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नरेंद्रस मोदुस को पीएम बनाने वाला नास्त्रेदमस सबसे बड़ा फ्रॉड था

अभी हाल में ही ऑनलाइन जिक्र हो रहा था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी भी नास्त्रेदमस ने बहुत पहले ही कर दी थी. कौन था ये बंदा जो सबके बारे में बताता रहता था? क्या ये संभव था?

कौन सी ऐसी किताब है, जो दुनिया में हमेशा बिकती है और हर जगह बिकती है?
इस किताब का लेखक दुनिया के सबसे फेमस लोगों में से एक है.
इस आदमी का नाम सुन के इतना ज्यादा आश्चर्य होता है कि हमें इंसानी जीवन अच्छा लगने लगता है.

नास्त्रेदमस नाम है इस आदमी का. इनकी लिखी किताब द प्रॉफेसीज हर साल हर महीने तहलका मचाए रहती है. लोग ऐसा मानते हैं कि इनकी लिखी हुई चार-चार लाइनों की कविताओं में दुनिया की सारी बड़ी घटनाओं की भविष्यवाणी छुपी हुई है. मानने वालों के लिए नेपोलियन और फ्रांस की क्रांति से लेकर, कैनेडी की हत्या और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला सबकी भविष्यवाणी की गई है इनकी किताब में. इंडिया में भी इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी के राइज को लेकर लोग भविष्यवाणियां निकाल लेते हैं इनकी किताब से.

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नास्त्रेदमस की किताब

पर क्या ये सच है? क्या किसी इंसान के लिए ये संभव है कि वो अपने जीवन में ही भविष्य की सारी बातें लिख के चला जाए? वो सारी बड़ी बातें जो दुनिया के कई देशों में होंगी. वो देश जो उसके वक्त पर थे ही नहीं!

नास्त्रेदमस को प्रॉफेट माना जाता है. भगवान का भेजा हुआ दूत. क्या ये सच है या फिर वो फ्रॉड थे?

माइकेल डी नाटरडम या फिर नास्ट्रेडम का जन्म 1503 में फ्रांस में हुआ था. इनका परिवार यहूदी था. बाद में कैथलिक धर्म अपना लिया. ये वो वक्त था, जब यूरोप में पुनर्जागरण हो रहा था. साइंस सामने आ रहा था. गैलीलियो, कोपरनिकस, कोलंबस, लियानार्डो दा विंची सारे लोग उसी सदी में काम कर रहे थे. ये बड़ी ही बेचैनी का समय था. परंपराएं टूट रही थीं और नई चीजों की व्याख्या हो रही थी. लोगों में नई चीजों को लेकर गुस्सा था और गैलीलियो कोपरनिकस जैसे लोग जिंदा जला दिए गए थे.

नास्त्रेदमस के परिवार में पढ़े-लिखे लोग थे. व्यापारी थे. धनी थे ये लोग. नास्त्रेदमस ने भी खूब पढ़ा. 14 की उम्र में वो घर छोड़कर मेडिसिन की पढ़ाई करने चले गए. और फिर फिजिशियन बन गए. फ्रांस में ब्यूबोनिक प्लेग फैला था. इसमें उन्होंने बहुत ही सफाई से, साधारण तरीके से बेहतर इलाज किया. बुरी तरह बीमार लोग इनके इलाज से ठीक हो जाते. और उसी वक्त ये प्रसिद्ध हो गए. इनको बाबा कहा जाने लगा. फ्रेंच भाषा में.

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नास्त्रेदमस

इसके बाद नास्त्रेदमस की शादी एक धनी परिवार में हो गई और ये एक बड़े डॉक्टर की तरह रहने लगे. पर प्लेग वापस लौटा. इनकी बीवी और बच्चों को ले के गया. और इनकी बाबागिरी पर प्रश्नचिह्न उठे. ये कैसा प्रॉफेट, जो अपने बीवी-बच्चों को नहीं बचा सका! इसी दौरान नास्त्रेदमस ने धर्म के खिलाफ कुछ बोल दिया, जिसकी वजह से लोग और खिलाफ हो गए. नास्त्रेदमस को वहां से भागना पड़ा. यूरोप घूमते रहे. लंबे वक्त के बाद 1544 में ये फ्रांस वापस लौटे. फिर से डॉक्टरी शुरू कर दी. शादी की और बच्चे भी पैदा किए.

