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इन 6 वजहों से आपको जरूर देखना चाहिए यूरो कप

suraj pandey
सूरज

सूरज पांडेय दोस्त है. मैदान वाला खेल होता है न. उसे देखता, लिखता, पढ़ता और जीता है. हमें खिलाड़ियों के नाम याद नहीं रहते, ये सुबह डेढ़ दहाई फुटबॉलर्स के नाम लेता है फिर आंख मींचता है. चेहरा ऐसे तपता है जैसे टहटी मानों अभी 400 बाय 400 के मैदान का चार चक्कर मार आ जाएगा. सूरज स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट न होता तो घोड़ा होता, उस पर लगाया पैसा कभी न डूबता. यूरो कप 2016 शुरू हो चुका है. ज्यादातर लोगों को टीमों के नाम भी नहीं पता होते हैं. इसे सब रटे हुए हैं. कह रहा है कि मेरे पास 6 वजहें हैं, जिनकी वजह से सबको यूरो कप देखना चाहिए. यहां सूरज की लिखी वो वजहें हम आपको पढ़ा रहे हैं. पढ़िए.


 

11 जून 2016. भारत के वक्त के हिसाब से रात साढ़े बारह बजे यूरो कप 2016 शुरू हो चुका है. फैंस ने पहले से जूतों के फीते कस लिए हैं. जिनके नहीं बंधे वो बांध लें. क्योंकि यूरोप की बेस्ट 24 टीमों के इस टकराव को देखने के लिए आपका तैयार रहना बेहद जरूरी है. नोएर की स्वीपिंग-कीपिंग देखनी हो या इन्क्रेडिबल इब्राहिमोविच की बाइसिकल किक. यहीं मिलेगा आपको फर्राटे भरता हुआ गैरेथ बेल और उसके पीछे पड़ा जॉर्डी अल्बा.

रोनाल्डो के हेडर के आगे डटे डेविड डि गिया से लेकर पेपे और पिके की फाइट तक. सब कुछ है यहां. यंग फ्रेंच टीम के आगे तुरीन के पहरेदार जियानलुइगी बफन की अगुवाई में खड़े जख्मी इटैलियन लड़ाके और बेल्जियम के ड्रिबलर्स को पूरे ‘हार्ट’ से रोकते अंग्रेज. इनके अलावा मिडफील्ड के मास्टर्स रैकिटिच और मॉड्रिच के साथ खतरनाक स्ट्राइकर मैंडजुकिक वाली क्रोशिया के आगे डटी वर्सेटाइल यंग गन डेविड अलाबा वाली ऑस्ट्रिया और कमेंट्रेटरों की कब्रगाह पोलैंड की टीम. एक दूसरे से भिड़ी इन तमाम टीमों का शिकार करने आ रहे विश्वविजेता जर्मन. क्योंकि मेरे दोस्त, ‘ये यूरो है’. यहां किसी की मिडफील्ड में बड़ा दम है तो कोई ठोस डिफेंस के साथ आया है. किसी के पास इतने स्ट्राइकर हैं कि किसे उतारें किसे बिठाएं.

सिर की ठोकर से वर्ल्डकप गिरा देने वाला जिदान…

कोई तीन-तीन वर्ल्ड क्लास गोलकीपर लेके पहुंच गया. तो कोई इसलिए परेशान है कि उसकी टीम में हर पोजिशन के लिए दो-तीन सितारे भरे पड़े हैं. किसे अंदर करें किसे बाहर. इन सब मसालों को साथ लेकर आए यूरो से सिर्फ दो चीजें मिसिंग है- फ्लाइंग डचमैन रॉबिन वान पर्सी और ‘द मैन ऑफ ग्लास’ अर्जेन रॉबेन, क्योंकि नीदरलैंड क्वालीफाई ही नहीं कर पाया. अब इतना बड़ा इंट्रो लिख डाला तो इससे पहले कि आप पक जाएं, हम आ जाते हैं ‘डी’ में. ‘डी’ बोले तो गोल का सबसे करीबी एरिया और ‘डी’ ये है कि हम आपको बताना चाहते हैं वो 6 वजहें, जिनके चलते आपको देखना ही चाहिए यूरो कप 2016.


