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परिवारवादी पार्टियों के खिलाफ भाजपा का कड़ा एक्शन, उनके 3 बच्चे अपने यहां खींचे

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उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी में सब लग चुके हैं. साजो सामान तैयार है. प्यादों से लेकर राजाओं तक सब कदम दर कदम आगे बढ़ रहे हैं. अखिलेश यादव ने समाजवादी विकास रथ यात्रा शुरू कर दी है. भाजपा भी 5 नवंबर से परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली है. सारी पार्टियां जवानों की मौत पर ‘राजनीति नहीं होनी चाहिए’ वाली राजनीति कर रही हैं. भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर मध्य प्रदेश एनकाउंटर को भुनाने की तैयारी में है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कैंपेनिंग तेज कर दी है. हाल में सपा और बसपा के गढ़ रहे उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ बनाना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा. उत्तराखंड भी अगले साल विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है. दोनों राज्यों में भाजपा गठबंधन यहां जनाधार रखने वाले राजनैतिक परिवार के तीन नये चेहरों को लांच करने वाली है. जिस परिवारवाद के लिए बाकी पार्टियों को कोसा जाता है. तो उत्तराखंड और यूपी में एनडीए के ये तीन नए चेहरे हैं-

1. मयंक जोशी 

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उत्तर प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी इसी महीने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गई हैं. अब भाजपा रीता बहुगुणा के बेटे मयंक जोशी को पहली बार उत्तरी इलाहाबाद सीट से उतारने की तैयारी में है. मयंक जोशी भी अपनी मां के साथ ही भाजपा में शामिल हुए थे. मयंक 33 साल के हैं. बिजनेसमैन हैं. रीता बहुगुणा के विधानसभा क्षेत्र का कामकाज मयंक ही देखते रहे हैं. अब वो भी सियासत में हाथ आजमाना चाह रहे हैं. कहा जा रहा है बेटे के सियासी भविष्य के लिए ही मयंक के साथ रीता ने भाजपा का दामन थामा है. लेकिन कयास ये भी है कि रीता खुद उत्तरी इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ना चाह रही हैं. मयंक को वो लखनऊ कैंट से चुनाव में उतरवाना चाह रही हैं. वैसे उत्तरी इलाहाबाद में कांग्रेस के अनुग्रह नारायण सिंह 2007 से विधायक हैं.

मयंक जोशी का राजनैतिक बैकग्राउंड काफी मजबूत है. रीता बहुगुणा 1991 से सक्रिय राजनीति में हैं. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं. इलाहाबाद में नगर निगम की महापौर रहीं. 2012 में विधायक चुनी गयीं. मयंक जोशी के मामा विजय बहुगुणा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं. रीता की मां कमला बहुगुणा भी सांसद थीं. बेटे के साथ भाजपा में शामिल होते समय रीता बोली थीं-

”2012 के बाद यूपी में कांग्रेस पार्टी की इतनी निष्क्रियता रही. हम लोगों ने चार साल के दौरान जनता तक जाने का प्रयास नहीं किया. हमने जनता के मुद्दों को लेकर कोई संघर्ष नहीं किया और चुनाव के छह महीने पहले हमने बस यात्राएं निकालनी शुरू कर दीं हैं. हम खाट पंचायतें कर रहे हैं. जनता को लग रहा है कि जब चार साल तक कुछ नहीं किया तो अब क्या करेंगे? लोगों को कांग्रेस के नेतृत्व पर यक़ीन नहीं हो रहा है. कांग्रेस पार्टी 20-30 सीटों के ऊपर बढ़ नहीं पाती है. इस समय भारतीय जनता पार्टी में और ख़ास तौर पर मोदी जी में जनता को विश्वास है. वो सोचते हैं केंद्र में इनकी सरकार है और इस समय इनका मुद्दा भी विकास है.”

एक समय भाजपा की धुर विरोधी रहीं रीता बहुगुणा के बेटे मयंक को इस पार्टी से क्या मिलता है, इसके लिए चुनावों तक रुकना होगा.

2. सौरभ बहुगुणा

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सौरभ बहुगुणा भी हेमवती नंदन बहुगुणा के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. रीता बहुगुणा के भाई और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे हैं. उम्र 32 साल बताते हैं. सौरभ बहुगुणा भी भाजपा की गाड़ी में सवार हुए हैं. उत्तराखंड के सितारगंज से चुनाव लड़ सकते हैं. सौरभ की मुस्लिमों के बीच अच्छी पकड़ है. लेकिन विवादित भी रहे हैं. इससे पहले 2012 में इनके खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था. इन पर मारपीट, अभद्रता और धमकी देने का आरोप है. 394, 504, 506, 3(1)/10 एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा हुआ था. ये आरोप बीजेपी के विधायक प्रेम सिंह राणा ने लगाया था. मार्च 2016 में कांग्रेस ने सौरभ बहुगुणा और साकेत बहुगुणा को पार्टी से बाहर निकाल दिया था. उत्तराखंड के सितारगंज में विजय बहुगुणा के बंगाली वोट काफी हैं जिसका फायदा सौरभ बहुगुणा को मिलने की उम्मीद है.

3. अमन पटेल

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अमन पटेल अपना दल वाली अनुप्रिया पटेल की बहन हैं. 27 साल की हैं. एमबीए हैं. बंगलौर में नौकरी करती हैं. भाजपा इन्हें अनुप्रिया की छोड़ी हुई वाराणसी की रोहनिया सीट से चुनाव लड़वा सकती है. कानपुर से आती हैं. उत्तर प्रदेश में कुर्मी राजनीति के अगुआ रहे सोने लाल पटेल की बेटी हैं. सोने लाल पटेल ने 1995 में अपना दल बनाया था. सोने लाल पटेल 2009 में एक दुर्घटना में मारे गए थे. सोनेलाल पटेल और उनकी पत्नी कृष्णा की चार बेटियां हैं. सबसे बड़ी पारुल जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. दूसरी बेटी पल्लवी रिसर्च साइंटिस्ट हैं जो अनुप्रिया से एक साल बड़ी हैं. अनुप्रिया तीसरी बेटी हैं. सबसे छोटी हैं अमन पटेल.

सन 2010 में अनुप्रिया पटेल रोहनिया विधान सभा से चुनाव लड़ीं और रिकॉर्ड वोटों से जीतीं. इसके बाद 2014 में मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव लड़ीं और फिर से रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की. लोकसभा चुनाव में अपना दल ने उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटें जीती थीं. इसके बाद दो सीटें लेकर वो एनडीए में शामिल हो गई.

कुर्मी वोट साधने के लिए भाजपा ने अनुप्रिया पटेल को स्वास्थ्य राज्य मंत्री बनाया है. अब अमन पटेल को आगे करना भी उसकी इसी रणनीति का हिस्सा है.

कांग्रेस, सपा की परिवारवाद की राजनीति का विरोध करने वाली भाजपा खुद राजनैतिक परिवारों के चेहरों के सहारे आगे बढ़ रही है. देखते हैं कहां तक जाते हैं.


 

ये स्टोरी निशांत ने की है.


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