इस बार नास्त्रेदमस ने एक नया काम भी शुरू किया. ज्योतिष और काला जादू टाइप की चीजें भी करने लगे. घंटों बैठे रहते रात में. कटोरे में पानी लेकर. खूब साधना करते. और एक किताब लिखनी शुरू कर दी. द प्रॉफेसिज. उनकी सबसे फेमस किताब. इससे पहले भी रेसिपी और डॉक्टरी पर लिख चुके थे. वो किताबें भी फेमस हुई थीं. पर उनका विषय वो नहीं था कि सैकड़ों साल बाद भी किसी को याद दिला सके.

द प्रॉफेसिज में लिखा हुआ है:
रात को अकेले बैठे रहते थे. पीतल के ट्रायपॉड पर कटोरे में पानी रखा रहता था. खालीपन से एक रोशनी की किरण निकलती. पानी को वो अपने कपड़े पर छिड़कते और खुद से बोलते रहते. उनके शरीर से आवाज निकलती. वो हिलते रहते. भगवान उनके पास बैठा रहता.

ये चीज तो हम अपने गांव-गिरांव के बाबा-बूबी लोगों के साथ भी देख चुके हैं. वो तो इनसे ज्यादा तांडव करते हैं. मेरे गांव के रमेसर तो गर्म दूध अपनी देह पर डाल लेते. इतना चिल्लाते थे कि सुनने वालों को कई दिनों तक किसी से बात करने का मन नहीं करता था. बस, ये है कि रमेसर ने किताब नहीं लिखी थी. शायद लिख भी देते, अगर लिखना आता.

खैर, नास्त्रेदमस के मुताबिक उनको रात में कई चीजें पता चलती थीं. जब वो होश में आते, तो सारी चीजें नोट कर लेते. 1550 में उन्होंने सालाना भविष्यवाणी देनी शुरू की. ये तो वो अपनी मौत तक देते रहे. यहां से वो फेमस होने लगे. धनी लोग उनको बुलाने लगे अपने बारे में पूछने के लिए. 1555 में नास्त्रेदमस ने 4-4 लाइनों की कविताएं लिखनी शुरू कर दीं. ये कविताएं कम, पहेली ज्यादा थीं. यही पहेलियां आज भी सुलझाई जाती हैं. इन्हीं में सारे रहस्य छुपे हैं, मानने वालों के मुताबिक. ये पहेलियां लैटिन, फ्रेंच, ग्रीक, इटैलियन और कई और भाषाओं के शब्दों को मिलाकर लिखी गई थीं. ये जल्दी समझ नहीं आतीं.

इनकी खासियत ये है कि घटना हो जाती है, उसके बाद पता चलता है कि किस पहेली में क्या कहा गया था.

और इसके बाद नास्त्रेदमस को फ्रांस की रानी कैथरीन ने बुला लिया. नास्त्रेदमस उनके और उनके बच्चों की कुंडलियां तैयार करने लगे. वहीं रहने लगे वो. नास्त्रेदमस की मौत 1566 में हो गई. कहा जाता है कि मरने के एक दिन पहले उन्होंने बता दिया था कि कल मैं मर जाऊंगा.

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फ्रांसीसी क्रांति

असली खेल शुरू हुआ नास्त्रेदमस के मरने के बाद

फ्रांस के राजा हेनरी सप्तम मरे और लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि नास्त्रेदमस ने पहले ही बता दिया था. ये ऐसी बात थी जो सबका ध्यान खींचती है. साइंस पढ़ें या जादू, कौन नहीं जानना चाहता भविष्य के बारे में. साइंस पढ़ के भी तो सारे लोग टाइम मशीन ही बनाना चाहते हैं.

नास्त्रेदमस की खूबी ये थी कि उनकी बात किसी को समझ नहीं आती थी. पर लगता था कि कुछ खतरनाक कहा गया है. सारे लोग इनको प्रॉफेट नहीं मानते थे. कुछ लोगों ने तो उसी वक्त इनको फ्रॉड कहना शुरू कर दिया था. पर इनकी बातें तूफान, भूकंप, प्लेग, लड़ाइयां, बाढ़, आक्रमण, कत्ल, सूखा इन्हीं चीजों से जुड़ी रहती थीं. उस वक्त इन चीजों को जानने और समझने का उपाय नहीं था. लड़ाइयां आए दिन होते रहती थीं. तो इनकी बातें लगातार चर्चा में बनी रहीं. ये दौर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध तक जारी रहा. इसके बाद साइंस आ गया. लोग चांद पर पहुंच गए. पर तुरंत नास्त्रेदमस की किताब से निकाल लिया गया कि इसके बारे में भी लिखा गया है उसमें.

