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तो क्या अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने का जिम्मा डिंपल यादव को मिला है

यूपी इलेक्शन में अखिलेश यादव से लेकर राज बब्बर और नरेंद्र मोदी तक सब हड़कंप मचाए हुए हैं. रोज एक नया स्टार जन्म ले रहा है. उधर कैलाश विजयवर्गीय रोज ट्वीट कर के कुछ उत्पात कर रहे हैं. कांग्रेस वाले प्रियंका गांधी के आने का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें यकीन है कि इनके आते ही कांग्रेस पूरी दुनिया में राज करने लगेगी. वहीं भाजपा वाले किसी अवतारी पुरुष को मुख्यमंत्री के रूप में लाने का ख्वाब दिखा रहे हैं. बहन जी को आने दो का प्रपंच चल रहा है. पर ये नहीं पता चल रहा कि उनको किसने रोका है.

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सपा की वेबसाइट से

पर इन सबके बीच एक नाम उभर रहा है, जो अपनी सौम्य छवि से सब पर भारी पड़ रहा है. कुछ-कुछ अमिताभ बच्चन के अंदाज में. सधी शुरुआत. पहले हार मिली. आलोचना हुई. पर अब सबको लग रहा है कि भविष्य का ये बड़ा नाम है. डिंपल यादव. अखिलेश यादव से अलग अपनी पहचान बन रही है इनकी.

मथुरा में बसपा का प्रचार करतीं जीनत अमान ने कहा,’ लैला ओ लैला, ऐसी मैं लैला. लोगों से मिलती यूं मैं अकेला’. गाना गलत गा दिया. फिर कहा,’ यहां मैं अकेले मिलने नहीं, मनोज के समर्थन में वोट मांगने आई हूं’.

बदायूं में मायावती ने कहा,’ यूपी में आतंक का माहौल है. बेटियों को मारकर पेड़ पर लटकाया जा रहा है. मुलायम ने पुत्र मोह में शिवपाल को अपमानित करने का काम किया है’.

गाजियाबाद में राहुल गांधी ने कहा,’ मैं वो दिन देखना चाहता हूं, जब ओबामा साहब बेडशीट खरीदें और उस पर लिखा हो- मेड इन उत्तर प्रदेश’. ये सुनकर मुझे बचपन का एक किस्सा याद आ गया. इंजीनियरिंग की तैयारी के दौरान मेरे एक मित्र ने कहा कि मैं IIT में टॉप कर सचिन तेंदुलकर को अपने पैरों पर झुकाना चाहता हूं. उसकी बात मुझे आज तक समझ नहीं आई. पर राहुल की बात सुनकर ये लगा कि मेरा मित्र भी ऐसी ही बात करता होगा.

गाजियाबाद में ही नरेंद्र मोदी ने कहा,’ यूपी में सूरज ढलने के बाद कोई बहन-बेटी अकेली रास्ते पर निकल सकती है क्या. यहां हर दिन रेप-मर्डर होते हैं’.

पर आगरा के रामलीला मैदान में नारे लग रहे थे,’ विकास की चाभी, डिंपल भाभी’. ‘भैया का विकास है, भाभीजी का साथ है’. डिंपल मुस्करा रही थीं. बार-बार उठकर हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करतीं. लोग खुश हो जाते. डिंपल ने जो आखिरी तीन रैलियां की हैं, उनमें औरतें ही सपा की कैंडिडेट हैं. पर डिंपल को लेकर लोग अति उत्साहित हैं. हालांकि यूपी में परिवार को लेकर जो फैसिनेशन है, वो भी एक वजह है. डिंपल की परिवार की सुयोग्य बहू वाली इमेज भी लोगों को इमोशनल करने के लिए काफी है. इस फोटो में छिपी पैट्रिआर्की को लेकर भी खूब आलोचना हुई थी.

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सोशल मीडिया से

हालांकि डिंपल नेताओं, मीडिया और अफसरों से दूर ही रहती हैं, पर कहा जा रहा है कि वो पिछले कई सालों से राजनीति को चुपचाप समझ रही हैं. अभी अखिलेश यादव का जो वीडियो आया था, उसमें उनके साथ डिंपल और इन लोगों के बच्चे थे. मुलायम और बाकी नेता नहीं थे. कुछ-कुछ बराक ओबामा और मिशेल ओबामा की तर्ज पर बना था ये वीडियो. मिशेल की ही तरह डिंपल की भी इमेज बनाई जा रही है. पर ‘भारतीय संस्कारों’ के साथ.

