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अखिलेश यादव के वो मंत्री, जिनके इस चुनाव में धुर्रे उड़ गए

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एग्जिट पोल में यूपी के चुनावी नतीजों का जो आकलन किया गया था, बीजेपी ने उससे भी दो कदम आगे जाकर परफॉर्म किया है. इंडिया टुडे-एक्सिस माइ इंडिया की एग्जिट पोल में बीजेपी के 251 से 279 सीटें जीतने का अंदाजा लगाया गया था, लेकिन शाम पांच बजे तक पार्टी 278 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी और 33 सीटों पर आगे थी. एग्जिट पोल में जहां बीजेपी को 36% वोट मिलने का अंदाजा लगाया गया था, वही पार्टी पांच बजे तक 39.7% वोट हासिल कर चुकी थी.

यूपी में एक बार फिर वही मोदी लहर दिखाई दी, जो 2014 के लोकसभा चुनाव में दिखी थी. तब बीजेपी ने 80 में से 71 लोकसभा सीटें जीती थीं. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी 1980 का वो रिकॉर्ड तोड़ सकती है, जो कांग्रेस ने 425 में से 309 सीटें जीतकर बनाया था. तब बीजेपी सिर्फ 11 सीटें जीती थी.

पांच बजे तक बीएसपी 16 और सपा-कांग्रेस गठबंधन 52 सीटों पर जीत दर्ज कर चुका था. वैसे पार्टियों से ज्यादा बुरी गत तो निवर्तमान अखिलेश सरकार के मंत्रियों की हुई, जो अपना ही चुनाव नहीं निकाल पाए. आइए नजर डालते हैं अखिलेश के ऐसे ही मंत्रियों पर:

1. अवधेश प्रसाद
सीट: मिल्कीपुर
हार का अंतर: 28,276

अवधेश प्रसाद
अवधेश प्रसाद

अखिलेश कैबिनेट में होमगार्ड्स विभाग के मंत्री रहे अवधेश प्रसाद (58,684) मिल्कीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे थे, जहां बीजेपी के गोरखनाथ (86,960) ने उन्हें 28,276 से ज्यादा वोटों से हरा दिया. इसी सीट पर अपने पिछले चुनाव में अवधेश ने बीएसपी के पवन कुमार को 34,237 (19.60%) वोटों से हराया था.

2. ब्रह्मशंकर त्रिपाठी
सीट: कुशीनगर
हार का अंतर: 50,763

ब्रह्मशंकर त्रिपाठी
ब्रह्मशंकर त्रिपाठी

पिछली सरकार में खादी-ग्रामोद्योग मंत्री रहे ब्रह्मशंकर त्रिपाठी (46,369) अपनी सीट नहीं बचा पाए. पिछला चुनाव वो इसी सीट पर बीएसपी के जावेद इकबाल से 23,688 (13.23%) वोटों से जीते थे. इस चुनाव में वो तीसरे नंबर पर रहे. पहले नंबर पर बीजेपी के रजनीकांत मणि त्रिपाठी 97,132 और दूसरे नंबर पर बीएसपी के राजेश प्रताप 49,029 वोटों के साथ रहे.

3. राममूर्ति वर्मा
सीट: ददरौल
हार का अंतर: 17,398

राममूर्ति वर्मा
राममूर्ति वर्मा

यूपी सरकार में डेयरी विकास मंत्री रहे राममूर्ति वर्मा (69,037) को बीजेपी कैंडिडेट मानवेंद्र सिंह (86,435) ने 17,398 वोटों से हरा दिया. 2012 के चुनाव में राममूर्ति ददरौल सीट पर ही बीएसपी के रिजवान अली से 4,879 (2.31%) वोटों से जीते थे. बीएसपी के रिजवान (50,762) इस बार तीसरे नंबर पर रहे.

4. शाहिद मंजूर
सीट: किठौर
हार का अंतर: 10,822

शाहिद मंजूर
शाहिद मंजूर

सूबे की पिछली सरकार में श्रम और रोजगार मंत्री रहे शाहिद मंजूर (79,800) किठौर से दावेदारी ठोंक रहे थे, लेकिन बीजेपी के सत्यवीर त्यागी (90,622) ने उन्हें 10,822 वोटों से हरा दिया. शाहिद ने अपना पिछला चुनाव किठौर सीट पर ही बीएसपी के लखीराम को 11,106 (5.52%) वोटों से हराकर जीता था.

