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9 बार उसकी जान लेने की कोशिश हुई, मरा पर कातिल का हिंट नसों में छुपा के गया

शैतान क्या होता है? मसीहा ही होता है जो अपनी हवस के चलते खुद को टॉर्चर कर शैतान बन जाता है.
-खलील जिब्रान


किचन में हल्की रौशनी है. एक आदमी ऑमलेट बना रहा है. तभी एक औरत दबे पांव घुसती है. इरादा चोरी का है. अंधेरे के चलते बेडरूम का रास्ता भटक कर किचन में आ गई है. आदमी को पता चल जाता है. वो उसे धक्का देता है. पुलिस को फोन करने लगता है. औरत को कुछ नहीं सूझता तो कुकर दे मारती है उसके सिर पर. फिर कड़ाही. तवा चला देती है. आदमी गिर जाता है. वो औरत उसके फोन से उसकी आंखें कूचने लगती है. सरौता लेकर उसकी गर्दन काटने लगती है. पूरी कट नहीं पाती. सरौता जाम हो जाता है. आदमी चीखने लगता है. वो औरत डस्टबिन से कूड़ा निकाल कर उसके मुंह में ठूंसने लगती है. इंसान चोक होने लगता है. फिर वो औरत भगोने में पानी भर लेती है. आदमी का मुंह उसमें डुबा देती है. वो छटपटाता रहता है, पर मरता नहीं. औरत थक जाती है. छोड़ देती है. कुछ देर बाद वो आदमी खड़ा हो जाता है. तो फिर वो औरत उसका सिर पकड़कर जलती गैस में झोंक देती है.


 

क्या वो औरत ये सोच के आई थी कि उसे किसी को ऐसे मारना है? वो तो बस चोरी करने आई थी. पर अगर कोई किसी को इस हिसाब से मारना चाहे और वो ना मरे तो?

कहानी माइक मैलॉय की जिसे मरना पसंद नहीं था

जनवरी 1933 के जाड़े की एक रात थी. माइक मैलॉय लोकल ठेके पर दारू पी रहा था. 35-40 साल का मैलॉय होमलेस इंसान था. दुनिया में कोई था नहीं उसका. ऐसा नहीं था कि वो शुरू से ऐसा ही था. पहले न्यूयॉर्क में स्टेशन इंजीनियर था. पर ग्रेट डिप्रेशन में नौकरी चली गई थी. तो अमेरिका के बहुत सारे लोगों की तरह वो भी दारू में जीवन खोजता था.

पर उस रात कुछ अलग हो रहा था. उसके 5 दोस्त उसे खूब पिला रहे थे. एक दोस्त का बार था. मैलॉय उसी में बैठा था. इतनी मंदी में कोई उसे पिला क्यों रहा था? फ्री में. मैलॉय को सब कुछ जादू लग रहा था. कि दुनिया में इंसानियत अभी बची है.

इस इंसानियत की नींव 1932 में रखी गई थी. बार का मालिक टोनी अपने दोस्तों के साथ प्लान बनाता था कि कैसे पैसे कमाये जाएं. मंदी का दौर चल रहा है. खूब सोचने के बाद पता चला कि किसी के इंश्योरेंस से पैसे कमाए जा सकते हैं. पर उस इंसान को मरना पड़ेगा. पर कौन मरेगा? 5 दोस्तों में कोई तैयार नहीं था.

टोनी
टोनी

तो एक दोस्त जोसेफ ने अपने फर्जी भाई निकोलस के नाम पर तीन इंश्योरेंस पॉलिसीज ले ली. जोसेफ उसी बार में बारटेंडर था. कुल 20 लाख रुपये की पॉलिसी थी. अगर निकोलस मर जाता तो 40 लाख रुपये मिलने वाले थे. पर निकोलस बनेगा कौन, ये जटिल प्रश्न था.

इंश्योरेंस फ्रॉड को लेकर अमेरिका में एक उपन्यास भी लिखा जा चुका था. बाद में इस पर फिल्म भी बनी थी. The Double Indemnity. पर ये घटना 1927 की थी. रुथ स्नाइडर ने अपने इंश्योरेंस एजेंट के साथ मिलकर अपने पति को मार दिया था. रुथ को एजेंट से प्यार हो गया था. पर मर्डर के बाद बड़ा कन्फ्यूजन हो गया था. प्यार था कि नहीं, पता नहीं चल रहा था. पर दोनों पकड़ लिए गये थे. मौत मिली थी कोर्ट से. तो फ्रॉड करना आसान नहीं था दोस्तों के लिए.

