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मिलिए दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी से जिसके सामने प्रेसिडेंट ट्रंप भी फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं

कुछ दिनों पहले टाइम मैगजीन के कवर पर डॉनल्ड ट्रंप की तस्वीर छपी थी. ट्रंप अमेरिका के प्रेसिडेंट बने थे. तमाम विरोधों के बावजूद वो जीत गए. उसके बाद उन्होंने कुछ अजीब फैसले लिए. जिनमें ओबामा के राज के दौरान तैनात अफसरों को बर्खास्त किया. फिर अमेरिका में 7 देशों के मुसलमानों को आने से रोक दिया. ऐसा माना जा रहा था कि ट्रंप के सामने कहीं कुछ नहीं रुक सकता. पर इसके साथ ही एक और कहानी चल रही है. टाइम मैगजीन की कवर पर एक और इंसान आया है. उसे अमेरिका का प्रेसिडेंट कहा जा रहा है.

3 फरवरी को ट्रंप का एक ट्वीट आया. लिखा था- मैं अपने फैसले खुद लेता हूं. कोई इसमें प्रभाव नहीं डालता. कुछ लोग अफवाह उड़ा रहे हैं.

ट्रंप को ये कहने की जरूरत क्यों पड़ी. क्योंकि अमेरिका में एक खबर उड़ने लगी है. कि अमेरिका का शासन ट्रंप नहीं कोई और चला रहा है. इनका नाम है स्टीव बैनन. ऐसा कहा जा रहा है कि स्टीव का हाथ ट्रंप के हर फैसले में है. पिछले हफ्ते ही स्टीव को नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल प्रिंसिपल्स कमिटी में जगह मिल गई. ट्रंप के पॉलिटिकल एडवाइजर स्टीव के लिए ये बहुत बड़ी सफलता है. आज तक किसी पॉलिटिकल एडवाइजर को इसमें एंट्री नहीं मिली है.

जब मुसलमानों को बैन किया गया तो उसके साथ ही सिलिकॉन वैली पर भी ग्रहण लग गया. कहा जा रहा है कि डॉनल्ड ट्रंप इस चीज से नाराज थे. क्योंकि फैसले को उनकी बात से कहीं आगे बढ़ा दिया गया था. इसमें स्टीव का ही नाम आया था. ट्रंप फ्रस्ट्रेट हो गए थे. स्टीव को दबी जुबान में प्रेसिडेंट स्टीव कहा जाने लगा.

स्टीव बैनन कोई साधारण आदमी नहीं हैं. उन्होंने भविष्यवाणी की है कि 10 साल में अमेरिका साउथ चाइना सी में लड़ाई करेगा.

स्टीव वर्जीनिया में पैदा हुए. अमेरिकन नेवी में नौकरी की. हार्वर्ड में मैनेजमेंट पढ़ने गए. गोल्डमैन सैक्स में बैंकर का काम किया. और फिर एक टीवी शो सीनफील्ड से जुड़ गए. खूब पैसा कमाया. इसके शेयर मिल गए. फिर इनकी मुलाकात एंड्रयू ब्रेटबर्ट से हुई. एक मूवी प्रीमियर पर. एंड्रयू एक छोटे प्रोड्यूसर थे. पर इरादे ऐसे थे कि स्टीव चकित रह गए. एंड्रयू का विजन था कि अमेरिका को बदलना है. सरकारों की वर्तमान पॉलिसी देश को बर्बाद कर रही है. स्टीव इतने प्रभावित हुए कि एंड्रयू के साथ ब्रेटबर्ट न्यूज चलाने लगे. ये एक वेबसाइट है. 2012 में ब्रेटबर्ट के मरने के बाद बैनन इसके सर्वेसर्वा हो गए.

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Time

ब्रेटबर्ट में कुछ ऐसी खबरें छपती थीं-

आप मेनस्ट्रीम मीडिया की खबरें पढ़ रहे हैं. वो ओबामा की सुनते हैं. असली खबर यहां है. अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर से मुस्लिम देश में घुस रहे हैं. इसके सपोर्ट में बॉर्डर पर गिरी एक टीशर्ट भी दिखाई. कहा कि इसी पर मुस्लिम प्रार्थना कर रहे थे.

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ब्रेटबर्ट से

ब्लैक लोगों पर ह्वाइट से ज्यादा ब्लैक ही क्राइम करते हैं. डाटा उठा के देख लीजिए. ब्लैक लोगों को लेकर मीडिया एक अलग ही माहौल बना रहा है. उनकी हिंसा ज्यादा खतरनाक है.

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ब्रेटबर्ट से

फेमिनिज्म की आड़ में औरतें एक चीज खोजकर लाई हैं. पैट्रियार्की. क्या है ये. हम कहते हैं कि लिंग को महसूस करो. हर औरत से फ्लर्ट करो. वो कहेंगी कि अच्छा नहीं लगता, पर ये ऊपर की बात है. सबको अंदर ये पसंद होता है. थोड़े मजे लो. चिढ़ाओ उनको.

