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मन्नारगुडी की माफिया शशिकला जेल में और अब उनका भतीजा भी गिरफ्तार

जयललिता की मौत के बाद शशिकला नटराजन ने टी टी वी दिनाकरन को AIMDK का उप महासचिव बनाया था. लेकिन टी.टी.वी. दिनकरन को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दिनाकरन पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने पार्टी के जब्त किए गए दो पत्तियों वाले चुनाव चिह्न को हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के अफसरों को 50 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की. दिनकरन के एक साथी मल्लिकार्जुन को भी गिरफ्तार किया है.

दिनकरन
दिनकरन

चुनाव आयोग ने शशिकला और ओ पन्नीरसेल्वम धड़े में विवाद के कारण AIADMK का चुनाव चिह्न जब्त कर लिया था. शशिकला पहले से जेल में हैं. दिनाकरन जेल में बंद एआईएडीएमके चीफ वी. के. शशिकला का भतीजा है. शशिकला, ओ पनीरसेल्वम को सीएम पद से हटा कर खुद सीएम बनने की तैयारी में थीं. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. फिर उनके बाद दिनकरन पार्टी की कमान संभाल रहे थे. मगर अब वो भी गिरफ्तार हो गए. कैसे शशिकला ने AIADMK  पर कब्ज़ा किया, जो आज उनकी राजनीति जेल के इर्द गिर्द सिमट गई.


जयललिता के जाने के बाद से ही एक मुट्ठी की तरह बंद उनकी पार्टी एआईडीएमके में जंग छिड़ गई थी. दो लोग जिन्होंने कसमें खाई थीं कि हम कभी पार्टी पद नहीं लेंगे, मुख्यमंत्री पद के लिए भिड़ गए थे. पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु में पॉलिटिकल ड्रामा चल रहा था. पर इसमें एक पेच था. ट्रायल कोर्ट से जयललिता की करीबी शशिकला को अाय से अधिक संपत्ति के एक मामले में 4 साल की सज़ा सुनाई गई थी. अभी-अभी सुप्रीम कोर्ट से फैसला आया है कि लोअर कोर्ट का फैसला सही था. मतलब शशिकला अब चार साल जेल में काटेंगी और 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी. मतलब पनीरसेल्वम ने उनको पटखनी दे दी है.

इससे पहले ये लगभग तय हो गया था कि शशिकला ओ पनीरसेल्वम को हटाकर मुख्यमंत्री बनेंगी. एक मीटिंग में पनीरसेल्वम ने खुद ही शशिकला का नाम प्रस्तावित किया था और खुद रिजाइन करने का फैसला लिया. पर शशिकला ने एक दिन उनको पार्टी के हर पद से हटा दिया. इसके बाद पनीरसेल्वम भी दांव-पेच लगाने लगे थे.

दो महीने पहले जयललिता की मौत के वक्त, 30 साल बाद एक स्टोरी दुहराई जा रही थी तमिलनाडु में. 30 साल पहले MGR की मौत हुई थी और उनकी पत्नी जानकी समेत उनके बच्चे घेरे हुए थे उनकी बॉडी को. तख्त पर चढ़ने का प्रयास कर रही थीं जयललिता. उनको धक्के दिए जा रहे थे. सिर पर मार दिया गया था. पर वो हिल नहीं रही थीं वहां से.

Jaya funeral sasikala

जयललिता की डेड बॉडी के पास भी वही हो रहा था. सीन वही था तेवर बदला हुआ थे. बॉडी को घेरे हुए थी एक औरत और उसका परिवार. क्योंकि जयललिता ने अपने परिवार से ज्यादा ताल्लुक नहीं रखा है. दत्तक बेटे से कब के रिश्ते खत्म हो गए. भाई से था नहीं. तो मार करने वाला कोई था नहीं अभी. इस औरत को कोई रोकने वाला नहीं था. यही थीं शशिकला नटराजन. अगर जयललिता को अम्मा कहा जाता था, तो शशि को चिनम्मा यानी मौसी.

jaya funeral sasikala

2011 में एक खबर आई जिसने सबको चौंका दिया. ये ऐसी ही खबर थी कि पता चले अचानक कि नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को पार्टी से बाहर कर दिया. या उस वक्त पता चलता कि गांधी ने नेहरु को निकाल दिया. या सोनिया ने राहुल को. जयललिता ने शशिकला को पार्टी से निकाल दिया था. उनके घर में शशिकला का परिवार रहता था. उनको भी. एक मिनट के अंदर. सबको पता था कि एक से दो मिनट होगा तो क्या होगा. सबको याद था कि कैसे करुणानिधि को पुलिस घसीटते हुए लाई थी. चप्पल भी नहीं पहनने दिया था. 1996 में करुणानिधि ने छापा मरवाया था जयललिता के घरों में. करोड़ों रुपये बरामद हुए. जया को जेल जाना पड़ा. शानदार पोएस गार्डन बंगले से चूहों से भरी कोठरी में. शशिकला को भी जाना पड़ा था. जया ने याद रखा था करुणानिधि की इस बात को.

पर शशिकला को निकालने का दर्द जयललिता के चेहरे पर भी देखा जा सकता था. गुस्सा था. नफरत थी. पर एक टूटा हुआ दिल भी था. एक साल बाद शशिकला की वापसी हुई. पार्टी में और दिल में भी. शर्तें रखी गई थीं कि शशिकला अपने परिवार से नाता नहीं रखेंगी और किसी राजनीतिक पद के लिए कोई कोशिश नहीं करेंगी. आज सबको पता है कि मुख्यमंत्री कोई भी बने, सरकार शशिकला ही चलाएंगी.

कौन है शशिकला नटराजन? कौन है ये जिसका दांव जयललिता पर भी भारी पड़ता है जबकि जया को चागड़ पॉलिटिशियन माना जाता था.

