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जानिए, चीन ने इस्लाम के लिए कौन सा नया कानून बनाया है?

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चीन ने इस्लाम से जुड़ा नया कानून बनाया है. उसके मुताबिक इसके तहत, ‘इस्लाम’ को सुधारा जाएगा. उसे ‘चीन’ के मुताबिक ढाला और बनाया जाएगा. चीन बताएगा कि उसके यहां रहने वाले मुसलमान किस तरह से अपना धर्म मानें. जमीनी हकीकत ये है कि चीन के कई हिस्सों में मुस्लिमों को धर्म मानने की आज़ादी नहीं. उन्हें टॉर्चर करके नास्तिक बनाया जा रहा है. चीन में दर्ज़नों यातना शिविर हैं. इनमें लाखों मुस्लिम कैद हैं. चीन कहता है, ये ‘वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर्स’ हैं. कि यहां ‘पिछड़े, नासमझ और गरीब ग्रामीण अल्पसंख्यकों’ को काम सिखाया जाता है. जबकि असलियत ये है कि इन कैंप्स में मुस्लिम कवि, प्रफेसर, वैज्ञानिक और पत्रकार भी कैद हैं. चीन जो कर रहा है, साफतौर पर वो नस्लीय सफाया है.

आशंका है कि 20 से 79 साल के बीच की उम्र के लगभग 11 लाख उइगर मुसलमान टॉर्चर कैंप्स में बंद हैं. बाकी मुस्लिम समुदायों के लोगों की गिनती अलग है. यहां बंद रखकर जोर-जबर्दस्ती से उनका धर्म, उनकी भाषा छुड़वाई जाती है. उन्हें जबरन नास्तिक बनाया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब इन उइगरों को टॉर्चर कैंप भेजा जाता है, तो अक्सर उनके बच्चे अलग करके सरकारी अनाथालयों में भेज दिए जाते हैं. वहां बच्चों का पूरी तरह से ब्रेन वॉश कर दिया जाता है. ताकि अगली पीढ़ी के अंदर से उस संस्कृति की पहचान खत्म कर दी जाए.

शिनजियांग में रहने वाले उइगर संस्कृति की वजह से चीन से कहीं ज्यादा सेंट्रल एशिया
शिनजियांग में रहने वाले उइगर साझा संस्कृति की वजह से चीन से कहीं ज्यादा सेंट्रल एशिया के मुस्लिम घुमक्कड़ कबीलों से खुद को नजदीक पाते हैं. ये लोग सिल्क रोड के रास्ते व्यापार करने वाले अरब और मध्य एशिया के घुमंतू ट्रेडर्स के वंशज हैं. 

शिनजियांग की हिस्ट्री क्या है?
चीन के नक्शे पर नॉर्थ-वेस्ट की तरफ ये शिनजियांग प्रांत है. इस रास्ते चीन की सीमा रूस, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, भारत और मंगोलिया से मिलती है. ये काराकोरम बेल्ट का हिस्सा है. एक जमाने में ये हिस्सा मशहूर सिल्क रूट का हिस्सा हुआ करता था. इसका एक बहुत छोटा हिस्सा ही जीने लायक है. बाकी में बहुत ठंड होती है. शिनजियांग हमेशा से चीन का हिस्सा नहीं था. पहले ये तुर्की साम्राज्य का भाग था. 1949 में इसने खुद की आजादी का ऐलान कर दिया. कहा, अब से हम पूर्वी तुर्किस्तान हैं. मगर कुछ ही महीनों में ये आधिकारिक तौर पर ‘पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ का हिस्सा बना लिया गया. यही शिनजियांग करीब एक करोड़ उइगरों का घर है. उइगर अपने तौर-तरीकों में सेंट्रल एशिया के घुमक्कड़ कबीलों जैसे हैं. एक वक्त था, जब उइगरों से शिनजियांग की लगभग 47 फीसद आबादी बनती थी. अब ये काफी कम हो गए हैं. सरहद पार के कज़ाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों में भी काफी उइगर रहते हैं.

सबसे ज़्यादा निशाना बन रहे हैं उइगर मुसलमान
दुनियाभर के अखबार और वेबसाइट्स लंबे वक्त से इस बारे में लिख रहे हैं. अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र की भी एक रिपोर्ट आई थी. इसके मुताबिक, 10 लाख से ज़्यादा उइगर मुसलमान कैंप्स में बंद हैं. जिन समुदायों को निशाना बनाया जा रहे हैं, उनमें उइगर, उज़बेक, हुई, कज़ाक और बाकी अल्पसंख्यक मुसलमान हैं. सबसे ज्यादा तादाद उइगरों की है. उइगरों की सबसे ज्यादा आबादी शिनजियांग प्रांत में रहती है.