5. अरविंद सिंह गोप
सीट: राम नगर
हार का अंतर: 22,387

अरविंद सिंह गोप
अरविंद सिंह गोप

अखिलेश यादव के बेहद करीबियों में से एक अरविंद सिंह गोप (66,210) पिछली सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री रहे. इस चुनाव में बीजेपी के शरद कुमार अवस्थी (88,937) ने उन्हें 22,387 वोटों से हरा दिया, जो सपा के लिए बेहद चौंकाने वाला है. गोप ने अपने पिछले चुनाव में राम नगर सीट से ही बीएसपी के अमरेश कुमार को 32,224 (15.97%) वोटों से हराया था.

6. कमाल अख्तर
सीट: हसनपुर
हार का अंतर: 25,716

कमाल अख्तर
कमाल अख्तर

पिछली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री रहे कमाल अख्तर (83,499) हसनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे थे, जहां बीजेपी के महेंद्र सिंह खड्गवंशी (1,11,269) ने उन्हें 25,716 वोटों से हरा दिया. पिछले चुनाव में कमाल इसी सीट पर 32,228 (14.60%) वोटों से जीते थे. उन्होंने बीएसपी के गंगा सरन को हराया था.

7. जियाउद्दीन रिजवी
सीट: सिकंदरपुर
हार का अंतर: 23,548

जियाउद्दीन रिजवी
जियाउद्दीन रिजवी

जियाउद्दीन रिजवी (45,988) को अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में पशुपालन मंत्री बनाया था. इस बार के चुनाव में बीजेपी के संजय यादव (69,536) ने उन्हें 23,548 वोटों से हरा दिया. अपने पिछले चुनाव में जियाउद्दीन इसी सीट से लड़े थे और बीएसपी के चंद्रभूषण राजभर को 28,531 (17.98%) वोटों से हराया था.

8. गायत्री प्रजापति
सीट: अमेठी
हार का अंतर: 5,065

गायत्री प्रजापति
गायत्री प्रजापति

अखिलेश सरकार के सबसे विवादित मंत्री गायत्री प्रजापति (59,161) रेप के आरोप के चलते कई दिनों से फरार हैं. अखिलेश कैबिनेट में वो ट्रांसपोर्ट मंत्री थे. चुनाव जीतने के लिए गायत्री ने पानी की तरह पैसा बहाया था, लेकिन दो रानियों की लड़ाई में गायत्री का चुनाव पिस गया. अमेठी की पहली ‘रानी’ गरिमा सिंह (64,226) ने गायत्री को 5,065 वोटों से हरा दिया, जबकि दूसरी ‘रानी’ अमिता सिंह (20,291) चौथे नंबर पर रहीं.

9. शिवकांत ओझा
सीट: रानीगंज
हार का अंतर: 29,215

शिवकांत ओझा
शिवकांत ओझा

इस विधानसभा चुनाव में रानीगंज सीट से लड़ने वाले सपा कैंडिडेट शिवकांत ओझा पिछली सरकार में मेडिकल और हेल्थ मिनिस्टर थे. 37,816 वोटों के साथ वो इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे. रानीगंज सीट पर चुनाव जीता बीजेपी के अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा ने, जिन्हें 67,031 वोट मिले. दूसरे नंबर पर रहे बीएसपी के शकील अहमद को 58,022 वोट मिले. 2012 के चुनाव में शिवकांत ने बीएसपी के मंशा अहमद को 12,604 (7.78%) वोटों से हराया था.

10. रियाज अहमद
सीट: पीलीभीत
हार का अंतर: 43,356

रियाज अहमद
रियाज अहमद

पीलीभीत सीट से सपा कैंडिडेट रियाज अहमद पिछली सरकार में फिशरी मिनिस्टर थे. इस चुनाव में उन्हें 93,130 वोट मिले, जबकि उन्हें हराने वाले बीजेपी के संजय सिंह गंगवार को 1,36,486 वोट मिले. पिछले चुनाव में संजय बीएसपी के टिकट पर उतरे थे, लेकिन रियाज से 4,235 (1.88%) वोटों से हार गए थे.

11. शंखलाल मांझी
सीट: जलालपुर
हार का अंतर: 31,536

शंखलाल
शंखलाल

सूबे की पिछली सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे शंखलाल मांझी (58,773) इस चुनाव में बीएसपी के रीतेश पांडेय (90,309) से 31,536 वोटों से हार गए. शंखलाल तीसरे नंबर पर रहे, जबकि इस सीट पर बीजेपी कैंडिडेट डॉ. राजेश सिंह 77,279 दूसरे नंबर पर रहे. शंखलाल ने अपना पिछला चुनाव अंबेडकर नगर की कटेहरी सीट से लड़ा था, जहां उन्होंने बीएसपी के लालजी वर्मा को 17,620 (8.72%) वोटों से हराया था.