DOUBLE INDEMNITY
फिल्म The Double Indemnity का पोस्टर

तभी पांचों की नजर पड़ी मैलॉय पर. कोई था नहीं इसका. इसकी मौत को कोई नोटिस नहीं करता. इसको निकोलस बनाया जा सकता था. क्योंकि वो डिप्रेशन का दौर था, लोग दारू पी के जान दे रहे थे. मैलॉय को खूब पिलाया गया. दिन-रात. पर जितना पीता, उसकी प्यास बढ़ती जाती. वक्त के साथ मैलॉय की कैपेसिटी बढ़ती गई. मरने का कोई चांस नजर नहीं आ रहा था.

प्लान पर प्लान बनते गए, पर हर बार मैलॉय दारू पीते मिलता

तो दारू दोस्तों ने नया प्लान बनाया. मिथेनॉल मिलाकर दारू पिलाने लगे. मिथेनॉल जहर का काम करता है. मारने से पहले अंधा कर देता है. पर मैलॉय मिथेनॉल भी पी गया. पीने के बाद और पैग मांगने लगा. तो एक सड़ी हुई मछलियों का सैंडविच तैयार किया गया. इसमें कीलें, शीशे के टुकड़े सब मिलाए गये. कि खाते ही मैलॉय मर जाएगा. पर खाने के बाद उसने एक और सैंडविच मांग लिया. झल्लाकर पांचों ने दारू में हर चीज मिलाकर पिलाना शुरू कर दिया. कि किसी ना किसी चीज से तो मर ही जाएगा. पर मैलॉय को कुछ नहीं हुआ.

TONY BAR
टोनी का बार

फिर जनवरी 1933 का महीना आया. पांचों कई दिन से मैलॉय को पिला रहे थे. ठंड कड़ाके की थी. तय हुआ था कि अबकी प्रकृति का सहारा लेकर मौत दी जाएगी मैलॉय को. जब मैलॉय पी के लुढ़क गया तो उसे बार से दूर एक खुली जगह में ले जाया गया. वहां तापमान -26 डिग्री सेल्सियस था. उसके कपड़े फाड़ दिए गए. उसके ऊपर कई लीटर ठंडा पानी डाला गया. फिर वहीं छोड़कर लोग चले आये. वो स्थिति किसी को भी मारने के लिए पर्याप्त थी.

पर अगले दिन जब पांचों बार में गुड न्यूज का इंतजार कर रहे थे, मैलॉय ने आकर दारू का एक पैग मांग लिया.

फिर मौत हुई मैलॉय की, पर मरते-मरते वो सबूत को अपनी नसों में छुपा के गया था

इसके बाद पांचों ने एक नये लड़के को अपने साथ जोड़ लिया. 23 साल का ग्रीन टैक्सी ड्राइवर था. ग्रीन ने मैलॉय में टैक्सी मार दी और भाग गया. मैलॉय का कुछ पता नहीं चला. पांचों दोस्त मॉर्चरी में घूमते रहे. अखबार खंगालते रहे. पर बॉडी नहीं मिल रही थी. सप्ताह भर बाद मैलॉय फिर बार में आकर पी रहा था.

फिर नये लड़कों को जोड़ा गया. फिर से एक्सीडेंट कराया गया. पर इस बार भी मैलॉय की सिर्फ हड्डियां टूटीं. पागल होकर पांचों ने तय किया कि अब खुद हाथ डालना पड़ेगा. 22 फरवरी को मैलॉय को खूब पिलाया गया. और उसके बाद गैस की पाइप निकालकर उसके मुंह में ठूंस दिया गया. 20 मिनट के अंदर मैलॉय मर गया. सांस नहीं ले पाया था. पर जब डॉक्टर आया तो वो हत्या को पकड़ नहीं पाया. उसने लोबर न्यूमोनिया को मौत की वजह बताया.

MIKE ROOM DEATH
यहीं पर मैलॉय मरा था

इंश्योरेंस के पैसे मिल गये. एजेंटों को कुछ घूस दी गई. पर मैलॉय की बॉडी को बिना कोई रिवाज फॉलो किये दफना दिया गया. और यही वजह बना पांचों के पकड़ाने का.

बार में एक लड़ाई हुई. और एक मर्डर हो गया. बार के मालिक टोनी को पकड़ पूछताछ होने लगी. इसी बीच पता चला कि ये लोग इंश्योरेंस के बेनिफिशियरी हैं. तो पुलिस ने मैलॉय की बॉडी निकलवा ली कब्र से. उस वक्त वहां फॉरेंसिक पर बड़ा रिसर्च हो रहा था. तुरंत पता चल गया कि मैलॉय की नसों में कार्बन मोनो ऑक्साइड भरी थी. ये गैस भारी होती है, जल्दी निकलती नहीं.

MIKE
मैलॉय की डेड बॉडी

केस चलने लगा. पांचों में से चार को मृत्युदंड मिला. 1934 में दे भी दिया गया. मैलॉय की कहानी अमर हो गई. पर मैलॉय नहीं.

(Reference- thejournal.ie)


 

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