हुए हैं और पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं. कई लोगों ने कहा कि अपने साथ वालों को उन्होंने एक-एक सेट कपड़ा और दो-दो सौ रुपये हर रोज के दिए हैं. शहर से गुजरता हुआ उनका काफिला दिखा. कार की खिड़की से हाथ जोड़े हुए बाहर झांक रहे थे. एक सपा समर्थक ने कहा कि शहर में आपको लोग बीजेपी-कांग्रेस की बात करते ज्यादा मिलेंगे. लेकिन गांवों में ‘मंत्री जी’ की अच्छी पकड़ है.

Gayatri Prasad Prajapati 2 (1)

एक स्थानीय पत्रकार ने अंडरलाइन करने वाली बात कही:

” राजा साहब प्रजापति से निपटने की तैयारी किए थे, लेकिन गरिमा सिंह उन पर आफत की तरह फट पड़ीं. गरिमा का कोई जवाब उनके पास नहीं है. अब बात ये है कि कौन किसके वोट काटेगा. प्रजापति अमिता के या अमिता प्रजापति के. पिछली बार अमिता को हराकर प्रजापति जीते थे. इस बार वो दोनों गरिमा से भिड़ रहे हैं और इस लड़ाई का फायदा बीजेपी को मिल रहा है.”

SP Supporter

20 तारीख को ही अमेठी के रामलीला मैदान में अखिलेश की रैली थी. बताया जाता है उसमें प्रजापति को पहले ही कह दिया गया था कि मुख्यमंत्री उनके साथ मंच साझा नहीं करेंगे. अखिलेश के आने के पहले ही प्रजापति भाषण देकर नीचे उतर गए और आम जनता के बीच कुर्सी पर बैठ गए. अखिलेश आए. वो अमिता के लिए वोट नहीं मांग सकते थे, इसलिए साइकिल पर बटन दबाने की अपील करके चले गए. प्रजापति का नाम एक बार भी नहीं लिया. इस दौरान सामने बैठे प्रजापति की आंखों में आंसू थे.

अमेठी की सीट पर सपा की हालत को इस चेतावनी से समझ सकते हैं.
अमेठी की सीट पर सपा की हालत को इस चेतावनी से समझ सकते हैं.

अखिलेश और प्रजापति के कार्यकाल में अमेठी में जो थोड़ा-बहुत काम हुआ है, उसके असर को ‘राजा’ के पारिवारिक मामले ने शून्य कर दिया है. संग्रामपुर में ही एक सज्जन ने कहा, “विकास तो प्रकृति का नियम ही है. सरकार विकास नहीं कराएगी तो कौन कराएगा. बात ये है कि अमेठी में विकास की गति क्या है. अखिलेश ने जिस हिसाब से काम कराया है, कोई उससे तेज काम कराए तो?”

Amethi Hospital 2

वैसे पास में ही परसौली ग्रामसभा है, जहां लोग सड़क न होने से चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं. नेता उन्हें मनाने में लगे हैं. यहां के सरकारी अस्पताल की हालत खराब है. पीछे कर्मचारियों के सरकारी क्वार्टर गिरने को आतुर हैं. गिराने के आदेश दे दिए गए हैं लेकिन काम आचार संहिता की वजह से शुरू नहीं हो सका है. मरहम पट्टी कक्ष को एक मरहम पट्टी की जरूरत है. दवाघर को दवाओं और दवा बांटने वाले की जरूरत है. अमेठी में केंद्रीय विद्यालय की मांग भी पुरानी है.

Gira hua Hospital Quarter 2
कर्मचारियों के लिए बने क्वार्टर ढह रहे हैं.

दवाएं कैसे मिलती हैं इस फोटो में साफ लिखा दिख रहा है.

Medicine Counter inside Hospital

अब ये फोटो देखिये, ये खाली अलमारी जो दिख रही है, वो दवाओं के लिए है, लेकिन इस अलमारी को देखके लगता है कि क्या मरीजों को पांच दिन की भी दवा मिलती होगी?

खाली पड़ी अलमारी दवाओं की है.
खाली पड़ी अलमारी दवाओं की है.

रामलीला मैदान के पास पान बंधवाने आए एक अधेड़ ने कहा, ‘लाइन के दक्खिन ओरी संजय सिंह का असर बहुत कम हो गया है. गरिमा सिंह अपने प्रचार में रो रही हैं और उनके साथ महिलाएं भी रो रही हैं. सहानुभूति की लहर गरिमा के लिए है, बस उसे एक धक्के की जरूरत है.’

बस स्टैंड पर दुकान लगाने वाले मंगल राम ने बताया कि वो गांव के रहने वाले हैं पर अमेठी में रहते हुए 35 साल हो गए. बोले कि वो बसपा कैंडिडेट रामजी मौर्या को वोट देने का मन बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि नोटबंदी अच्छा फैसला था, लेकिन बैंक वालों ने सब गुड़ गोबर कर दिया. सबसे ज्यादा परेशानी छोटे लोगों को हुई. यहां अमेठी में गरीब आदमी की एफआईआर दर्ज नहीं होती है. मायावती का राज ठीक था, लेकिन फिर वो हाथी बनवाने में लग गईं. बसपा को यहां मुख्य मुकाबले में नहीं देखा जा रहा. लेकिन अमेठी को जिला माया सरकार में ही बनाया गया था. इसका कुछ फायदा उसे मिला है.

अमेठी की लाइव कवरेजः

ददन सदन में कांग्रेस के चुनावी दफ्तर गया. वहां 23 तारीख को होने वाली राहुल-प्रियंका की सभा की तैयारी चल रही थी. उन लड़कों से बात हुई, जिन्हें खूब सारे नाम और नंबर की लिस्ट दी गई थी. थोड़ी सी कैजुअल बातचीत में ही लड़के खुलकर आ गए. कहने लगे कि हम यहां लगे जरूर हैं, पर इस बार अमेठी में बीजेपी का जोर है. एक लड़के ने कहा, “अमिता सिंह का चुनाव सेक्युलर बेस पर है. प्रजापति का चुनाव पैसे का है और गरिमा का चुनाव उनके ‘सम्मान और सहानुभूति’ का है जो उन्हें राजा साहेब से नहीं मिला.”

एक पत्रकार ने कहा, “इस बार तो भैया ऐसा भी है कि मर्द अमिता को वोट दे रहे हैं और उनकी औरतें गरिमा को. ये असली रानी और नकली रानी की लड़ाई है. जनता रानी चुनने निकल पड़ी है. जो जीतेगी वही असली रानी होगी.”

जब जनता पारिवारिक न्याय दिलाने निकल पड़े तो अप्रत्याशित नतीजों की गुंजाइश बनती है. अमेठी की सीट इस बार मुलायम सिंह, राहुल गांधी और ‘राजा’ संजय सिंह, तीनों की नाक का सवाल बन गई है. असली रानी की भावुक खोज में नकली मुद्दे चुनाव पूर्व की हवा में तैरने लगे हैं. बड़ी रैली अभी बाकी है.


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