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NIT श्रीनगर के उन स्टूडेंट्स का हाल, जो 370 पर बंदी की मार झेल रहे हैं

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2 अगस्त, 2019. आर्टिकल 370 पर लिया गया केंद्र सरकार का फैसला आया नहीं था. बातें चल रही थीं कि कश्मीर में कुछ तो बड़ा होने वाला है. ऐसे में ख़बर आई. श्रीनगर के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (NIT) ने अगले आदेश तक सारी क्लासेज़ सस्पेंड कर दी हैं. कश्मीर के बाहर से जो स्टूडेंट्स पढ़ते हैं यहां, उन्हें अपने-अपने घर भेज दिया गया. इसके बाद आर्टिकल 370 पर सरकार का ऐलान आया. कश्मीर में लॉकडाउन हुआ. डेढ़ महीना बीत चुका है. लेकिन NIT श्रीनगर में पढ़ाई वापस शुरू नहीं हुई. स्टूडेंट्स नहीं जानते, क्लासेज़ फिर कब शुरू होंगी.

छात्रों ने क्या बताया?
NIT के कुछ छात्रों से बात हुई. उन्होंने बताया कि ‘कश्मीर में कुछ होने वाला है’ जैसी बातें स्थानीय स्तर पर फरवरी से ही हो रही थीं. मगर उनकी वजह से कैंपस ऐक्टिविटी पर कोई असर नहीं पड़ा था. ऐसे में जब जुलाई के आख़िर तक आते-आते ये बातें तेज़ हुईं, तब भी छात्रों को कोई चिंता नहीं थी. फिर तय समय पर सेमेस्टर भी शुरू हो गया. इसे शुरू हुए बस दो ही दिन हुए थे कि 2 अगस्त की शाम क्लासेज़ सस्पेंड करने के लिए आदेश जारी हो गया. उन्हें बताया गया कि ज़िला प्रशासन ने ऐसी ताकीद की है. निर्देश दिया है कि कश्मीर से बाहर के छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स को जल्द-से-जल्द घर भेज दिया जाए. मगर फिर श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी का बयान आया. कि NIT श्रीनगर ने क्लासेज़ सस्पेंड करने का जो नोटिस दिया है, वो किसी ग़लतफहमी में हुआ है.

बसों में बिठाकर छात्रों को जम्मू छोड़ा गया
शाहिद चौधरी के इस बयान से उलझन हो गई. स्टूडेंट्स समझ नहीं पा रहे थे कि करना क्या है. अगली सुबह, यानी 3 अगस्त को कैंपस के सिक्यॉरिटी गार्ड्स ने सुबह 6 बजे से ही स्टूडेंट्स को उठाना शुरू किया. कैंपस के बाहर प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर परिवहन निगम की बसें खड़ी करवा दीं. उनमें बिठाकर कश्मीर के बाहर के छात्रों को जम्मू रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया. ट्रेन में अतिरिक्त कोच लगवाकर छात्रों को उनके घर पहुंचाने का इंतजाम भी किया गया था. एक दिन बाद गैर-कश्मीरी फैकल्टीज़ और डायरेक्टर राकेश सहगल ने भी कैंपस खाली कर दिया.

नया सेमेस्टर शुरू हुए बस दो दिन हुए थे
NIT श्रीनगर में दो स्ट्रीम हैं. इंजीनियरिंग और बेसिक साइंसेज़. इंजीनियरिंग में आठ डिपार्टमेंट हैं- सिविल. इलेक्ट्रिकल. कैमिकल. मैकेनिकल. कंप्यूटर. इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन. मैटलर्जी और इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी. बताया गया है कि बेसिक साइंसेज़ और इंजीनियरिंग, दोनों स्ट्रीम मिलाकर कैंपस में करीब ढाई हज़ार स्टूडेंट्स पढ़ते हैं. कुल छात्रों में लगभग एक तिहाई कश्मीरी हैं. इंजीनियरिंग के चार साल के कोर्स में कुल आठ सेमेस्टर होते हैं. सेमेस्टर्स की दो कैटगरी हैं- ऑड और ईवन. ऑड सेमेस्टर अगस्त से दिसंबर के पहले हफ़्ते तक चलता है. फिर सर्दी की छुट्टियां. फिर मिड फरवरी से जून के पहले हफ़्ते तक ईवन सेमेस्टर. इस साल ऑड सेमेस्टर शुरू हुए बस दो दिन हुए थे, जब क्लासेज़ सस्पेंड करने का आदेश आया.

