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वीरेंद्र सहवाग और रणदीप हुड्डा हमारे हीरो थे, अब ट्विटर पर गुंडों के साथ खड़े हो गए

हमको विशेषज्ञों की जरूरत कब पड़ती है? जब हमें अपना कोई काम परफेक्ट ढंग से, एकदम फाइन कट वाला कराना हो. वैसे एक्सपर्ट्स बहुत कम होते हैं. उनकी खासियत होती है कि वो जिस चीज के एक्सपर्ट होते हैं, उसको इतना ज्यादा वक्त दे देते हैं कि और चीजें दब जाती हैं. मसलन हमें आंख का ऑपरेशन कराना हो तो हम ऐसे डॉक्टर के पास जाएंगे जिसने जिंदगी भर आंखों पर ही काम किया हो. वैसे ही आज अगर कोई फिल्ममेकर चैलेंजिंग एक्ट वाली फिल्म बनाता है तो उंगली में गिनने वाले एक्टर हैं. ‘टॉप के’ एक्टर्स में निकलेंगे रणदीप हुड्डा.

वैसे ही क्रिकेट में हमारा एक दौर था जब सचिन और सहवाग ओपनिंग के लिए उतरते थे. लगता था जीत तो पक्की है. बाकी खिलाड़ियों को वापस भेज दो. क्रिकेट के भगवान और उनके कलेजे का टुकड़ा खेल रहा है तो क्या दिक्कत. कहने का मतलब कि क्रिकेट में सहवाग और फिल्मों में रणदीप अपनी तरह के अनोखे लोग हैं. लेकिन इन्होंने ट्विटर पर हाथ आजमाने की सोची. ह्यूमर और देशप्रेम के साथ कब ट्रोलर्स की टोली में जाकर बैठ गए, पता ही नहीं चला. इनके ह्यूमर का हाहाकारी नमूना इन ट्वीट्स में देखने को मिला. फिर लगा कि नहीं, ये अपनी एक्सपर्टीज़ से काफी आगे निकल गए, काफी ऊपर. अब इनको नीचे झांकने की जरूरत है.

वीरेंद्र सहवाग का ट्वीट. जिसमें उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट गुरमेहर के ट्वीट पर अपने फोटोशॉप का रंग चढ़ाया. गुरमेहर कौन हैं, ये अब तो बताने की जरूरत नहीं होगी. अगर होगी भी तो आगे, तफ्सील से बात करेंगे. पहले ट्वीट देख लो.

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फिर रणदीप हुड्डा का हंस हंस के पागल हो जाने वाला ट्वीट.

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उसके बाद जब लोगों ने रणदीप और सहवाग को निशाने पर लिया इस बात के लिए कि वो हिंसा फैलाने वालों का साथ क्यों दे रहे हैं? तो फिर उनका ट्वीट आया. जिसमें उन्होंने लिखा कि “कैसे DU में हुई हिंसा गुरमेहर के नफरत छोड़ने की अपील से जुड़ी है और कैसे वीरेंद्र सहवाग का मजाकिया जवाब हिंसा का समर्थन हो जाता है?”

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पहले तो रणदीप जी आप अगला रीट्वीट देखिए. आपका जवाब उसमें ही मिल जाएगा. ये अहिंसा के पुजारी गांधी जी के चेले के ट्विटर एकाउंट से दूसरे अहिंसा के पुजारी का वीडियो आपने जो रीट्वीट किया है, उसी को हिंसा कहते हैं. लिंक पर क्लिक करके वीडियो देखें.

खैर, अब बात गुरमेहर की. “कारगिल शहीद की बेटी को गालियां और गैंगरेप की धमकी” हमने इस पर एक स्टोरी की थी. जो लोग अब से पहले फौजी, शहीद और देशभक्ति जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके देश के गंभीर मसलों को दबाने की कोशिश करते हैं, एेसे ही लोगों ने गुरमेहर को गालियां दीं, उसे गद्दार कहा, एक कमेंट में तो उसका गैंगरेप करने तक की धमकी दी गई. जब “शहीद की बेटी” के रेफरेंस से उन्हीं के आर्गुमेंट को समझाया तो लोग बिलबिला गए. अपने लॉजिक से हर शहीद के परिवार की चिंता करते हैं, फिर अपने ही लॉजिक से उसके परिवार के लोगों को गंदी गालियां देते हैं, धमकाते हैं. शहीद का इस्तेमाल करने का ठेका तो उन्हीं के पास है, किसी और को क्या हक है शहीद के नाम पर आजादी मांगने का.

