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एक रामपुर में आज़म ख़ान जीत गए, बाकी तीन पर क्या हुआ?

यूपी के बारे में एक बात तो हर कोई कह सकता है कि यूपी बहुत बड़ा है. इतना बड़ा कि इसकी आबादी में दुनिया के कई मुल्क समा जाएं. इतने बड़े राज्य में साइज़ के चलते कई दिक्कतें भी आती हैं. 403 विधान सभा सीटों में से यूपी में कुछ एक ही नाम वाली सीटे भी हैं. और तो और रामपुर की ही बात करें तो कुल जमा 4 रामपुर हैं. इनमें से कुछ एक ज़्यादा चर्चित हैं तो कुछ कम. आइए आपको बताते हैं यूपी के इन चार रामपुर के हाल.

रामपुर

रामपुरी चाकू वाला रामपुर, शानदार रज़ा लाइब्रेरी वाला रामपुर. मगर सियासी रिसालों में ये आज़म खान वाला रामपुर है. वो आज़म खान जिनकी खोई हुई भैंसों और तीखे बयानों के चर्चे अक्सर चर्चा में रहते हैं. 2017 के चुनावों में आज़म भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को लगभग 46,800 वोटों से हराकर विधानसभा पहुंचे हैं.

रामपुर खास

ये सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी की सीट है. 1980 से जीतते आ रहे तिवारी जब राज्य सभा चले गए तो सीट अपनी बेटी आराधना मिश्रा मोना को दे गए. प्रतापगढ़ की इस सीट पर मोना मिश्रा ने इस बार भी जीत दर्ज की. मगर इस बार उनकी जीत का अंतर उतना बड़ा नहीं रहा.

रामपुर कारखाना

रामपुर कारखाना निर्दलीय गिरीजेश शाही, सपा की गज़ाला लारी और भाजपा के कमलेश शुक्ला के त्रिकोणीय मुकाबले के कारण चर्चा में था. गिरिजेश शाही 10 सालों से फ्री एंबुलेंस सर्विस चला रहे हैं. वो गरीबों की शादी में मुफ्त में पनीर देते हैं. मगर रामपुर कारखाने की जनता ने तीसरे नंबर पर रखा. यहां से भाजपा के कमलेश शुक्ला जीते और गज़ाला लारी दूसरे नंबर पर रहीं.

रामपुर मनिहारान

इस रामपुर में काफी कड़े मुकाबले की उम्मीद थी. भाजपा ने साफ-सुथरी छवि वाले देवेंद्र निम को उतारा था. बसपा के प्रत्याशी रविंद्र कुमार मोल्हु ने उनको आखिरी राउंड तक टक्कर दी. अंत में भाजपा के निम 595 वोट से जीते.


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