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अखिलेश के रोने के पीछे इस विधायक की शायरी का बहुत बड़ा हाथ है!


लेटर, शायरी और फिर लेटर. पैर छूना और फिर मौके बनाना. अखिलेश को राजनीति में ये सब देखना पड़ा है. इसी चक्कर में रोये भी हैं. कभी लगता है कि बदला लेने के लिए किसी को पिटवाये भी हैं. पर मन नहीं मानता. मुख्यमंत्री हैं. स्कूली बच्चों जैसी हरकत तो करेंगे नहीं.


 

सपा की कबड्डी के दौरान बाप, बेटे और चाचा की बातें तो खूब हुईं. पर इस बीच में कई और नाम भी उछलते रहे. कोई तो इतना उछल गया कि उनको पार्टी से बाहर कर दिया गया. इसमें सबसे ताजा नाम मंत्री पवन पांडे का है. इनको एमएलसी आशु मलिक को पीटने का आरोप है. ये आशु मलिक वही हैं जिनका नाम लिया था अखिलेश ने और तभी शिवपाल ने उनसे माइक छीन लिया था. फिर एक नाम था उदयवीर सिंह. जिन्होंने बाकायदा लेटर लिखकर अपनी नाराजगी जताई. मुलायम की दूसरी बीवी को भी दोषी ठहरा दिया. इस बात पर मुलायम भी दुखी हो गये थे. इन सबके अलावा एक और नाम था. गायत्री प्रजापति. जिनको फुटबॉल बना दिया गया था. समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है. अखिलेश ने निकाल दिया. मुलायम वापस ले के आये. गायत्री ने बाप-बेटे दोनों के पैर छुए. फिर सिर पर तलवार मंडराने लगी.

कौन हैं ये लोग और कैसे ये सपा के ड्रामे में अपना योगदान कर रहे हैं:

1. पवन पांडे

फैजाबाद जिले के अयोध्या के हैं पवन. 35 साल के हैं. सरस्वती शिशु मंदिर से शुरुआती पढ़ाई हुई है. फिर लखनऊ यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. इसी दौरान पवन राजनीति से भी जुड़ गये. 1998 में समाजवादी पार्टी से जुड़ गये. 2004 में लखनऊ यूनिवर्सिटी छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी रहे. उसके बाद सपा के स्टूडेंट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बन गये. बाद में जब अखिलेश यादव ने अपनी टीम बनानी शुरू की तो छात्र नेताओं को मौका दिया. इसमें पवन भी थे. 2012 विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने बड़े-बड़े लोगों को छोड़कर पवन को टिकट दे दिया. अयोध्या से.

pawan pamndey
पवन पांडे

1992 में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद से इस सीट पर भाजपा के लल्लू सिंह ही जीत रहे थे. पर पवन ने 2012 में उनको हरा दिया. आज-कल के फैशन के मुताबिक पवन को भी फैजाबाद जिले में विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है. 2013 में पवन को राज्य मनोरंजन मंत्री बनाया गया. पर 2014 लोकसभा चुनाव में सपा के खराब प्रदर्शन के बाद पवन ने मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया. पर बाद में पवन फिर मंत्री बन गये. पर अभी यादव खानदान में चल रही कबड्डी के बाद पवन को पार्टी से 6 साल के लिए बर्खास्त कर दिया गया. वजह बड़ी अजीब थी. आरोप था एमएलसी आशु मलिक को पीटने का. आशु के मुताबिक अखिलेश ने आशु का नाम लिया था एक अखबार के आर्टिकल के बारे में. जिसमें लिखा था कि अखिलेश औरंगजेब और मुलायम शाहजहां हैं. तो इसी बात की सफाई देने आशु अखिलेश के घर गये थे. वहां अचानक से पवन और उनके समर्थक बाहर आ गये. और आशु को पीटने लगे. बाद में अखिलेश बाहर आये और उनको बचाया. आशु के मुताबिक अगर अखिलेश ना आते तो ये लोग उनको जान से मार दिए होते.

