Submit your post

Follow Us

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

28.46 K
शेयर्स

‘घणा अंगरेज़ ना बनै, के अंग्रेजी पादे है अडै. अरे ओ डट ज्या, ये अंग्रेजी के चोचले रहण दे तू.’

जब कभी बचपन में हमने हिंदी भी बोलने की कोशिश की तो ये मिला सुनने को. आप अंग्रेजी तो रहण ही द्यो. म्हारे तो मास्टर इंग्लिश की ग्रामर भी हरयाणवी में पढ़ाते थे. ये था प्राइवेट स्कूलों का सीन. सरकारी स्कूलों की हालत का तो थाम आग्डा ही लगा ल्यो.

ऐसे में जब कोई बालक हरयाणवी जोन से निकल कर डीयू जैसी यूनिवर्सिटी में आए तो घणा चुत्स्पा होता है उसके साथ. गाम आले बालकां का सामणा जब कान्वेंट स्कूल के स्टूडेंट्स सै हो. अर वोहे होया मेरे गेल्या.

जैसे ही मुंह खोलूं, कोए बात करण नै राजी नहीं. इतने तगड़े जजमेंटल लोग. आधे बावलीबूच तो अपणा सेंस ऑफ़ ह्यूमर नै घर मै घूंटी के बांध आवेंगे और बुझैंगे- ‘आप हरियाणा से हैं? आपका एक्सेंट वैसा सा ही है. हे-हे. आप बिहार से हैं? नहीं, नहीं. वो भोजपुरी वाली सी बात आ रही है ना, तो.’

जी नहीं. हम सारे पेरिस से आएं. लर्न्ट हरयाणवी एंड बिहारी. बिकॉज़ कूलनेस.

तो डीयू में ऐसे-ऐसे नमूनों से मुलाकात हुई मेरी. जिन्होंने सबसे पहला सेंटेंस यही बोला: ‘ओह आप हरियाणा से हैं?’ पहले-पहल तो मुझे लगा की शायद हरियाणा से लोग कम आते होंगे. खेतों मै और खेलों मै बीजी रहनिये, कित डीयू मै पढ़ण आवेंगे. पर थोड़े दिन बाद ये भ्रम भी दूर हो गया. देखा हरियाणा से तो भरा पड़ा है दिल्ली. टॉप कर रहे हैं डीयू में हरियाणा आले. जब रोहतक की ऋचा ने मेरी क्लास टॉप करी तो जी खुश हो गया.

पर उस टेम सोचण वाली बात थी कि लोगों को इतना सरप्राइजिंग क्यूं लागे है? कोई हरियाणवी में बोलता हुआ. पांच साल हो हैं गये दिल्ली में रहते हुए मुझे. और अभी तक लोगों ने पूछना बंद नहीं किया है की क्या मैं हरियाणा से हूं.

मेरे पीजी में मुझे हिसार की दो दीदियां मिली. लॉ कर रही थी डीयू से. खुद आपस में बात करती तो ‘ऐ बेबे-ऐ बेबे’ करतीं. कोई और पूछता तो बोलतीं- ‘हां हम हैं तो हरियाणा से, पर हरियाणवी नहीं आती. ज्योति को आती है. ज्योति सुनाइए एक बार’. मुझे एक चार साल के बच्चे जैसा लगता. जिसको अनजान आंटी के सामने बार-बार एबीसीडी सुनाने के लिए कहा जाए. ‘बेटा सन्डे-मंडे सुनाओ, थ्री की टेबल सुनाओ’.

Yes, like that!

इस बात से एक और घटना याद आ रही है. कमला नगर में किसी परचून की दुकान वाले ने मेरी बेज्ज़ती की. क्योंकि मैंने ‘हां’ की जगह ‘हम्बे’ बोल दिया था. हुआ यूं कि मैं मम्मी से बात कर रही थी और जैसे ही दुकान वाले ने कुछ पूछा तो मैंने हरियाणवी लहजे में ही जवाब दे दिया. उनके बेज्ज़ती के शब्द कुछ ऐसे से थे- ‘कहां पढ़ती हो? अच्छा बीए इंग्लिश? तुम हरियाणा से और इंग्लिश?’ और फिर हंसी छूट गयी उनकी.

मैं सामान लेकर चली तो आई उस दुकान से. पर उनकी हंसी, उन दीदियों के दोस्तों की हंसी. और पीजी के गार्ड की हंसी, सबने मेरा कॉन्फिडेंस जीरो कर दिया. इस तरह बुली होने से कॉन्फिडेंस तो गया ही. साथ ही एक इंट्रोवर्ट बन गयी थी मैं. एक दम खुल कर बेबाक बोलने वाली लड़की, क्लास में पीछे बैठने लगी थी. बोलना कम हो गया था. एक थिएटर ज्वाइन किया. पर कोई एक्ट नहीं कर पाई. बोलने से पहले दस बार सोचती.

कई दिन एक सवाल परेशान करता रहा. कि भाई ऐसी क्या बुराई है हरियाणवी बोलने में. लड़कियां क्यों बोलती हैं कि हम हैं तो हरियाणा से पर बोलते नहीं.