सत्तर-अस्सी के दशक में शशिकला एक हाउसवाइफ हुआ करती थीं. पति स्टेट गवर्नमेंट में टेंपररी जॉब कर रहे थे. जिलाधीश चंद्रलेखा के साथ. चंद्रलेखा की तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MGR से बहुत बनती थी. वो उस वक्त जयललिता को आगे बढ़ा रहे थे. शशिकला घर में बैठे बोर होती रहती थीं. पर पति की सोहबत में एक काम ढूंढ लिया था. जयललिता जहां-जहां जाती, उसके वीडियो बनाते रहती थीं.

इसके लिए मदद ली थी चंद्रलेखा की. उनके बेटे की देखभाल करतीं. एक बार वादा लिया कि जयललिता से मिला दीजिए. मिलीं और फिर दोनों में वो दोस्ती बनी कि पूछिए मत. इन्हीं चंद्रलेखा के ऊपर कुछ लोगों ने बाद में एसिड फेंका था जिससे उनका चेहरा जल गया था. कहते हैं कि चंद्रलेखा जयललिता के कई फैसलों का विरोध कर रही थीं. आरोप जया की पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लगा था.

1987 में MGR की मौत के बाद जयललिता अकेले पड़ गई थीं. जानकी के सपोर्टर उनको परेशान करते. घर का राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था. संभालने वाला कोई नहीं था. शशिकला के अलावा. शशि का परिवार भी चौबीसों घंटे जयललिता की चाक-चौबंद सेवा में लगा रहता. विधानसभा की लड़ाई को जयललिता ने द्रौपदी चीरहरण के रूप में प्रस्तुत किया. जानकी मुख्यमंत्री के अपने पद को संभाल नहीं पाई. और 1991 में कांग्रेस के सपोर्ट से जयललिता मुख्यमंत्री बन गईं. मुख्यमंत्री की कलम बन गईं शशिकला. अफसरों को ऑर्डर वही देतीं. सुब्रमनियम स्वामी ने शशिकला को मन्नारगुडी का माफिया कहा था.

शशिकला मन्नारगुडी से ही आती हैं. जब 1989 में जयललिता के साथ रहने आईं तो वहीं से कुक, सिक्यूरिटी, ड्राइवर, माली सब मिलाकर 50 लोग लाई थीं. जयललिता का हर काम देखती थीं. उनका फिल्म स्टार के साथ रहने का सपना पूरा हुआ था.

पर ये सपना बढ़ते गया. शशिकला और उनके परिवार के लोगों ने पैसा बनाना शुरू कर दिया. इतना कि 1996 के चुनाव में पार्टी की इमेज इतनी खराब हो गई कि हार गई. पर 1998 में भाजपा का साथ पकड़ लिया और केंद्र की राजनीति में कदम रख दिया पार्टी ने. उसी वक्त शशिकला से प्रमोद महाजन की तल्खी हो गई. क्योंकि शशिकला के पैसों को लेकर हमेशा बात होती थी. प्रमोद इसे पचा नहीं पा रहे थे. इतने आरोप कैसे पचेंगे. शशिकला ने सोनिया की तरफ रुख कर दिया.

फिर हुई एक चाय पार्टी. इस पार्टी को भारतीय राजनीति में उस साधना की तरह लिया जाता है जिसके पूरा होने पर वो ब्रह्मास्त्र निकला जिसने वाजपेयी की सरकार को एक वोट से गिराया था. 1999 के विश्वास मत प्रस्ताव में जयललिता ने अपना समर्थन खींच लिया. ये चाय पार्टी ऑर्गेनाइज की थी सुब्रमनियम स्वामी ने. क्योंकि वाजपेयी ने उनको कैबिनेट में जगह नहीं दी थी. इस पार्टी में जया, सोनिया, स्वामी और शशिकला मौजूद थे.

jaya swamy sonia

फिर जया मुख्यमंत्री बनीं. हटीं. फिर बनीं. शशिकला बनी रहीं. 2010-11 के आस-पास अफवाहें उड़ी थीं-

कि जयललिता को धीमा जहर दिया जा रहा है. मन्नारगुडी माफिया सत्ता पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है. कहते हैं कि जयललिता अस्पताल गईं बिना शशिकला को बताये. और पता चला कि वाकई में कुछ तो दिया जा रहा था.

ये भी कहते हैं कि जयललिता के अच्छे दोस्त नरेंद्र मोदी ने भी जया को अलर्ट किया था कि शशिकला के चलते व्यापारी तमिलनाडु छोड़ रहे हैं. और ये शुभ संकेत नहीं है.

अफवाहें तो अफवाहें हैं. जो भी हुआ हो, 2011 में जया ने शशि को बाहर कर दिया. फिर पर कतर के वापस लाया पार्टी में.

शशिकला के भाई धिवहरन को बॉस कहा जाता है. कहते हैं कि शशिकला का पूरा परिवार तमिलनाडु के हर पार्ट को अलग-अलग कंट्रोल करता है. धिवहरन का रुतबा सबमें बड़ा है. कहने को ये एक कॉलेज चलाते हैं सेंगामला थैय्यार एजुकेशनल ट्रस्ट वीमेंस कॉलेज. पर तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक का राजनीतिक कारोबार संभालते हैं परिवार का. शशिकला के परिवार के चौदह लोग शामिल हैं तमिलनाडु की राजनीति में. 2014 में जब हाई कोर्ट ने जयललिता को जेल में भेजने का फैसला सुनाया तब शशिकला को भी सुनाया गया था. सौ करोड़ का जुर्माना जया पर और दस करोड़ का शशिकला पर ठोंका गया था.

mannargudi dhivaharan
धिवहरन

 


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