12. रविदास मेहरोत्रा
सीट: लखनऊ सेंट्रल
हार का अंतर: 5,094

रविदास मेहरोत्रा
रविदास मेहरोत्रा

मतगणना में आधे से ज्यादा दिन तक आगे रहे सपा नेता रविदास मेहरोत्रा लखनऊ सेंट्रल सीट से चुनाव हार गए. इस सीट पर बीजेपी के बृजेश पाठक (78,400) ने रविदास (73,306) को 5,094 वोटों से हराया. पिछली सरकार में रविदास परिवार कल्याण मंत्री थे, लेकिन इस बार अपनी सीट नहीं बचा पाए.

13. अभिषेक मिश्रा
सीट: लखनऊ नॉर्थ
हार का अंतर: 27,276

अभिषेक मिश्रा
अभिषेक मिश्रा

सपा सरकार में स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर रहे अभिषेक मिश्रा (82,039) इस चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट डॉ. नीरज वोरा (1,09,315) से 27,276 वोटों से हार गए. पिछले चुनाव में नीरज इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे और अभिषेक से ही 2,219 (1.31%) वोटों से हार गए थे.


इन नेताओं के अलावा गोंडा से सपा के टिकट पर लड़ने वाले सूरज सिंह ऐसा नेता हैं, जिनके चाचा विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह पिछली सरकार में कृषि मंत्री थे. विनोद की वजह से ही सूरज को टिकट मिला था, लेकिन वो अपना चुनाव नहीं निकाल पाए. गोंडा की सीट पर बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण ने चुनाव जीता. प्रतीक को 57,938 बीएसपी के मो. जलील खान को 46,297 और सपा से सूरज सिंह को 41,183 वोट मिले.

हमेशा निर्दलीय लड़ने वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया अखिलेश कैबिनेट में सिविल डिफेंस मंत्री थे. वो इस बार भी निर्दलीय लड़े. राजा भैया को 1,36,597 वोट मिले और उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट जानकी शरण को 1,03,647 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया. जानकी को 32,950 वोट मिले. अपना पिछला चुनाव राजा भैया ने 88,255 वोटों से जीता था.

राजा भैया
राजा भैया

वैसे सपा के कुछ ऐसा नेता भी हैं, जो पिछली कैबिनेट में मंत्री थे और इस बार मोदी-लहर में भी अपना चुनाव निकाल ले गए:

संसदीय कार्यमंत्री रहे आजम खान (1,02,100) ने रामपुर सदर सीट पर बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना (55,258) को 46,842 वोटों से हरा दिया.

पंचायत राज मंत्री रहे रामगोविंद चौधरी (51,201) ने बांसडीह सीट पर निर्दलीय कैंडिडेट केतकी सिंह (49,514) को 1,687 वोटों से हरा दिया.

फूड ऐंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन मंत्री रहे इकबाल महमूद (79,248) ने संभल सीट पर AIMIM के जईउर्रहमान (60,426) को 18,822 वोटों से हरा दिया.

टेक्सटाइल मिनिस्टर रहे महबूब अली (74,713) ने अमरोहा सीट पर बीएसपी के नौशाद अली (59,671) को 15,042 सीटों से हरा दिया.

वनमंत्री रहे दुर्गा प्रसाद यादव (88,087) ने आजमगढ़ सीट पर बीजेपी के अखिलेश (61,825) को 26,262 वोटों से हरा दिया.

आईटी मिनिस्टर रहे मनोज कुमार पांडेय (59,103) ने ऊंचाहार सीट पर बीजेपी के उत्कृष्ट मौर्य (57,169) को 1,934 वोटों से हरा दिया.

स्टांप, रजिस्ट्रेशन मिनिस्टर रहे यासर शाह (79,188) ने मटेरा सीट पर बीजेपी के अरुण वीर सिंह (77,593) को 1,595 वोटों से हरा दिया.

माध्यमिक शिक्षामंत्री रहे बलराम यादव के बेटे संग्राम यादव (74,276) ने अतरौलिया की सीट पर बीजेपी के कन्हैया लाल निषाद (71,809) को 2,467 वोटों से हरा दिया.


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