 

1. यूरोप की बेस्ट टीमें एक साथ

अब भइया आप कोई भी हों. रोनाल्डो के फैन तो होंगे ही ना. तो आप देखना नहीं चाहेंगे कि रियाल मैड्रिड के लिए उछल-उछलकर, खींच-खांचकर गोल करने वाला आपका क्रिस्टियानो अपने देश के लिए कैसे खेलता है. अपने-अपने क्लब के लिए झंडे गाड़ने वाले दिग्गजों को नेशनल टीमों के लिए खेलने देखने का अनुभव एकदम से नया होता है. इसके पीछे पहली बात तो ये है कि क्लब अपनी टीम की हर पोजिशन के लिए बेस्ट प्लेयर रखते हैं लेकिन नेशनल टीम में आपके पास कम ही ऑप्शन होते हैं. दूसरी बात ये भी है कि नेशनल टीमें इतनी फुटबॉल भी नहीं खेलती और गुरू साथ ना खेलो तो, तालमेल तो गड़बड़ाता ही है. ऐसे में टूर्नामेंट शुरू होने से कुछ ही दिन पहले इकट्ठा हुए खिलाड़ी मैदान पर कैसे तालमेल दिखाते हैं ये देखना बेहद मजेदार होता है. यूरोपियन टीमों के फुटबॉल खेलने का अंदाज साउथ अमेरिकन और एशियन टीमों से बिल्कुल अलग होता है. इसे देखना ऐसा ही है जैसे एक साथ फास्ट एंड फ्यूरियस और कागज के फूल देखना. स्पीड और स्किल का बेजोड़ मेल.


 

2. हमलावरों (Attackers) के दम का इम्तहान

हमेशा पढ़ते होंगे न. रोनाल्डो ने इतने गोल दागे, जैमी वार्डी EPL का गोल्डेन बूट ले गया. केन ने तो गोल मार मारकर जाल में छेद कर दिया, अबे! इब्राहिमोविच एक ही सीजन में 50 गोल कर गया. ये सब सुनते हो. फिर जब धुनते हो, तो जहिराता है कि अरे यार रोनाल्डो के पास तो 2014 वर्ल्डकप के टॉप थ्री में से दो गोल दागने वाला जेम्स रॉड्रिगेज भी है. याद है कि नहीं, उरुग्वे के खिलाफ वो मैच, जब 22 साल के इस लड़के ने अपनी छाती पर गेंद रोककर, बिना देखे गोल ठोंक दिया था. बाकी स्ट्राइकर्स भी जबर मिडफील्ड के साथ ही खेलते हैं. प्रोफेशनल फुटबॉल बड़ी बेरहम होती है, परफॉर्म ना किया तो बाहर.

लेकिन जब बात देश के लिए खेलने की आती है तो कई बार ऐसे प्लेयर्स को भी खिलाना पड़ता है जो टच में नहीं हैं. ऐसे में हमेशा बेस्ट प्लेयर्स के साथ खेलने वाले ये धुरंधर कुछ कम टिमटिमाते सितारों के साथ कितना उजाला फैला पाते हैं, ये देखना बड़ा मजेदार होता है. तो अब आओ देख ही लेते हैं कि अपने दाएं-बाएं हाथों और पैरों की जगह नए वाले इंस्टाल करने पर ये हमलावर कैसा खेल दिखाते हैं. और अगर ये देखना है तो भइया एंड बहन हम आपको बता रहे हैं, यूरो कप देखो. यूरो कप.


 

3. दुश्मन-दुश्मन न रहा, अब तो दोस्त हो गया

यूरो की टीमों में कई ऐसे प्लेयर्स हैं जो साल भर तो एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं, लेकिन इस टूर्नामेंट में सब साथ हो जाते हैं. मजेदार बात तो ये है कि क्लब के लिए खेलते वक्त जो दोस्त होता है यहां वो दुश्मन हो जाता है और जो दुश्मन होता है वो लख्ते जिगर हो जाता है. जैसे चैंपियंस लीग फाइनल्स के गोलमास्टर सर्जियो रामोस, शैतान पेपे और ट्विटर पर हवाबाजी करने वाले बार्सिलोना के पिके और धावक जॉर्डी अल्बा की जोड़ियां. ला- लीगा में जहां रामोस और पेपे मिलकर पिके और अल्बा से भिड़े रहते हैं तो यहां ये तीनों एक तरफ होकर पेपे से भिड़ जाएंगे.