ये 2015 की तस्वीर है. पहले हालत इतने बुरे नहीं थे. अब तो ऐसी खबरें हैं कि मस्जिदों के गुंबद हटा दिए गए हैं. अरबी तक पढ़ने की मनाही है. कई मस्जिद बंद करवा दिए गए हैं (फोटो: रॉयटर्स)
ये 2015 की तस्वीर है. पहले हालत इतने बुरे नहीं थे. अब तो ऐसी खबरें हैं कि मस्जिदों के गुंबद हटवा दिए गए हैं. अरबी तक पढ़ने की मनाही है. कई मस्जिद बंद करवा दिए गए हैं. नमाज़ पढ़ना, दाढ़ी रखना, यहां तक कि बच्चों के इस्लामिक नाम रखने पर भी बैन है (फोटो: रॉयटर्स)

चीन ने यहां की डेमोग्रफी को बदल दिया है
ये 1990 के दशक की बात है. जब सोवियत संघ टूटा, तो कई सारे देश में उससे अलग हुए. कइयों की पहचान इस्लामिक थी. इसी माहौल में यहां शिनजियांग में भी आजाद होने की मरोड़ शुरू हुई. लेकिन चीन ने इस पर से अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने दी. पकड़ भले बनी रही हो, मगर तनाव बना रहा. उइगरों समेत बाकी अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदायों का आरोप है कि चीन उन्हें उनके तौर-तरीकों से नहीं जीने दे रहा. यहां पर रहने वाले हान चीनियों को तवज्जो दी जाती है और उन्हें नजरंदाज किया जाता है. अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुस्लिमों को निशाना बनाने की पॉलिसी शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद काफी बढ़ी.

उइगरों के आरोप गलत नहीं हैं. पिछले लंबे समय से चीन यहां काफी काम कर रहा है. नए-नए प्रॉजेक्ट्स, विकास का काम. वन बेल्ट-वन रोड वाले प्रॉजेक्ट का एक अहम हिस्सा है शिनजियांग. चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहे इकॉनमिक कॉरिडोर के नक्शे में भी शिनजियांग बहुत अहम है. मगर ऐसे प्रॉजेक्ट्स में ज्यादा फायदा यहां रहने वाले हान चीनियों को दिया गया. उन्हें नौकरियां मिलीं. उनकी माली हालत बेहतर होती गई. फिर और जगहों से भी हान चीनी यहां आकर बस गए. 2000 में हुई जनगणना के मुताबिक, यहां की कुल आबादी का 40 फीसद हो गए हैं हान. जबकि 1949 में यहां बस छह फीसद हान ही रहते थे. प्रॉजेक्ट्स की वजह से यहां चीन के बाकी हिस्सों से खूब सारे लोग आए. उनकी भी खासी तादाद हो गई आबादी में. चीन ने भी देश के बाकी जगहों से यहां लोगों के आने और बसने को सपोर्ट किया. इन सारी वजहों से यहां की डेमोग्रफी बिल्कुल बदल गई है. साथ में यहां पर बड़ी संख्या में चीन के सैनिक और अधिकारी भी तैनात हैं. ताकि किसी भी तरह के विद्रोह को दबाया जा सके.

ये शिनजियांग के एक मुस्लिम कैंप की तस्वीर. ये फोटो सितंबर 2018 में ली गई थी (फोटो: रॉयटर्स)
ये शिनजियांग के एक मुस्लिम कैंप की तस्वीर. ये फोटो सितंबर 2018 में ली गई थी (फोटो: रॉयटर्स)

चीन जो कहता है, उस पर भरोसा कैसे हो?
2008 में चीन ने ओलिंपिक होस्ट किया. इसके पहले शिनजियांग के हालात खराब होने लगे. फिर 2009 में खूब हिंसा हुई. एक कारखाने के अंदर उइगरों और हान चीनियों के बीच झड़प हुई. चीन ने कहा कि 200 से ज्यादा हान मारे गए हैं. चीन ने इसको आधार बनाकर पूरी उइगर कम्यूनिटी को टारगेट करना शुरू किया. जून 2012 में खबर आई कि कुछ उइगर कट्टरपंथियों ने एक विमान को बंधक बनाने की कोशिश की है.

ऐसी ही कई हिंसा की खबरें आईं. चीन ने उइगर कट्टरपंथियों पर उंगली उठाई. चीन इन्हें अलगाववादी आतंकवादी कहता है. चीन से जो भी खबरें आती हैं, वन-वे होती हैं. वो सच हैं कि नहीं, ये पुख्ता करने का आपके पास कोई तरीका नहीं. मीडिया भी सरकारी भोंपू है. विदेशी पत्रकारों और एजेंसियों पर पाबंदियां हैं. ऐसे में वहां से आने वाली उइगर कट्टरपंथियों के हाथों की जाने वाली हिंसा की खबरों की निष्पक्ष जांच नहीं हो पाती.