यहां नोट कर लें, वो विरोध प्रदर्शन करने की आजादी मांग रहें हैं, बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी मांग रहे हैं. प्रोटेस्ट का मतलब समझते हैं न? जिन लाला लाजपतराय का नाम लेते ही वो इमोशनल हो जाते हैं, उन्होंने जो किया था साइमन कमीशन को भगाने के लिए, वो प्रोटेस्ट ही था. अहिंसक प्रोटेस्ट. भगत सिंह ने जो असेंबली में सिर्फ आवाज करने वाला बम फेंका था और फिर अपनी गिरफ्तारी दी थी. वो प्रोटेस्ट था. उन्होंने किसी की जान नहीं ली थी लेकिन उनको बेइंतहा टॉर्चर किया गया. लाठियों से पीटा गया. पीटने वाले अंग्रेज थे. जिनको आज हम पानी पी पी कोसते हैं. अब वो सीन आज देखो. कौन प्रोटेस्ट के लिए लड़ रहा है और कौन उन पर लाठियां बरसा रहा है. खुद को किस तरफ खड़ा किया आपने? प्रोटेस्ट करने वालों की तरफ या उन पर लाठियां भांजने वाले अंग्रेजों की तरफ?

गुरमेहर की बात करना इसलिए जरूरी था कि पहले उसकी बात समझी जाए कि उसकी लड़ाई क्या है ट्रोलर्स से?

वीरेंद्र सहवाग ने जो ट्वीट किया वो हास्य विनोद वाला है. कथित ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ का नमूना. असल में बेवकूफाना. अगर आपको लगता है कि वो आपको हंसाने के लिए ट्वीट करता है तो समझ का दायरा बढ़ाइए. ये सहवाग की मार्केटिंग स्ट्रैटजी है. इसी साल की शुरुआत में उन्होंने अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को इंटरव्यू में बताया था कि पिछले छह महीने में वो ट्विटर से 30 लाख रुपए कमा चुके हैं. और आप इमोशनल हुए जा रहे हैं. अपने ह्यूमरस ट्वीट में वो आपके दिमाग में कैसे कोई एयर प्यूरिफायर या ऑनलाइन पेमेंट गेटवे का ऐप इंस्टाल कर देते हैं, आपको पता भी नहीं चलेगा. अगर आप किसी प्रोडक्ट के एन्डोर्समेंट को नहीं देख पा रहे तो इस भोलेपन पर काम करिए.

और अपने देश में किसी भी चीज का ब्रांड अंबेसडर होने के लिए पहली शर्त है आपका देशभक्त होना. और होने से ज्यादा उसे हर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर दिखाना. जैसे अक्षय कुमार अपनी फिल्म से टाइल्स तक बेचने के लिए देशभक्ति वाली पंचलाइन्स का इस्तेमाल करते हैं. वही स्ट्रैटजी सहवाग की ट्विटर पर है. याद करो ओलंपिक के दौरान पियर्स मोर्गन को जवाब देने वाला ट्वीट. जब सहवाग ने मोर्गन को औकात याद दिलाई थी कि क्रिकेट जहां से पैदा हुआ वो इंग्लैंड कभी वर्ल्ड कप नहीं जीत पाया. असल में ये वैसा ही है कि पासिंग मार्क्स तो 33% होते हैं. अगर मेरे 30 परसेंट आएं तो मैं उससे कहूं अबे तेरे तो 25 ही आए हैं.