डिंपल का जन्म 1978 में हुआ था. पुणे में. पापा एस सी रावत आर्मी में कर्नल थे. वो उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर के रहने वाले हैं. अभी वो वहीं पर रहते हैं. डिंपल की दो बहनें भी हैं. डिंपल एक डायनेमिक लड़की हैं. कहा जाता है कि घुड़सवारी भी करती हैं. मतलब बिल्कुल स्पोर्टी हैं. साड़ी पहनकर जैसी शांत दिखती हैं, वैसी नहीं हैं.

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सपा की वेबसाइट से

पुणे से इंटर करने के बाद डिंपल ने लखनऊ में ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान एक पार्टी में अखिलेश यादव से उनकी भेंट हुई. उस वक्त अखिलेश 21 साल के थे और डिंपल 17 की. संजय लाठर ने लिखा है कि अखिलेश उनको देखते ही रह गए थे. फिर मिल लिए. पर बताया नहीं था कि मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं. बाद में बताया पर बात को फैलने नहीं दिया. अखिलेश फिर ऑस्ट्रेलिया चले गए पढ़ने. वहीं से दोनों में बातें होतीं फोन पर. अखिलेश वहां से गुलाबी रंग के ग्रीटिंग कार्ड खूब भेजते.

फिर अखिलेश इंडिया वापस आए. मुलायम ने पहला सवाल यही पूछा,’ शादी कब करोगे?’ कहा जाता है कि लालू प्रसाद यादव की लड़की से शादी के लिए बात चल चुकी थी. अखिलेश चक्कर में पड़ गए. उन्होंने अपनी दादी का सहारा लिया. दादी उस वक्त बीमार थीं. दादी को पोते का प्यार समझ में आ गया. वो अड़ गईं दोनों की शादी के लिए. मुलायम के लिए ये समस्या थी. क्योंकि एक तो जातिवादी राजनीति हो रही थी. डिंपल राजपूत हैं. दूसरे, उत्तराखंड राज्य की अलग मांग हो रही थी. तो वहीं की लड़की से शादी करना मुश्किल काम था. फिर लालू को ना कहना भी मुश्किल था. पर फिर वही हुआ जो अखिलेश का मन था. कहा तो ये भी जाता है कि अमर सिंह ने इस शादी के लिए मुलायम को मना लिया था.

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शादी की तस्वीरें (फेसबुक से)

बड़े ही स्टाइल में मुलायम ने कर्नल को फोन किया और सपरिवार लखनऊ बुला लिया. मीडिया को खबर लग गई थी. लोगों ने सवाल पूछा तो मुलायम ने बड़े ही सधे अंदाज में कहा,’ हां, लड़का बड़ा हो गया है. शादी तो होगी ही. करेंगे तो बतायेंगे’. फिर किसी को बिना खबर किए शादी तय हो गई. जब शादी हुई तो स्टारों से लेकर नेताओं का जमावड़ा हुआ था. अमिताभ बच्चन स्टेज संभाल रहे थे. अटल-आडवाणी जैसे लोग मेहमानों में थे.

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डिंपल और उनके बच्चे (फेसबुक से)

PTI के मुताबिक एक इंटरव्यू में डिंपल ने कहा था कि 24 नवंबर 1999 को अखिलेश के साथ उनकी शादी हुई. दिसंबर में क्रिसमस के मौके पर दोनों लोग लंदन या सिडनी जाने की तैयारी कर रहे थे. देहरादून में शॉपिंग कर रहे थे. पर उसी वक्त मुलायम सिंह का फोन आया कि कहां हो. घर लौट आओ. कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ना है. अखिलेश का मन नहीं था राजनीति में आने का. पर डिंपल ने ही समझाया कि जो कहा जा रहा है, करो. अखिलेश सांसद बन गए. फिर नेतागिरी बढ़ती गई. दोनों लोग हनीमून पर कभी जा नहीं सके.

2009 में फिरोजाबाद में सांसदी के लिए उपचुनाव हुए. डिंपल यादव को वहां से खड़ा किया गया. सामने थे राज बब्बर जो सपा छोड़कर कांग्रेस में आए थे. अखिलेश कन्नौज और फिरोजाबाद दोनों जगहों से खड़े हुए थे और जीत गए थे. पर फिरोजाबाद वाली सीट खाली कर दी थी. इसलिए चुनाव हो रहे थे. डिंपल को हार का सामना करना पड़ा. कहते हैं कि इसके बाद डिंपल खूब रोई थीं.