प्लेसमेंट सीज़न के बीच क्लासेज़ बंद हुईं
जब क्लासेज़ सस्पेंड हुईं, तब फाइनल ईयर का प्लेसमेंट सीज़न भी चल रहा था. कंपनियों को कैंपस में आना था. क्लासेज़ स्थगित होने की वजह से ये भी लटक गया. कश्मीर के बाहर के छात्र मांग करने लगे कि उनके प्लेसमेंट के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाई जाए. काफी कोशिश के बाद अल्यूमिनाई असोसिएशन, डायरेक्टर और ट्रेनी ऐंड प्लेसमेंट सेल एक तात्कालिक व्यवस्था लेकर आया. गाज़ियाबाद में BSNL का एडवांस्ड लेवल टेलिकॉम ट्रेनिंग सेंटर (ALTTC) का कैंपस है. यहां ऑल्टरनेटिव प्लेसमेंट ड्राइव शुरू किया गया.

प्लेसमेंट पर फिलहाल क्या हो रहा है?
मगर एक बड़ी चिंता ये थी कि कश्मीर के लोकल छात्र इस प्रक्रिया से छूट रहे हैं. वजह ये कि उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था. इस चिंता के मद्देनज़र फिर संस्थान ने ये वैकल्पिक व्यवस्था बंद करने का निर्देश दिया. इसपर गैर-कश्मीरी छात्रों का विरोध आया. 4 सितंबर को फाइनल ईयर के कुछ छात्रों के एक डेलिगेशन ने जाकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) में अधिकारियों से मुलाकात की. छात्रों की तरफ से कहा गया कि ये इंतज़ाम बंद करने की जगह स्थानीय अख़बारों में विज्ञापन दिए जाएं. इनमें कश्मीरी छात्रों को इस वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में जानकारी दी जाए. ताकि वो भी शामिल हो सकें. छात्रों की मांग के आगे आख़िरकार NIT श्रीनगर ने प्लेसमेंट के इस वैकल्पिक इंतज़ाम को जारी रखने की मंजूरी दे दी.

बच्चे इंटर्नशिप कर रहे हैं, ताकि टाइम ख़राब न हो
घाटी में इंटरनेट पर लगे बैन के कारण NIT की वेबसाइट भी अपडेट नहीं हो पा रही थी. संस्थान फेसबुक-ट्विटर के ज़रिये बीच-बीच में छात्रों की हिम्मत बंधा रहा था. छात्रों को भरोसा दिलाया गया कि इंटरनेट सेवा बहाल हो जाने के बाद दोबारा क्लासेज़ शुरू होने से जुड़ा अपडेट संस्थान की वेबसाइट पर मुहैया कराया जाएगा. वेबसाइट चल गई है. मगर क्लास शुरू होने वाला अपडेट अभी नहीं आया.

अपडेट की जगह NIT श्रीनगर ने अपनी वेबसाइट पर फैक्लटिज़ के लिए निर्देश डाला. उनसे कहा गया कि वो B-Tech, M-Tech, MSc and Ph.D कोर्सेज़ में अपने डिपार्टमेंट का मौजूदा सिलेबस देखें. फिर SWAYAM प्लेटफॉर्म देखकर अपने कोर्स से मिलते-जुलते विडियोज़ की लिस्ट बनाएं. ये SWAYAM platform भारत सरकार का ऑनलाइन प्रोग्राम है. इसके माध्यम से छात्रों के लिए लर्निंग मटीरियल मुहैया कराया जाता है.