ऐसे में इन्हें देखने का अपना ही मजा है. रोनाल्डो के क्रॉस पर हेडर जमाने वाला रामोस जब उसे टैकल करेगा तो कैसा लगेगा. युवेंट्स के लिए खेलते हुए कैसियास के खिलाफ गोल दागने वाला मोराता जब कैसियास की गोल किक से बने मूव पर गोल करेगा तो क्या सेलिब्रेशन होगा. एक ही टीम (फ्रांस) के लिए जब एंथनी मार्शल और ओलिवर गिरोउड जैसे दो विरोधी स्ट्राइकर और दिमित्री पायेत- गोलो कांटे जैसे एक दूसरे से हमेशा गेंद छीनने की जुगत में लगे मिडफील्डर एक ही टीम के लिए खेलेंगे. क्या मजेदार मैच होगा यार. गेंद के लिए साल भर आपस में लड़ते प्लेयर्स जब एक-दूसरे को इंच परफेक्ट पास देंगे तो देखने वालों को कैसा लगेगा. मैं तो अभी से फीलिंग हाई हो रहा हूं.


 

4. खिताब के लिए जर्मनी-स्पेन-फ्रांस और इंग्लैंड की जोर आजमाइश

वैसे तो इस टूर्नामेंट में 24 टीमें खेल रही हैं. लेकिन पिच से हटकर अगर कागजों पर देखें तो मैन मुकाबला चार टीमों जर्मनी-फ्रांस-स्पेन-इंग्लैंड में है. लगातार दो बार यूरो कप जीत चुका स्पेन जहां हैट्रिक मारने फ्रांस पहुंचा है तो वहीं अब कोई बड़ा क्लब मैनेज करने की सोच रहे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जर्मन टीम के मैनेजर जोचिम लोऊ भी जाने से पहले ये खिताब अपने पोर्टफोलियो में चिपकाना चाहेंगे. दुनिया के सबसे बेहतरीन मिडफील्डर्स वाली इन दोनों टीमों की टक्कर बड़ी मजेदार होने वाली है. वैसे हमारा कहने का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि बाकी टीमें कमजोर हैं लेकिन इन दोनों ने दुनिया के दो बड़े खिताब अपनी जेब में रखे हैं यार, तो भाव तो देना ही पड़ेगा न.

आपको बता दें कि जर्मनी और स्पेन दोनों टीमें आधुनिक फुटबॉल में बेस्ट मिडफील्डर्स वाली टीमें हैं. इतना ही नहीं इनके गोलकीपर भी कमाल के हैं. सबसे तगड़े वाले. इन्हें टक्कर देने के लिए दिदिएर दिस्चैम्प की कोचिंग वाली फ्रांस के पास भी असलहे कम नहीं हैं. युवेंट्स के मिडफील्ड की जान पॉल पोग्बा से लेकर बार्सिलोना को चैंपियंस लीग से बाहर का रास्ता दिखाने वाला एंटोनी ग्रिजमैन इसी टीम के पास है. इनके जस्ट पीछे अपना तमाम नया पुराना गोला-बारूद लेकर खड़े हैं अंग्रेज. अपने वजन और लुक्स को लेकर फुटबॉल के श्रेक कहे जाने वाले वेन रूनी, जो मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन दोनों पर समान अधिकार के साथ खेल सकते हैं. इका साथ देने के लिए कुछ खतरनाक यंग और सीनियर फॉरवर्ड्स और मिडफील्डर्स के परफेक्ट ब्लेंड वाले थ्री लॉयन्स को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है दोस्त.


 

5. अंडरडॉग्स को स्टार बनते हुए देखने के लिए

कोई भी टूर्नामेंट हो. बड़ी टीमों से हमेशा ही उम्मीदें रहती हैं. इन्हीं उम्मीदों के बीच कोई छोटी टीम या ऐसी टीम जिससे बिल्कुल भी उम्मीद ना हो, आए और कमाल कर जाए तो कितना मजा आता है ये बताने की जरूरत ना है. जैसे 2004 के यूरो कप में सबको चौंकाते हुए ग्रीस ने पहले तो सेमीफाइनल में जगह बनाकर चेक रिपब्लिक को 1-0 से पीटा और फिर फाइनल में मेजबान पुर्तगाल को को भी 1-0 से धूल चटा दी. ये ग्रीस का पहला यूरोपियन खिताब था. 2008 में हुए अगले यूरो कप में लिलियन थुर्रम, आर्सेनल लीजेंड थिएरे हेनरी, ISL में मुंबई के लिए खेल चुके निकोलस एनेल्का जैसे सितारों से सजी फ्रांस की टीम पहले ही राउंड में बाहर हो गई.

