Submit your post

Follow Us

जब दस हजार राजपूतों ने शेरशाह सूरी को लोहे के चने चबवा दिए थे

1540 से 1545 के बीच दिल्ली सल्तनत में एक अफगान शेरशाह सूरी का उरूज किसी करिश्मे से कम ना था. उनके पिता हरियाणा की छोटी सी जागीर नारनौल के जागीरदार थे. बचपन में उनका नाम फरीद खान था. एक शिकार के दौरान बिहार के मुगल गवर्नर बहार खान पर शेर ने हमला कर दिया था. नौजवान अफगान फरीद ने उस शेर को मार गिराया और उसे नया नाम मिला, ‘शेरशाह’. शेर शाह ने दिल्ली का तख़्त अपनी बदौलत हासिल किया था. दिल्ली के तख़्त पर कब्जे के महज चार साल के भीतर एक कांटे की जंग में उसकी बादशाहत जाते-जाते बची थी.

साल था 1544. जगह थी मारवाड़ का छोटा सा गांव गिरी-सुमेल. यह गांव फिलहाल राजस्थान के पाली जिले की जैतारण तहसील में पड़ता है. पहले बंगाल और फिर मालवा जीतने के बाद शेरशाह ने मारवाड़ की तरफ रुख किया. अपनी सल्तनत को टिकाए रखने के लिए उसका मारवाड़ पर कब्जा जरूरी था. 1543 के साल में उसने मारवाड़ की तरफ कूच किया.

1460 में मारवाड़ के शासक राव जोधा ने चिड़िया ‘चिड़िया टूंक’ की पहाड़ी पर महरानगढ़ का किला बनवाया और किले के अगल-बगल नया शहर बसाया – जोधपुर. इससे पहले मारवाड़ की राजधानी मंडोर हुआ करती थी. मंडोर के साथ दिक्कत ये थी कि ये किला समतल जमीन पर था. पहाड़ी किले सुरक्षा के लिहाज से काफी बेहतर होते हैं. अगर आप पहाड़ी के ऊपर हैं तो नीचे से आ रही दुश्मन की दस गुणा बड़ी फ़ौज से मुकाबला कर सकते हैं. शेरशाह भी ये बात जनता था. उसने जोधपुर को जीतने के लिए नई तरकीब अपनाई. वो अपनी 80 हजार घुड़सवारों की सेना और 40 तोपों के साथ जोधपुर से 90 किलोमीटर दूर गिरी-सुमेल में डेरा डालकर बैठ गया.

मेहरानगढ़ का किला
मेहरानगढ़ का किला

शेरशाह के आने की खबर पाकर मारवाड़ का शासक राव मालदेव राठौड़ भी अपनी 50 हजार घुड़सवार सेना के साथ गिरी-सुमेल पहुंच गया. एक महीने तक दोनों सेनाएं डेरा डालकर बैठी रहीं. एक महीने बाद शेरशाह को परेशानी पैदा होने लगी. इतनी बड़ी सेना को खिलाने के लिए राशन जुटा पाना बहुत मुश्किल हो गया. ये जगह दिल्ली से बहुत दूर थी. राशन की सप्लाई लाइन ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी. शेरशाह ने आखिरी चाल चली.

शेरशाह ने अपने नाम से एक खत लिखा. इस खत में उसने मालदेव के कुछ सरदारों को वफ़ादारी बदलने के लिए शुक्रिया अदा किया था. शेरशाह ने ये खत मालदेव के डेरे के पास फिंकवा दिया ताकि ये उसके हाथ लग जाए. शेरशाह की चाल कामयाब रही. मालदेव भितरघात की अफवाह से परेशान हो गया. अब उसे जोधपुर खोने का डर सताने लगा और उन्होंने जोधपुर की तरफ कूच करने का फैसला कर लिया.

एक पणिहारी ने मारवाड़ की लाज बचा ली

कहते हैं कि युद्ध क्षेत्र से पीछे हटने के फैसले के बाद मालदेव के दो सेनापति जेता और कुम्पा पास ही के कुएं से पानी पीने गए. इस समय वहां पर दो महिलाएं भी पानी लेने आई हुई थीं. इसमें से एक महिला ने चिंता जताते हुए दूसरी से कहा कि अफगान सैनिक बहुत खूंखार हैं. अगर वो आ गए तो हमारा क्या होगा? जवाब में दूसरी महिला ने कहा कि जब तक जेता और कुम्पा मौजूद हैं तब तक डरने की कोई बात नहीं.