ये NIT श्रीनगर की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है. तात्कालिक व्यवस्था के तहत सिलेबस के कुछ अहम हिस्सों का कोर्स मटीरियल छात्रों को ऑनलाइन मुहैया कराने की योजना है.
ये NIT श्रीनगर की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है. तात्कालिक व्यवस्था के तहत सिलेबस के कुछ अहम हिस्सों का कोर्स मटीरियल छात्रों को ऑनलाइन मुहैया कराने की योजना है. 

MHRD का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है एक- नैशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नॉलजी इन्हेन्स्ड लर्निंग (NPTEL). इसमें बॉम्बे, दिल्ली, कानपुर, खड़गपुर, मद्रास, गुवाहाटी और रुड़की IIT के अलावा ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु’ की भी साझेदारी है. इसके मार्फ़त इंजीनियरिंग और फिजिकल साइंसेज़ से जुड़ा वीडियो कोर्स ऑनलाइन मुहैया कराया जाता है. एक विचार ये हो रहा है कि NIT श्रीनगर के छात्रों के लिए ज़रूरी क्लासेज़ के वीडियो बनाकर इसपर डाले जाएं. ताकि बच्चे इसके सहारे पढ़ सकें. कश्मीरी छात्रों के लिए भी किसी तरह ऑफलाइन इन वीडियोज़ को मुहैया कराने पर विचार हुआ. मगर इसे लेकर भी आपत्तियां हैं. छात्र कह रहे हैं कि पढ़ाई बस वीडियोज़ पर नहीं हो सकती. लैब में सीखी जाने वाली चीजों का क्या होगा? प्रैक्टिकल कैसे हो सकेगा? छात्र चाहते हैं कि स्थितियां ठीक न होने तक सरकार कश्मीर के बाहर रेगुलर क्लासेज़ का इंतज़ाम करे. कश्मीरी छात्रों को भी यहां बुलाया जाए. ताकि किसी की पढ़ाई का हर्जाना न हो. न ही सेशन में देर हो.

और भी कुछ वैकल्पिक इंतज़ाम हुए हैं
जैसे, गेट और कैट की परीक्षाएं थीं. इसके लिए अप्लाई करने वाले छात्रों को डायरेक्टर से अपने फॉर्म अटेस्ट करवाने थे. ऐसे में NIT श्रीनगर ने अपने सोशल मीडिया पेज पर ऐलान किया. कि फॉर्म अटेस्ट करवाने के लिए छात्र दिल्ली के पंचशील एन्क्लेव में NIT ट्रांजिट हाउस आ सकते हैं. तारीख़ तय हुई 10 और 11 सितंबर. बताया गया कि डायरेक्टर राकेश सहगल इन तारीख़ों में यहां मौजूद रहेंगे. कश्मीर घाटी के छात्रों की सुविधा के लिए उन्हें NIT श्रीनगर कैंपस बुलाया गया.

बड़ा सवाल तो अभी बाकी है
मगर ये सब तात्कालिक इंतज़ाम हैं. छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी है कि क्लासेज़ फिर से कब शुरू होंगी. कहीं सेशन तो लेट नहीं हो जाएगा? कश्मीर के बाहर के छात्र कह रहे हैं कि जब तक श्रीनगर कैंपस दोबारा शुरू नहीं होता, कहीं और क्लासेज़ ली जाएं. जिन छात्रों से बात हुई, उन्होंने बताया कि इस मांग के लिए अथॉरिटीज़ राज़ी नहीं. उन्हें बताया जा रहा है कि NIT के किसी और कैंपस में जगह नहीं. ऐसे में इन छात्रों को वहां अकोमोडेट करना मुश्किल है.