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वीरेंद्र सहवाग का गुंडों की सेना से भले कोई कनेक्शन न हो, लेकिन उनका ट्विटर हैंडल करने वाले का है. ये कोई अमृतांशु हैं जो तथाकथित देशभक्ति से ओत प्रोत सेना के नुमाइंदे हैं. ये देशभक्ति अलग टाइप की होती है जिसका देश से कोई लेना देना नहीं होता बल्कि उसका उद्देश्य सिर्फ अपने खिलाफ बोलने वालों को देशद्रोही साबित करना होता है, किसी बहाने से. आप उस पार्टी के विरोधी हो जिसे वो सपोर्ट करते हैं, तो देशद्रोही. आप उसके फेवरेट नेता के विरोधी हैं तो देशद्रोही. देशभक्ति को इन लोगों ने अपने प्रॉडक्ट बेचने का जुगाड़ बना लिया है. देशभक्ति वाला बटन दबाकर भोली भाली जनता का वोट से लेकर नोट तक सब लूट लो. अमृतांशु का झुकाव किस विचारधारा की तरफ है इसका नमूना देख लीजिए. पीएम मोदी का समर्थक या कोई आम सा नागरिक मोदी की नीति से प्रभावित हो सकता है. तो वह उस पार्टिकुलर नीति की प्रशंसा करेगा, न कि व्यक्ति की. व्यक्तिपूजा का ये चरित्र किस विचारधारा में आता है, ये किसी से छिपा नहीं है. लट्ठबाजों और गैंगरेप की धमकी देने वालों के कारनामों का समर्थन वीरेंद्र सहवाग के नाम से कौन कर रहा है, ये समझ जाना चाहिए.

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और ये बंदा देशभक्त भी है क्योंकि फौजी के लिए इसके मन में अपार श्रद्धा है, बस शहीद की बेटी के लिए नहीं.

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रणदीप हुड्डा के ट्वीट की पड़ताल करने से पहले गुरमेहर के उस वीडियो की बात कर लें जिसका स्क्रीनशॉट लेकर ‘देशभक्त सेना’ ने गुरमेहर को निशाने पर लिया. और उनके साथ वीरेंद्र सहवाग शामिल हो गए. फिर रणदीप हुड्डा भी. ये वीडियो गुरमेहर ने तकरीबन 9 महीने पहले जारी किया था. पाकिस्तान और भारत के बीच शांति लाने की भावना से. तब भी ये शहीद की बेटी थी, लेकिन देशद्रोही नहीं हुई. क्योंकि ये उस वक्त किसी की आवाज उठाने के लिए प्रोटेस्ट नहीं कर रही थी. वो वीडियो देख लिया जाए.

पाकिस्तान की तरफ से इसका जवाब भी आया था. ये दोनों वीडियोज आपके पूरे देखने चाहिए क्योंकि अधकचरा ज्ञान आपको फिर गुमराह कर सकता है.

अब रणदीप हुड्डा की बात. ‘सरबजीत’ में उनका रोल देखकर आंखें भर आईं. वो बेहद काबिल एक्टर हैं. और अपने चरित्र को लेकर उनका समर्पण कमाल का है. सरबजीत का रोल किया था इस फिल्म में. सरबजीत, जो भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी में पिस गया, बिना किसी गुनाह के. यही दुश्मनी खत्म करने के लिए गुरमेहर ने गुहार की थी 9 महीने पहले. उसी वीडियो से स्क्रीन ग्रैब लेकर दो कौड़ी के टुच्चे ट्रोलर्स गुरमेहर को ट्रोल कर रहे हैं और रणदीप हुड्डा उनका साथ लिए दिख रहे हैं. कम से कम सरबजीत के चरित्र के साथ आपको न्याय करना था जिसकी सबसे बड़ी जरूरत ही दोनों देशों के बीच शांति थी.बाई द वे  वीरेंद्र सहवाग कभी फौजियों का बड़ा सम्मान करते थे. ये ट्वीट देखकर रीट्वीट कर देना रणदीप जी.

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वो किसी शहीद की बेटी है इस बात को भूल जाइए. किसी की भी बेटी हो तो क्या किसी को हक है उसे गैंगरेप की धमकी देने का. और सहवाग, रणदीप अनजाने ही उनके साथ आ खड़े हुए हैं. उनका इरादा भले कुछ रहा हो. लेकिन पब्लिक फिगर होने के नाते अब ट्रोलर्स को उनका साथ मिल गया है. कुल मिलाकर एक स्टूडेंट के खिलाफ इस वक्त तक एक मंत्री, एक बीजेपी सांसद प्रताप सिन्हा जिन्होंने गुरमेहर की तुलना दाउद इब्राहिम से कर दी, एक मंझा हुआ क्रिकेटर और एक फिल्म स्टार मिलकर ट्रोलर्स के साथ आ खड़े हुए हैं.

वैसे लास्ट में हम यही कहेंगे प्रिय सहवाग, हम आपको नहीं, इंडिया को चीयर कर रहे थे.


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