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वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला

पर इक्कीसवीं शताब्दी में नास्त्रेदमस पर खूब चर्चा हुई है. इतने रिसोर्स आ गए लोगों के पास कि खोजना और बातें करना आसान हो गया. हर भाषा का ट्रांसलेशन सेकंडों में हो जाता है. हर बात को तर्क की कसौटी पर कसना आसान हो गया है. तो इसमें पाया गया कि नास्त्रेदमस के काम में किसी जगह या किसी तारीख का जिक्र नहीं है. बस हर जगह के बारे में नदी, पहाड़ और बिजली गिरने जैसी बातों का उल्लेख है. एक आदमी का आविर्भाव होता है, जो हर बाधा को पार कर देता है. ये सारी चीजें कहानियों में भी होती हैं. अगर आप पुराने जमाने की कहानियों को नाम पता हटाकर पढ़ें तो लगेगा कि आज की कहानी है. अगर महाभारत की कहानियों को ही नाम पता हटाकर पढ़ें तो लगेगा कि आज के नेताओं के बारे में कहा गया है. कहानियों की खूबसूरती यही होती है कि समय जगह के परे वो अपनी मौजूदगी का एहसास करा देती हैं. यही चीज नास्त्रेदमस के साथ हुई.

नास्त्रेदमस के मरने के बाद उनकी किताब पड़ी रही. 1594 में फ्रॉड कहे जाने वाले सैविग्नी ने नास्त्रेदमस की कुछ भविष्यवाणियों के शब्द बदल दिए और अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने लगा. वो उनके साथ पहले भी काम कर चुका था. उसके बाद कई और लोग आ गए जिन्होंने यही काम किया. धीरे-धीरे नास्त्रेदमस की बातें बदल दी गईं. सारी बातें उसी हिसाब से बदली गईं ताकि इसको भविष्यवाणी कहा जा सके. नास्त्रेदमस की किताब किसी धार्मिक किताब की ही तरह है. जैसे आप कुरान, गीता या बाइबिल की कहानियां पढ़ते हैं, उसी तरह नास्त्रेदमस की भी पढ़ सकते हैं. पर नास्त्रेदमस में चालाकी ये है कि इसमें किसी भगवान का जिक्र नहीं है. इसलिए ये भविष्यवाणी लगती है.

प्रोफेसर रैंडी ने नास्त्रेदमस के मानने वालों को बहुत दुख दिया है

लोग भविष्यवाणी का आधार तो रामचरितमानस को भी बना लेते हैं. तुलसीदास के कई दोहे भविष्यवाणी की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं. नास्त्रेदमस की किताब पर जेम्स रैंडी नाम के राइटर ने बहुत रिसर्च की. उन्होंने ‘द मास्क ऑफ नास्त्रेदमस’ नाम की किताब भी लिखी. इसमें जितना संभव हो सकता है, उतनी रिसर्च की गई है. जेम्स ने बहुत सावधानी से राजनीति, इकॉनमी और इतिहास को ध्यान में रखते हुए नास्त्रेदमस के राइज की कहानी लिखी है. साथ ही नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों की भी चीर-फाड़ की है. इसमें वो उदाहरणों का भी इस्तेमाल करते हैं. नास्त्रेदमस की सबसे बड़ी भविष्यवाणियों में से एक हिटलर की भविष्यवाणी का जिक्र किया है उन्होंने. नास्त्रेदमस ने लिखा है-

Bestes farouches de faim fleuues tranner,
Plus part du champ encontre Hister sera.
En caige de fer le grand fera treisner,
Quand rien enfant de Germain obseruera.

भूख से पागल जानवर नदियां पार करेंगे. ज्यादातर सैनिक लोवर डैन्यूब के खिलाफ रहेंगे. सबसे बड़ा आदमी एक लोहे के पिंजड़े में कैद किया जाएगा और छोटा भाई कुछ नहीं देखेगा.