शिनजियांग की एक मस्जिद, बाहर चीन का झंडा. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, नए कानून में अगले पांच साल के अंदर इस्लाम को 'सिनिसाइज़' करने का लक्ष्य रखा गया है. सिनिसाइज़ का मतलब चीनीकरण (फोटो: रॉयटर्स)
शिनजियांग की एक मस्जिद, बाहर चीन का झंडा. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, नए कानून में अगले पांच साल के अंदर इस्लाम को ‘सिनिसाइज़’ करने का लक्ष्य रखा गया है. सिनिसाइज़ का मतलब चीनीकरण (फोटो: रॉयटर्स)

आतंकवाद का क्या ऐंगल है?
शिनजियांग के अलगाववादी चरमपंथियों का एक संगठन है- ईस्ट तुर्कमेनिस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM). चीन का कहना है कि ETIM उइगरों को कट्टरपंथ की ओर ले जा रहा है. ये ही लोग चीन में हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. ETIM का मकसद है चीन के पूर्वी हिस्से में आजाद पूर्वी तुर्किस्तान बनाना. मगर ETIM कहता है कि चीन उसके ऊपर झूठे इल्जाम लगाता है. चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है. ताकि इसके बहाने उइगरों और मुसलमानों को निशाना बना सके. उधर चीन का कहना है कि ETIM इस्लामिक स्टेट से मिला हुआ है. ISIS ने एक विडियो भी जारी किया था. उसने चीन को ‘खून की नदियां’ बहा देने की धमकी भी दी थी. मगर कई जानकार कहते हैं कि ETIM इतना मजबूत है ही नहीं कि वो चीन में इतना कुछ कर सके. ये भी कहा जाता है कि लंबे समय से चीन यहां जो ज्यादतियां कर रहा है, उसकी वजह से लोग हथियार उठा रहे हैं.

चीन उइगरों को जबरन ‘कम्यूनिस्ट’ बनाने में लगा है
चीन उइगरों पर भरोसा नहीं करता. इसकी सबसे बड़ी वजह से उइगरों का धर्म. चीन उनकी ‘इस्लामिक’ पहचान खत्म करना चाहता है. मिसाल के तौर पर आप वहां से आने वाली खबरें देखिए. चीन फरमान निकालता है कि उइगर रोज़ा नहीं रख सकते. दाढ़ी नहीं बढ़ा सकते. बुर्का नहीं पहन सकते. कुरान नहीं सीख सकते. मस्जिद नहीं जा सकते. बच्चों के इस्लामिक नाम नहीं रख सकते. धार्मिक तौर-तरीके से शादी नहीं कर सकते. उन्हें सूअर का मांस खाने और शराब पीने को भी मजबूर किया जाता है. उइगरों पर जबरन हान चीनियों के साथ शादी करने का भी दबाव बनाया जाता है. ये असल में ‘ऐथनिक क्लीनजिंग’ का एक तरीका है. शिनजियांग में रहने वाले बहुत सारे उइगरों और कज़ाकों के परिवार सरहद पार कजाकिस्तान में रहते हैं. मगर चीन इन उइगरों को सरहद पार के अपने रिश्तेदारों से बात नहीं करने देता. अगर वो फोन पर भी बात कर लें, तो उन्हें पकड़कर कैंप में बंद कर दिया जाता है.

ये हैं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग. माओ के बाद से चीन ने इतना ताकतवर शासक नहीं देखा. चिनफिंग के राज में अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुस्लिमों की बहुत दुर्गति हुई है (फोटो: रॉयटर्स)
ये हैं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग. माओ के बाद से चीन ने इतना ताकतवर शासक नहीं देखा. चिनफिंग के राज में अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुस्लिमों की बहुत दुर्गति हुई है (फोटो: रॉयटर्स)

सबको खबर है, सब चुप हैं
सब पता होने के बावजूद दुनिया का कोई देश चीन पर दबाव बनाता नहीं दिखता. UN ने भी अब जाकर मुंह खोलना शुरू किया है. मगर UN के पास दांत नहीं हैं. चीन खुद सुरक्षा परिषद का परमानेंट मेंबर है. अगस्त 2018 में वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने एक एडिटोरियल में लिखा था. कि दुनिया चीन में मुस्लिमों के साथ जो हो रहा है, उसे अनदेखा नहीं कर सकती. मगर क्या होना चाहिए और क्या होता है, इन दोनों के बीच दुनिया में हमेशा से ही एक गहरी खाई रही है.


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