2. आशु मलिक

उदयवीर सिंह की चिट्ठी के बाद आशु मलिक की चिट्ठी आई. कहा कि:

1उदय की चिट्ठी के बाद मैं सो नहीं पाया हूं. मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि अपनी जिंदगी में ये दिन देखने को मिलेगा. कुछ लोग इतना होश खो देंगे कि देश के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार को कुछ भी कह देंगे. लोगों को पता ही नहीं कि माननीय नेताजी और माननीय मुख्यमंत्री जी एक-दूसरे को कितना प्यार करते हैं. नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

हम समंदर हैं हमें खामोश रहने दो, जरा मचल गये तो शहर ले डूबेंगे.

पार्टी के लोगों से अपील है कि सपा विरोधियों के बहकावे में ना आएं. जिस पेड़ की छांव में बैठे हैं, हमें उसकी कदर करनी है. उस पेड़ का नाम नेताजी है.

जुल्मी जब-जब जुल्म करेगा सियासत के गलियारों से

जर्रा-जर्रा गूंज उठेगा मुलायम सिंह के नारों से

aashu malik
आशु मलिक

सपा में आशु मुस्लिम चेहरा हैं. नये हैं, इसलिए आजम खान को भी खटकते हैं. क्योंकि अपने मन से आजम तो मुस्लिमों के एकमात्र नेता हैं. आशु वेस्ट यूपी में सपा के बड़े नेता के तौर पर आगे आ रहे हैं. 2014 में उन्हें एमएलसी बनाकर लाया गया था बड़े मंच पर. जब अखिलेश के समर्थकों ने चिट्ठी लिख सबको परेशान कर दिया था, तब जवाबी कार्रवाई आशु ही कर रहे थे शिवपाल की तरफ से.

आशु ने अपना राजनीतिक प्रभाव बनाने के लिए कोई मौका छोड़ा नहीं है. हाशिमपुरा कांड के पीड़ितों को लेकर लोग कंफ्यूज थे. आजम खान धरना देने का प्रस्ताव कर रहे थे. पर आशु एक हाथ बढ़कर पीड़ितों को मुख्यमंत्री के पास ले गये और 5 लाख का मुआवजा दिलाया. दादरी बीफ कांड में अखलाक के परिवार को लखनऊ ले जाने वाले आशु ही थे. आजम खान इस बात से इतना चिढ़ गये थे कि गाजियाबाद में हज हाउस के उद्घाटन के बाद आशु के खिलाफ पैंतरा बनाना भी शुरू कर दिये थे.

फिर अमर सिंह के वापस आने के बाद आशु उनके साथ भी हो लिए. जब उदयवीर और रामगोपाल ने अखिलेश के पक्ष में कार्यकर्ताओं को चिट्ठी लिखी तो आशु ने ही जवाब देना शुरू किया. इसी चक्कर में आशु को पिलना भी पड़ा. हुआ ये कि जिस दिन मुलायम की उपस्थिति में अखिलेश और शिवपाल बोल रहे थे और बात जब खत्म होने वाली थी तभी मंच से मुलायम ने एक चिट्ठी का जिक्र किया. इस बात पर अखिलेश भड़क गए. और औरंगजेब वाली बात आ गई. अखिलेश ने कहा कि अमर सिंह सारी साजिश कर रहे हैं और आशु मलिक को सब पता है. आशु मंच पर पहुंच गए सफाई देने. और बाद में अखिलेश के घर पिट गए. इसीलिए कहते हैं कि किसी के परिवार के मामले में बड़ा सोच-संभलकर बोलना चाहिए.

3. उदयवीर सिंह

मुझे बर्खास्त होने का दुख नहीं है. दुख इस बात का है कि नेताजी तक सही बात पहुंच नहीं रही है. मैं मुख्यमंत्री के साथ हूं और हमेशा रहूंगा.