वेबसाइट का क्लेम था कि ये लोग हनी बैजर हैं. किसी चीज से नहीं डरते. हनी बैजर एक जानवर होता है, जो गिनीज बुक में इसी वजह से मौजूद है. वो दुनिया का सबसे फियरलेस जानवर है.

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हनी बैजर

इस वेबसाइट ने फिर तो धमाल मचा दिया. उस वक्त के प्रेसिडेंट ओबामा और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के खिलाफ चरस बो दी गई. यही नहीं रिपब्लिकन पार्टी के भी कुछ नेताओं की ऐसी-तैसी कर दी गई. मुसलमान, रिफ्यूजी, माइग्रेंट सबके खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया. चीन, एशिया, पर्यावरण सुरक्षा सब पर हमला किया गया.

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ब्रेटबर्ट का ऑफिस

जब ट्रंप ने अपना प्रेसिडेंशियल कैंपेन शुरू किया तो उन्होंने भी यही काम करना शुरू किया. ब्रेटबर्ट के पाठकों को ये बातें सुनी-सुनाई लगीं. पहले मीडिया ने कहा था, अब प्रेसिडेंट पद का उम्मीदवार कह रहा था. इसके बाद स्टीव ने खुल्लमखुल्ला ट्रंप के सपोर्ट में न्यूज करनी शुरू कर दी. अगस्त 2016 में ट्रंप ने स्टीव को अपने कैंपेन का सीईओ बना दिया. अब दोनों का रिश्ता फॉर्मल हो गया. जीतने के बाद ट्रंप ने स्टीव को अपना पॉलिटिकल ए़डवाइजर बना लिया.

पर मामला यहां से दिलचस्प हो गया है. स्टीव का एजेंडा ट्रंप से मीलों आगे का है. मई 2016 में स्टीव ने कहा था- ट्रंप हमारे लिए एक हथियार की तरह हैं. कौन है यहां पर हमारा. हम मतलब वो सारे लोग जो मानते हैं कि क्रिश्चियन और अमेरिका आधुनिक दुनिया में फंसे हुए हैं. स्टीव के इस ग्रुप में यूरोप के लोग भी हैं. स्टीव अपनी बात के लिए नेशनलिज्म शब्द इस्तेमाल करते हैं. उनका कहना है कि हम ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां से देश बदल सकता है. दुनिया बदल सकती है. ये 1930 के बाद आई इकॉनमिक क्रांति से भी दमदार होगा. इकॉनमिक राष्ट्रवाद.

स्टीव ने एक बार ये भी कहा था- मैं लेनिनिस्ट हूं. क्योंकि लेनिन सिस्टम को तोड़ना चाहता था. यही मेरा भी गोल है. मैं पूरा सिस्टम तोड़ना चाहता हूं. ताकि नया बना सकूं. ध्यान देने की बात ये है कि लेनिन कम्युनिस्ट थे और अमेरिका में इनके लिए जगह नहीं है. पर कैपिटलिस्ट स्टीव उनकी कौन सी बात उठा रहे हैं, ये रोचक है. स्टीव इन सारी बातों को अमेरिकन नेशनलिज्म से जोड़ देते हैं. जो भी मुद्दा अमेरिका को परेशान करता है, उनके लिए बेकार है. चाहे वो ब्लैक लोगों के अधिकार की ही बात क्यों ना हो. सेक्युलरिज्म को ये बेकार चीज ही मानते हैं. इनके हिसाब से ये समाज को कमजोर बना देता है. एशिया के बहुत सारे लोग वहां पर कंपनियों के सीईओ हैं. स्टीव के मुताबिक देश सिर्फ इकॉनमी से नहीं चलता. एक अपनी पहचान भी होती है. कहते हैं कि बाहर के लोग अमेरिका को चूस रहे हैं. सब स्वदेशी होना चाहिए.

अब ह्वाइट हाउस में स्टीव बैनन को पावर नजर आता है. वो लोगों से कहते भी हैं कि देखो पावर ये होता है. अमेरिका को इसकी जरूरत है. हर चीज तो पावर से जोड़ी ही जा सकती है. स्टीव उस पुरानी प्रथा के हैं. जो ये मान लेते हैं कि जो हम जानते हैं, सही है. बहुत चीजों की नई थ्योरी ले के आते हैं. उनके साथ काम करने वाले बताते हैं कि वो हर चीज को युद्ध स्तर पर रखते हैं. उनका मानना है कि अमेरिका के सिविल वॉर, प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अब मौका आया है. किसी ने समझाया है कि हर 80 साल में दुनिया बदलती है. तो अब दुनिया बदलने का मौका आ गया है.

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