इसके बाद क्वार्टरफाइनल में रूस ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के लीजेंड गोलकीपर एडविन वान डेर सार की कप्तानी में मैन यू के लिए गजब-गजब गोल कर चुके रूड वान निस्टेलरूय, 2014 के वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में स्पेन के खिलाफ उड़कर गोल दागने वाले रॉबिन वान पर्सी, इसी मैच में बोल्ट से भी तेज भागकर गोल करने वाले अर्जेन रॉबेन जैसे दिग्गजों से भरी नीदरलैंड्स (हॉलैंड) को एक्स्ट्रा टाइम तक खिंचे मुकाबले में 3-1 से रौंदकर बाहर का रास्ता दिखा दिया. सिर्फ टीमें ही क्यों, कई प्लेयर भी हैं जो यूरो से ही निकले हैं. कुछ तो सितारों की तरह यहां आते हैं और कुछ यहां आकर सितारे बन जाते हैं.

आर्सेनल के डच लीजेंड डेनिस बेर्गकैम्प को कोई कैसे भूल सकता है. 1992 के यूरो कप में जबरदस्त खेल दिखाने वाले बेर्गकैम्प वैसे तो डच फुटबॉल में पहले ही सुपरस्टार बन चुके थे लेकिन यूरोप में उनकी धाक इसी यूरो कप से जमी. मौजूदा फ्रेंच टीम के मैनेजर दिदिएर देसचैम्प्स भी यूरो कप से ही स्टार बने थे. 1996 के यूरो कप में डिफेंसिव मिडफील्डर के रूम में खेलने वाले देसचैम्प्स ने अपनी कप्तानी में टीम को नॉकआउट स्टेज तक पहुंचाया. यूरो कप में यंग टैलेंट्स को जलवा बिखेरते देखने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि फिर आप भी Quora पर ज्ञान छांटते हुए अपने फेवरेट क्लब के मैनेजर पर धौंस जमा सकते हैं कि अबे यार ये वाला लड़का कित्ता सई खेलता है, इसको क्यों नहीं साइन कर रहे.


 

6. चॉकलेटी बेल्जियम का खेल देखने के लिए

एक छोटू सा देश है बेल्जियम, वही जहां अपने पीएम अभी हाल ही में गए थे. वहां की चॉकलेट के अलावा दूसरी सबसे फेमस चीज है वहां के फुटबॉलर्स. ये टीम पिछले दो-तीन सालों में ऐसी जबरदस्त बनी है कि दुनिया भर की फुटबॉल लीग्स इनके प्लेयर्स के बिना अधूरी सी लगती हैं. EPL से लेकर la-Liga और Serie A से लेकर Ligue-1 तक हर जगह इनका जलवा है. रशियन लीग हो या अपने घर की बेल्जियन लीग हर जगह इन प्लेयर्स का जलवा है.

बेल्जियन फुटबॉलर्स की खासियत उनकी स्पीड और ड्रिबलिंग क्वालिटी है. फिर चाहे वो ईडेन हजार्ड हों या फिर केविन डि ब्रुयने. इन क्वालिटीज के अलावा बेल्जियम की टीम का सबसे बड़े प्लस प्वाइंट है उनके प्लेयर्स की उम्र. इस टीम के ज्यादातर प्लेयर कम उम्र के ही हैं फिर चाहे गोलकीपर थिबाउट कॉर्टोइस या चैंपियंस लीग फाइनल में एटलेटिको मैड्रिड के लिए बराबरी का गोल करने वाले यान्निक करास्को. डिवोक ओरिगी, रोमेलु लुकाकू, क्रिस्चियन बेंटेक, ईडेन हजार्ड और केविन डि ब्रुयने ये सारे 25 साल या उसके अंदर ही हैं. फुटबॉल जैसे खेल में उम्र और फिटनेस ये दो चीजें बहुत इंपॉर्टेंट होती हैं. ऐसे में यंगेस्ट स्क्वॉड्स की लिस्ट के टॉप फाइव और सबसे लंबे प्लेयर्स वाली स्क्वाड की लिस्ट में टॉप टू में आने वाली ये टीम अबकी बार कुछ ना कुछ कमाल तो करेगी है.


 

नोट: फुटबॉल में एरियल पास, कॉर्नर, क्लीयरेंस वगैरह में हाइट बड़ी इंपॉर्टेंट होती है.


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