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फ्री सॉफ्टवेयर- ताकि आप कंप्यूटर को चलाएं, न कि वो आपको

हर नए क्षेत्र में बढ़ाया हमारा कदम नए तरह के मानवाधिकारों की मांग करता है. सारे मानवाधिकार एक-दूसरे पर निर्भर हैं. अगर किसी एक क्षेत्र में मानवाधिकारों का हनन होता है तो आपके लिए अपने बाकी हक़ बचाना मुश्किल हो जाता है.

दुनियाभर में रिसर्च पर सबसे ज़्यादा खर्च गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियां करती हैं. ज़ाहिर तौर पर ये कमाई करने का भी मंसूबा रखती हैं. दुनिया इसी नियम पर चलती है लेकिन ऐसे में भी एक पागल ऐसा है, जो कहता है कि महीनों-सालों की मेहनत से बनने वाले सॉफ्टवेयर लोगों की आज़ादी का ख़्याल रखकर बनाए जाने चाहिए. इसके लिए उसने आज ही के दिन, यानी अक्टूबर की चौथी तारीख को 1985 में ‘फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन’ बनाई थी. महंगी लाइसेंस फीस और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की बहस के बीच फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन आज भी अपने मिशन पर कायम है. आज हम इस फाउंडेशन और इसे बनाने वाले पागल, माने रिचर्ड स्टॉलमैन के बारे में जानेंगे.

क्या है फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन ?

मान लीजिए कि आप एक सॉफ्टवेयर खरीदना चाहते हैं, मिसाल के लिए फोटोशॉप. आपके पास दो ही रास्ते हैं. आप या तो बदमाशी कर के क्रैक वर्ज़न चलाएं, या फिर आपको फोटोशॉप बनाने वाली कंपनी अडोबी को लाइसेंस फीस चुकानी पड़ेगी. कंपनी आपको फोटोशॉप का रजिस्टर्ड वर्ज़न देगी लेकिन कंपनी आपको पूरा सॉफ्टवेयर कभी नहीं देती. वो आपको एक एग्ज़ीक्यूटेबल (.exe) फाइल बस देगी और साथ में काम आने वाली कुछ और फाइलें. सोर्स कोड (वो कप्यूटर कोड जिस से सॉफ्टवेयर बनाया गया है, अब भी नहीं समझ आया तो किसी बीटेक वाले से पूछिए) कंपनी के पास ही रहेगा.

जब सॉफ्टवेयर आपके मन का काम करने से साफ मना कर देता है
जब सॉफ्टवेयर आपके मन का काम करने से साफ मना कर देता है.

इससे होता ये है कि आप फोटोशॉप पर वो सारे काम ही कर सकते हैं, जो अडोबी आपको करने देगी. आप सॉफ्टवेयर में न कुछ जोड़ सकते हैं, न कुछ घटा सकते हैं. बस फ्रस्टेट हो सकते हैं.

इसके खिलाफ खड़ा किया गया ‘फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट’ जो कंप्यूटर कोड पर यूनिवर्सल फ्रीडम की बात करता है. इस मूवमेंट की फिलॉसफी है कि कंप्यूटर एक ऐसी मशीन बने जो लोगों को करीब लाए और साथ काम करने से न रोके. माने लोगों को सॉफ्टवेयर चलाने बस की आज़ादी न हो, उन्हें सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को भी पढ़ने-समझने का मौका मिले. वो चाहें तो सोर्स कोड में अपनी समझ के हिसाब से बदलाव करें और चाहें तो इस सॉफ्टवेयर को और लोगों में बांटें. इसका मतलब हुआ कि लोग कॉपीराइट सॉफ्टवेयर से बचें.

ये मुफ्त सॉफ्टवेयर का आइडिया था किसका?

रिचर्ड स्टॉलमैन ने 1985 में फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन शुरू की थी
रिचर्ड स्टॉलमैन ने 1985 में फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन शुरू की थी.