जेता और कुम्पा मारवाड़ के आसोप ठिकाने के सरदार थे. कुम्पा रिश्ते में जेता का चाचा लगता था. दोनों लोग मालदेव की सेना में सेनापति थे. इन्होंने अजमेर के शासक विरमदेव को हराकर अजमेर, मेड़ता और डीडवाना के इलाके पर मारवाड़ का पंचरंगी झंडा लहराया था. महिला की बात सुनने के बाद जेता और कुम्पा मालदेव के डेरे में गए. उन्होंने मालदेव से कहा कि वो गिरी-सुमेल छोड़कर नहीं जाना चाहते. समझाइश के बाद मालदेव दस हजार घुड़सवारों की सेना को जेता और कुम्पा के नेतृत्व में पीछे छोड़कर जोधपुर चले गए.

राव जेता की तस्वीर
राव जेता की तस्वीर

4 जनवरी 1544 के रोज मालदेव के जोधपुर चले जाने के बाद कुम्पा और जेता ने शेरशाह की सेना पर हमला कर दिया. शेरशाह को उम्मीद थी कि उसकी 80,000 की घुड़सवार सेना कुछ ही घंटों में 10,000 राजपूतों को पीटकर रख देगी. लेकिन कुछ भी वैसा नहीं हुआ, जैसा शेरशाह ने सोचा था. कुम्पा और जेता के नेतृत्व में राजपूतों ने मुकाबले की शक्ल बदल कर रख दी. कुछ ही घंटों में बादशाह की आधी सेना खेत रही.

हालत यहां तक पहुंच गई कि शेरशाह ने मैदान छोड़ने की तैयारी कर ली. उसने वापिस दिल्ली लौटने के लिए अपने घोड़े पर जीन कसने के निर्देश भी दे दिए. इस बीच उसके सेनापति खवास खान ने आकर खबर दी कि कुम्पा और जेता मारे गए हैं और उसकी सेना ने भयंकर नुकसान झेलकर आखिरकार ये जंग जीत ली है. तब जाकर कहीं शेरशाह ने राहत की सांस ली. तारीख-ए-दाउदी में जिक्र मिलता है कि जेता और कुम्पा की बहादुरी के बारे में सुनकर शेरशाह ने खवास से कहा, “मैं मुट्ठीभर बाजरे के लिए दिल्ली की सल्तनत गवां देता.”

इस युद्ध में कुम्पा और जेता के मरने के बाद शेरशाह मारवाड़ के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने में कामयाम रहा. अजमेर से लेकर आबू तक का हिस्सा दिल्ली सल्तनत का भाग बन गया. कुम्पा की बहादुरी के किस्से राजस्थानी लोक परम्परा का हिस्सा बन गए और इस तरह दर्ज किए गए-

बोल्यो सूरी बैन यूँ, गिरी घाट घमसाण,
मुठी खातर बाजरी, खो देतो हिंदवाण.


 यह भी पढ़ें 

जयराम ठाकुर: एक किसान के बेटे का मुख्यमंत्री बनना

केएल सहगल से कुमार सानू तक को गवाने वाले इकलौते म्यूज़िक डायरेक्टर की कहानी

जब केमिकल बम लिए हाईजैकर से 48 लोगों को बचाने प्लेन में घुस गए थे वाजपेयी

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

अपने गांव की बोली बोलने में शर्म क्यों आती है आपको?

ये पोस्ट दूर-दराज गांव से आए स्टूडेंट्स जो डीयू या दूसरी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, उनके लिए है.

बहू-ससुर, भाभी-देवर, पड़ोसन: सिंगल स्क्रीन से फोन की स्क्रीन तक कैसे पहुंचीं एडल्ट फ़िल्में

बहू-ससुर, भाभी-देवर, पड़ोसन: सिंगल स्क्रीन से फोन की स्क्रीन तक कैसे पहुंचीं एडल्ट फ़िल्में

जिन फिल्मों को परिवार के साथ नहीं देख सकते, वो हमारे बारे में क्या बताती हैं?

चरमसुख, चरमोत्कर्ष, ऑर्गैज़म: तेजस्वी सूर्या की बात पर हंगामा है क्यों बरपा?

चरमसुख, चरमोत्कर्ष, ऑर्गैज़म: तेजस्वी सूर्या की बात पर हंगामा है क्यों बरपा?

या इलाही ये माजरा क्या है?

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे शख्स से बच्चे ने पूछा- मैं सबको कैसे बताऊं कि मैं गे हूं?

जवाब दिल जीत लेगा.

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.