ये उदयवीर वही हैं, जिन्होंने मुलायम को चिट्ठी लिख दुखी कर दिया था कि साधना अखिलेश के खिलाफ रचना रच रही हैं. काला जादू कर रही हैं. उदयवीर को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया है.

उदयवीर अखिलेश के बचपन के दोस्त हैं. उनको अखिलेश का बेहद करीबी माना जाता है.

4. गायत्री प्रजापति

सपा के ये नेता 2002 तक बीपीएल कार्ड होल्डर थे. अब लोकायुक्त के स्कैनर में हैं. करोड़ों की संपत्ति रखने का आरोप लगा है. माइनिंग में घोटाले का आरोप है. इसी चीज को आधार बनाकर अखिलेश यादव ने गायत्री को बर्खास्त कर दिया था. पर मुलायम के कहने पर वापस ले लिया. फिर उसी वक्त गायत्री ने मुलायम और अखिलेश दोनों के पैर छुए.

2011 में समाजवादी पार्टी के एक सम्मेलन में रामगोपाल यादव ने ऐलान किया कि अमेठी के गायत्री प्रजापति ने पार्टी को 25 लाख रुपये डोनेट किये हैं. उसके बाद गायत्री ने मुलायम के पैर छुए थे. उस वक्त गायत्री को लबरझड़पू समझा जाता था. पर ये आदमी 1993 से ही चुनाव लड़ रहा है. इनके ही खिलाफ अमिताभ ठाकुर ने केस फाइल किया था. कुछ लोग कहते हैं कि ये झूठ बोलते रहते हैं. ये पहले से ही बहुत धनी हैं.

gayatri prajapati
गायत्री प्रजापति

कुछ तो था ही गायत्री में तभी 2012 में सपा ने अमिता सिंह की सीट अमेठी से गायत्री को लड़वाया. यहां से गायत्री 1993, 1996 और 2002 में हार चुके थे. इस बार गायत्री ने अमिता सिंह को हरा दिया. 2012 में गायत्री ने एक पीआर एजेंसी भी हायर की थी. एक फाइव स्टार होटल में बुलाया गया सबको. गायत्री का निर्देश था कि रिपोर्टरों से ज्यादा फोटोग्राफरों को बुलाया जाए. ना जाने कहां से ढेर सारे फोटो खींचने वाले पहुंच गए थे. पीआर एजेंसी तो मुलायम की पार्टी के किसी नेता ने कभी हायर ही नहीं की थी.


 

इस आदमी का कद इतना बढ़ा कि जब-जब अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, गायत्री एक नए मंत्री के रूप में शपथ ले रहे थे. सिंचाई विभाग से लेकर माइनिंग तक सबमें गायत्री आ गए. बहुत कम लोगों से मिलने वाले रामगोपाल ने कभी भी गायत्री को मना नहीं किया मिलने से. मुलायम ने उनको एक हेलिकॉप्टर भी दिया था लोकसभा चुनावों में. पार्टी बुरी तरह हारी लेकिन गायत्री स्टार कैंपेनर रहे.

आर्ट्स ग्रेजुएट हैं गायत्री. हलफनामे में प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने को अपना व्यवसाय बताया था. पर मंत्री बनने के चार साल के अंदर गायत्री के नाम पर 13 कंपनियां खड़ी हैं. एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है गायत्री के पास. इन कंपनियों में गायत्री के बेटे, भाई, भतीजा सब डायरेक्टर हैं. ड्राइवर भी एक कंपनी रखे हुए है. एक कंपनी के मालिक इनके बेटे अनुराग पर एक नाबालिग से रेप का भी आरोप है.

दुबारा मंत्री बनने के बाद गायत्री ने कहा- मुलायम भगवान शंकर, अखिलेश गणेश और मैं नंदी हूं.


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