Submit your post

Follow Us

जो अब तक कतार में नहीं लगे सरकार उन्हें करेगी सम्मानित!

585
शेयर्स

‘नोटबंदी पर इतना कन्फ्यूजन है कि फिलहाल जनता न इसके पक्ष में है, न विपक्ष में, वो तो कतार में है.’ ये जिस किसी ने भी कहा है सुना जाना चाहिए. मेरे लिए सुनना और जरूरी हो जाता है क्योंकि गर्लफ्रेंड ने कहा है. कतार में लगना हमें बुरा लगता है, लेकिन कतार में लगना अच्छा होता है. कतार में लगा हर आदमी एक सिस्टम को मानता है. उस पर भरोसा रखता है, उसे उम्मीद होती है, इस लाइन के अंत तक पहुंचकर सब ठीक हो जाएगा. विडंबना देखिए उसी सिस्टम की वजह से वो उस कतार में लगा होता है. कतार में खड़े हर आदमी का गुस्सा जायज होता है. वो कतार में भीड़ नहीं बढ़ाता, सिस्टम में भरोसा शो करता है.

अगर आप ये तय करने बैठे हैं कि कौन इस वक़्त नोटबंदी के खिलाफ है और कौन पक्ष में तो आपको दोनों किस्म के लोग मिलेंगे. पक्ष वाले वो होंगे जिनने या तो अपने पुराने नोट ठिकाने लगा दिए होंगे, या नए निकाल लिए होंगे. हर आदमी जो खुश है, उसका जुगाड़ लग गया है. आम आदमी आज दो तरह का हो गया है, या तो जिसके नोट निकल आए हैं, या तो जिसका दम निकल गया है. फिर हम तीसरी तरह के लोगों को देखते हैं.

ये वो नहीं है जिसके बार-बार आंसू निकल रहे हैं, ये वो है जो कतार में नहीं लगा. वो हाथ में थैली लिए घर लौटता है. आज की तारीख में छोटी खरीददारी का बड़ा महत्व है. नई पॉलीथीन में सौ-पचास की चीज लेकर घर लौटता आदमी अमीर होता है. वही असली मिडिल क्लास है. वो ऊपर बताए दोनों से अलग है. किसी कतार में नहीं लगा, भीड़ नहीं बढ़ाई, सिरदर्द नहीं बना. ये वो आदमी है, जो नहीं नजर आ रहा इसलिए सरकार की मुसीबत नहीं बना. उसके प्रति सरकार का क्या कर्तव्य है?

सरकार को चाहिए कि उसका नागरिक अभिनंदन करे,  26 जनवरी पर हाथी पर बैठाकर जुलूस निकलवाए. ऐसे लोग भी ज्यादा नहीं होंगे. ऐसे लोगों का जब सम्मान किया जाएगा तो संदेश जाएगा. लाइन में मत लगो. सरकार को चाहिए ऐसे लोगों को खोजे और उन पर डाक टिकट जारी कर दे, क्योंकि ऐसे लोग उसी तरह कम हो रहे हैं जैसे चिट्ठी लिखने की आदत. कम से याद आया, उन्हें चाहें तो विलुप्तप्राय: जीवों की कैटगरी में भी डाल दें, संरक्षित प्राणी घोषित आकर दे. इससे होगा क्या कि सरकार को आराम हो जाएगा, ये कहते बनेगा कि वो भी तो है जो लाइन में नहीं खडा है, तुम्हारे बीच का है. हमारे बीच का कोई लाइन में न खडा हो तो उसके बहाने हमारे तर्कों का गला घोंटा जा सकता है. उसी तरह जैसे हमारे लिए कोई बॉर्डर पर खड़ा है, कहकर.

सरकार चाहे तो उन्हें सरकारी विज्ञापनों का चेहरा बना सकती है. हम मुकेश हराने से हार चुके हैं. सरकार ऐसे लोगों को परमवीर चक्र भी दे सकती है, विषम परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय देने के लिए. हर साल भारत रत्न के लिए बवाल होता है, सरकार ऐसे लोगों को वो भी तो दे सकती है. उनके नाम पर सड़कें हों सकती हैं, सड़क नहीं तो गलियों के नाम ही रख दे. संदेश होगा इनके दिखाए रास्ते पर चलो, वो भी नहीं तो उनके रास्ते पर ही चल लो. उन्हें नौकरियों में 12% वरीयता दी जाएगी, उनके पोतों का 45 साल बाद स्कूल एडमिशन आसानी से होगा. जिस तरह से स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों को वरीयता मिलती थी ऐआ कुछ इन्हें भी कंसीडर किया जाएगा.

लेकिन सरकार ऐसा कुछ न करेगी. सरकार ऐसे तमाम लोगों के घर पर छापा मरवाएगी. पता करना चाहिए पैसे का ऐसा कौन सा स्त्रोत है इनके पास, इतनी महंगाई में कोई कैसे इतने दिन बिना पैनिक के आराम से रह सकता है. कितनी मेहनत पड़ती है, कितने तरीके लगते हैं, लोगों को परेशान करने के लिए. आरबीआई ने इतनी बार गाइडलाइंस बदलीं, वित्तमंत्री खुद खोए रहे. प्रधानमंत्री बार-बार रो दिए, राहुल गांधी को लाइन में लगना पड़ा.  इस सबके के बावजूद एक आदमी मजे से अपने घर बैठा है. ये तो बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.