नास्त्रेदमस के लिखे में हिस्टर आता है. लोगों ने इसको हिटलर बना लिया. जबकि उनके टाइम में रोमन मैप बने थे. इन मैप में डैन्यूब नदी के निचले हिस्से को हिस्टर कहा जाता था. अगर इसको हिटलर मान भी लिया जाए तो लोहे के पिंजड़े में कैद बड़ा आदमी कौन था? ये नहीं पता.

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हिटलर

हालांकि चौपाई पढ़ के ये जरूर लग रहा है कि कुछ बुरा होने वाला है. लेकिन ऐसे डायलॉग तो हिंदी भुतहा फिल्मों के फकीर भी बोलते हैं. रानी का जन्म होगा, वो फिर आएगी, वो बदला लेगी. आसमान काला होगा, जमीन फट जाएगी टाइप का.

En Van bien proche non esloigné de Venus,
Les deux plus grans de VAsie &
d ’Afjrique De Ryn & Hister qu’on dirá sont venus,
Crys, pleurs á Malte & costé ligustique.

बहुत नजदीक ही वो समय है वीनस से बहुत दूर नहीं है. एशिया और अफ्रीका के दो बड़े लोग, राइन और डैन्यूब नदी के किनारे के, आएंगे. माल्टा और लिगुआरिया में लोग रोएंगे, आंसू गिरेंगे.

अब इसका अर्थ ये लिया गया कि ये द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में लिखा गया है. मुसोलिनी और जापान के बारे में लिखा गया है. तभी अफ्रीका और एशिया का जिक्र किया गया है. फिर जर्मनी और इटली को भी इससे जोड़ दिया गया. क्योंकि वीनस लिखा है और वेनिस इटली का मशहूर शहर है.

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द्वितीय विश्व युद्ध की तस्वीर

इसी किताब में सैविग्नी की दी हुई नास्त्रेदमस की उन भविष्यवाणियों का जिक्र है जो कभी सही साबित नहीं हुईं. क्योंकि ये बड़े ही डायरेक्ट तरीके से कही गई हैं. नाम और जगह लेकर. कहा गया है –

# लड़ाई के बाद पेरिस हेनरी चौथे के हाथ में आ जाएगा. (ये शहर उसी समय इसके हाथ में आ गया था जब सैविग्नी ने नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को लोगों के सामने रखा.)
# पेरिस का लगभग हर आदमी मर जाएगा. (ऐसा नहीं हुआ.)
# हेनरी का शत्रु वनवास को जाएगा. ( ऐसा नहीं हुआ, वो बहुत शानो-शौकत में रहा.)
# हेनरी टर्की और इटली को जीतेंगे. (ये पढ़ के हेनरी शर्मिंदा हो जाएंगे.)
# टर्की देश खुद को क्रिश्चियनटी में कन्वर्ट कर लेगा. (आज भी टर्की में इस्लाम है.)
# हेनरी दुनिया के शहंशाह बनेंगे. (अच्छा?)

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नागासाकी पर परमाणु हमला

1682 में फ्रांस के एक इतिहासकार ने नास्त्रेदमस की मौत के साल 1566 के बारे में कुछ यूं लिखा था:

इस साल वो झूठा मरा है जो पूरी दुनिया में फेमस है. माइकल नास्त्रेदमस. जिसने डींग मारी थी कि वो सब जानता है और भविष्य की सारी बातें बता देगा. जिसके नाम पर बहुत सारे लोगों ने अपनी कल्पनाएं जोड़ दी हैं उसकी बातों में…

अगर आपको नास्त्रेदमस जैसी भविष्यवाणी करनी है तो इस लिंक पर जा सकते हैं. ये लोग नास्त्रेदमस के ही अंदाज में खूब चौपाइयां लिखते हैं. हर बार नई चौपाई जेनरेट हो जाती है. ये रहा लिंक- नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी आप भी करें.

पर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि नास्त्रेदमस अभी तक तो अमर हैं. इतिहास में ऐसे लोगों का रहना जरूरी होता है, जिंदगी में रोचकता बनाए रखने के लिए. सही या गलत, सबका ध्यान तो इनकी तरफ रहता ही है. ऐसे लोग हमारी फैंटेसी में आग लगाते हैं. हमें ये अच्छा लगता है.

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