जब एमए में एडमिशन लिया तो कई टाइप के लोग मिले. मेरे खुद के डिपार्टमेंट में. लॉ फैकल्टी में भी. हरियाणवी बोलने वाले. हरियाणवी सुनने वाले. पर कुछ-कुछ ऐसे भी मिले जो लड़कियों को देख कर एक सेकेंड में एक्सेंट चेंज कर लेते. पूछने पर पता चला कि वो लड़कियों के सामने इसलिए नहीं बोलते क्योंकि लड़कियां पटती नहीं. एक लड़के दोस्त ने बताया कि लड़कियों को ये भाषा कूल नहीं लगती. इसलिए नहीं बोलते वो. कुछेक लड़कियों से भी जानने की कोशिश करी. दो-चार ने बताया कि थोड़ा गंवार सा लगता है. पढ़े-लिखे नहीं लगते. यू नो, सोफिस्टकेशन एंड आल दैट. लठ मार बोली है. सुनने में अच्छी नहीं है.

यूनिवर्सिटी में आकर हर चीज के बारे में सवाल पूछना सीख लिया था मैंने. एक दिन लिंगविस्टिक के प्रोफेसर से पूछ लिया- ‘सर किसी भी भाषा को दूसरी से बेहतर मानने के लिए क्या पैमाने तय किए गए हैं?’ सर ने जवाब दिया- ‘कोई पैमाना नहीं है. नो लैंग्वेज इज इन्फीरियर ऑर सुपीरियर.’

हमारे यहां इंग्लिश के बंगाली प्रोफेसरों का एक्सेंट बंगाली है. डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का एक्सेंट साउथ इंडियन था. दिलजीत दोसांझ पंजाबी में बोलते हैं. क्या इन बड़े लोगों का टैलेंट कम हो गया इनके डिफरेंट एक्सेंट से? नहीं ना. तो मैं क्यों हरियाणवी एक्सेंट में शेक्सपियर, फ्रायड या काफ्का नहीं पढ़ सकती? बस ये ही छोटी सी बात समझनी थी. और मेरे समझ आ गई.

आज मैं खुल अपनी एक्सेंट में बोलती हूं. अपनी राय रखती हूं. क्योंकि मुझे अब पता चल गया है कि भोजपुरी, राजस्थानी या हरियाणवी बोलने से इंसान गंवार नहीं हो जाता. अंग्रेजी बोल लेने से इंटेलेक्चुअल नही हो जाता. और अच्छी हिंदी बोल लेने से कोई कवि नहीं कहलाता.

ये पोस्ट दूर-दराज गांव से आए स्टूडेंट्स जो डीयू या दूसरी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं उनके लिए है. आप अपनी गांव की बोली बोलें. गुजराती हो या मारवाड़ी. हरयाणवी बोलें, अवधी या भोजपुरी. पर बोलें जरूर. चुप ना रहें. इस वजह से क्लास में पीछे न बैठें.


ये पोस्ट दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही ज्योति ने लिखी थी.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
why are you ashamed of your mother tongue

आरामकुर्सी

महामहिम: प्रधानमंत्री इस डांसर को राष्ट्रपति क्यों बनाना चाहते थे?

लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे नीलम संजीव रेड्डी के पास कांग्रेस की तरफ से एक पर्ची आई. कुछ देर बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

महामहिम: वो राष्ट्रपति, जिसके बाथरूम का कार्टून बदनामी की वजह बना

सबसे कमजोर राष्ट्रपति कहे जाते थे फखरुद्दीन अली अहमद

कहानी शहाबुद्दीन की, जिसने दो भाइयों को तेजाब से नहला दिया था और अब उम्रभर जेल में रहेगा

वो सांसद जो अपने जिले से ही किया गया था तड़ीपार.

पहला भारतीय नेता, जिसने सदन से वॉक आउट किया था

गोपाल कृष्ण गोखले. गांधी और जिन्ना, दोनों के राजनीतिक गुरु.

देश के सबसे बेबस राष्ट्रपति का किस्सा

जिन्होंने दो दफा इस्तीफा देना चाहा, जिन्हें महाभियोग की धमकी भी झेलनी पड़ी.

बॉलीवुड का सबसे विख्यात और 'कुख्यात' म्यूजिक मैन, जिसे मार डाला गया

जिनकी हत्या की इल्ज़ाम में एक बड़ा संगीतकार हमेशा के लिए भारत छोड़ने पर मजबूर हुआ.

नरगिस और सुनील दत्त की लव स्टोरी जो आज के लवर्स के बहुत काम की है

नरगिस की बरसी पर इन एक्टर्स की कहानी जिनसे सीख सकते हैं कि प्यार में बात कैसे बनाई जाती है.

वो राष्ट्रपति जिनकी जीत का ऐलान जामा मस्जिद से हुआ था

राजनीति से संन्यास ले चुके जेपी का एक बयान 22 अप्रैल को अख़बारों में छपा. इस नाजुक घड़ी में जेपी इंदिरा के पक्ष में खड़े थे.

जब मजदूरों के एक नेता ने इंदिरा गांधी की सरकार की चूलें हिला दीं

आज मजदूर दिवस है.

IIT बॉम्बे छोड़ने वाले मुकेश अंबानी के वो किस्से, जो कम लोगों को पता हैं

आज मुकेश का जन्मदिन है.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.