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सपा की वेबसाइट से

उस वक्त अमर सिंह ने अपनी तरफ से खूब इंतजाम किया था. जया बच्चन, जया प्रदा और संजय दत्त को लाये थे प्रचार के लिए. पर राज बब्बर अपने कैंपेन में सलमान खान और गोविंदा को लेकर आ गए थे. तो स्टार के मामले में भाई के सामने कौन टिकेगा. इसके अलावा लोग अखिलेश से नाराज थे. क्योंकि उन्होंने कुछ किया नहीं था जनता के लिए. फिर राहुल गांधी भी राज बब्बर के कैंपेन में आ गए थे. उस वक्त राहुल वोट बटोर लेते थे. केंद्र में कांग्रेस की सरकार भी थी. फिर सपा ने राज बब्बर के खिलाफ खूब विष-वमन किया था. पर राज ने डिंपल के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला था. ये सारे तर्क काम कर गए थे.

पर फिर डिंपल का भी दौर आया. 2012 में अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बन गए. तो कन्नौज वाली सीट भी खाली कर दी. यहां से उपचुनाव में डिंपल के खिलाफ कोई भी खड़ा नहीं हुआ. देश में 44वीं और यूपी में 4थी बार ऐसा मौका था जब को निर्विरोध चुना गया था. कांग्रेस और भाजपा ने अपना कैंडिडेट ही नहीं खड़ा किया था. भाजपा ने सफाई देते हुआ कहा था कि उनके कैंडिडेट की ट्रेन छूट गई थी, इसलिए वो नॉमिनेशन नहीं भर पाए. मुलायम सिंह यादव ने तिकड़म लगाकर बहू को निर्विरोध जिता दिया था.

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सपा की वेबसाइट से

Quint के मुताबिक 2012 में डिंपल यादव ने ही अखिलेश को पार्टी और परिवार में हो रहे षड़यंत्र के बारे में बताया था. पहले तो अखिलेश ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. पर बाद में डिंपल के कहने पर उनको चीजें नजर आने लगीं. उसके बाद राजनीति में वो अखिलेश की सलाहकार बनती गईं. इसके साथ ही डिंपल पारिवारिक साजिशों से निपटती रहीं. साथ ही सोशल मीडिया पर अखिलेश की इमेज बनाती गईं. कहा जाता है कि अखिलेश का फेसबुक और ट्विटर अकाउंट डिंपल ही संभालती हैं. हर पोस्ट पर नजर रखती हैं ताकि कोई चूक ना हो.

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फेसबुक से

एक इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने कहा था कि डिंपल ही वो इंसान हैं, जिनसे उन्हें मुश्किलों से लड़ने की ताकत मिलती है.

अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में डिंपल 5 मिनट के भाषण देने में भी फंस जाती थीं. दिसंबर 2016 में लोकसभा में उनकी स्पीच को सोशल मीडिया पर बहुत वायरल किया गया था. क्योंकि ये गलतियों से भरी थी. पर 2017 में डिंपल का अंदाज बदल गया है. छोटे भाषण ही देती हैं, पर सधे हुए. धीरे-धीरे सीख तो रही हैं. फायदा ये है कि इनके सपोर्टर किसी बात का बुरा नहीं मानते. वो तो बस मुस्कान पर फिदा हो जाते हैं. उसके बाद कोई ढंग की बात आ जाती है तो फिर पीछे हटने का सवाल ही कहां उठता है. भाभी सा की बात है.

दिसंबर 2016 में लखनऊ में मेट्रो का उद्घाटन हुआ. उस दिन 2 महिला ड्राइवरों को भी बुलाया गया था. डिंपल यादव ने दोनों को मेट्रो की चाभी सौंपी. डिंपल ने सोशल मीडिया से एक बच्चे की तस्वीर उठाई थी. वो नोएडा मेट्रो स्टेशन पर वजन तौलने की मशीन लेकर बैठा था और पढ़ाई भी कर रहा था. डिंपल की पोस्ट के बाद अखिलेश ने उस लड़के की मदद करवाई. इन चीजों ने इमेज बिल्डिंग में बहुत काम दिया. बाद में अखिलेश ने ऐसी कई चीजें कीं.

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मेट्रो ट्रेन का उद्घाटन (फेसबुक से)

शिवपाल यादव से भले ही अखिलेश का बिगाड़ हो गया हो, पर शिवपाल के बेटे आदित्य की शादी में डिंपल खूब जम के नाची थीं. समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए ये बड़ा ही कंन्फ्यूजन का मौका था. सपा तो औरतों के खिलाफ बोलने के लिए बदनाम रही है.

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आदित्य की शादी (सोशल मीडिया से)

इन सब कहानियों से अलग एक कहानी है. 2010 में महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस की केंद्र सरकार एक बिल पास करना चाहती थी. तो मुलायम ने कुछ यूं प्रतिवाद किया था-

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