छात्र सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं, जवाब नहीं मिल रहा
अथॉरिटीज़ कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रही हैं. NIT श्रीनगर के छात्र लगातार सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं. दर्ज़नों ट्वीट आ रहे हैं उनके. छात्र HRD मिनिस्ट्री, मंत्री, NIT अथॉरिटीज़ को टैग करके सवाल कर रहे हैं. मगर उधर से कोई जवाब या आश्वासन नहीं आ रहा है. हमने इस बारे में NIT श्रीनगर के डायरेक्टर राकेश सहगल से बात करने की कोशिश की. उन्होंने मेसेज भेजकर कहा कि उनके पास क्लासेज़ दोबारा शुरू होने से जुड़ा कोई अपडेट नहीं है. वो नहीं जानते कि ऐसा कब हो सकेगा. राकेश सहगल ने हमें MHRD और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से बात करने को कहा. नीचे कुछ ट्वीट एम्बैड कर रहे हैं हम. NIT श्रीनगर हैशटैग से आ रहे ट्वीट्स में से हैं ये.

 

अदालत का रास्ता
NIT श्रीनगर के छात्रों ने Change.org पर भी एक पिटिशन डाली है. गृह मंत्रालय के नाम है ये. छात्रों की मांग है कि या तो NIT श्रीनगर कैंपस में ही क्लास शुरू हो. या फिर कहीं और क्लास लेने की अस्थायी व्यवस्था करवाई जाए. चूंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि इस तरह हालात की वजह से क्लासेज़ बंद हुई हों. सो इस मामले का कुछ स्थायी समाधान भी निकाला जाए. पिटिशन में लिखा गया है कि छात्रों को हर जगह से निराशा हाथ लगी है. NIT अथॉरिटीज़ और MHRD, सबसे रिजेक्शन मिल रहा है उन्हें. ऐसे में उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है. पिटिशन में बताया गया है कि जल्द ही इस बारे में पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे.

ये ऑनलाइन पीटिशन भी क्लासेज़ फिर से शुरू करने से जुड़ी है. याचिका में कहा गया है कि उन्हें HRD मंत्रालय और NIT अथॉरिटीज़, दोनों ने निराश किया है. ऐसे में छात्र अब अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे.
ये ऑनलाइन पीटिशन भी क्लासेज़ फिर से शुरू करने से जुड़ी है. याचिका में कहा गया है कि उन्हें HRD मंत्रालय और NIT अथॉरिटीज़, दोनों ने निराश किया है. ऐसे में छात्र अब अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे.

कोई तो तारीख़ बताई जाए. कोई तो डेडलाइन हो.
जिन छात्रों से बात हुई, वो काफी परेशान हैं. उनके मां-बाप परेशान हैं. पूरा परिवार परेशान हैं. समय बर्बाद न हो, ये सोचकर कई छात्र इंटर्नशिप कर रहे हैं. इलेक्ट्रिकल और कैमिकल इंजीनियरिंग के कई छात्र BHEL हरिद्वार गए इंटर्नशिप के लिए. कुछ ने शॉर्ट-टर्म कोर्सेज़ जॉइन कर लिए हैं. मगर वो जानते हैं कि ये सलूशन नहीं है. जुलाई 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसक प्रदर्शन हुए. तब भी करीब दो महीने के लिए NIT श्रीनगर में क्लासेज़ नहीं हुईं थीं. हालांकि तब कैंपस खाली नहीं कराया गया था. बाद में धड़ाधड़ ख़ूब सारी एक्सट्रा क्लासेज़ लेकर कोर्स सही समय पर ख़त्म करा दिया गया. मगर वो काफी अफ़रतफ़री की व्यवस्था थी. छात्र जल्द से जल्द कोई ठोस इंतज़ाम चाहते हैं. कह रहे हैं कि कम-से-कम एक तारीख़ तो बताई जाए. कोई समयसीमा तो तय हो.


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