एक क्रांतिकारी का. गलाकाट स्पर्धा के बीच किसी भी चीज़ के मुफ्त होने की पैरवी करने वाला आदमी क्रांतिकारी ही कहलाएगा. या फिर पागल. मुझे पागल शब्द पसंद है. हां तो फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट शुरू किया था रिचर्ड स्टॉलमैन ने. रिचर्ड बचपन से कम्प्यूटर कोडिंग में तेज़ थे. बड़े होकर पढ़ने हार्वर्ड गए. 1971 में रिचर्ड एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब से जुड़े. यहीं वो अमरीका में चल रहे हैकर मूवमेंट से जुड़े. हैकर मूवमेंट के कंप्यूटर प्रोग्रामर सीखने के मकसद से कंप्यूटर कोड लिखा करते थे, बिना किसी फायदे की उम्मीद से. लेकिन फिर ये मूवमेंट दरकने लगा. कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड लोगों को देना बंद किए और 1976 में अमरीका में कॉपीराइट एक्ट लागू हुआ. इसने सोर्स कोड पर प्रोग्रामरों की पकड़ को लगभग खत्म कर दिया.

कॉपीराइट से भी दिक्कत हो सकती है?

हां. इस दिक्कत को रिचर्ड के साथ हुए एक वाकये से समझा जा सकता है. एमआईटी में रिचर्ड और साथी प्रोग्रामरों ने प्रिंटर के लिए इस तरह का कोड लिखा था जो कंटेंट प्रिंट होने के बाद यूज़र को नोटिफिकेशन भेज देता था. एक दिन रिचर्ड ऑफिस पहुंचे तो उन्होंने देखा कि ऑफिस में नया प्रिंटर आया है. रिचर्ड ने जब इस प्रिंटर को प्रोग्राम करने के लिए कंपनी से सोर्स कोड मांगा तो Xerox ने मना कर दिया. रिचर्ड एक तरह से Xerox के फायदे की ही बात कर रहे थे. लेकिन कंपनी का दिमाग नहीं चलना था तो नहीं चला.

निजी कंपनियां लाइसेंस फीस के नाम पर मनमानी वसूली करती हैं (जिफः मनी प्रोग्रेस)

जब रिचर्ड को लगा कि आगे चलकर कॉपीराइट का इस्तेमाल इसी तरह बढ़ता रहेगा तो उन्होंने 1983 में फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट खड़ा किया. इसके तहत उन्होंने लिनक्स से मिलता-जुलता एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम GNU बनाना शुरू किया. ये एक ‘फ्री’ सॉफ्टवेयर था, जिसे लोग एक बार खरीदकर अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकते थे. 1985 में रिचर्ड ने इस मूवमेंट को सहारा देने के लिए फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन की शुरुआत की. फाउंडेशन शुरू के दिनों में GNU पर काम करता रहा. अब फाउंडेशन का ज़्यादातर वक्त लोगों को फ्री सॉफ्टवेयर के बारे में जागरूक करने और उसके लिए कैंपेनिंग करने में जाता है.

बेहतर क्वालिटी की दौड़ में फ्री सॉफ्टवेयर कहां ठहरता है? 

‘द डार्क नाइट’ (2008) में जोकर कहता है, ‘इफ यू आर गुड एट समथिंग, नेवर डू इट फॉर फ्री.’ माने किसी काम में अच्छे हो तो उसे मुफ्त में कभी न करो. यही कहना उन कंपनियों का भी है जो अपने सॉफ्टवेयर के लिए महंगी लाइसेंस फीस वसूलती हैं. उनका कहना होता है कि ये पैसा वो रिसर्च में लगाती हैं ताकि और बेहतर सॉफ्टवेयर बनाए जा सकें. फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट इस रेवेन्यू साइकल को तोड़ता है. ज़ाहिर है, कम पैसा होने पर कम लोग कंप्यूटर कोड और रिसर्च में रुचि लेंगे. ये बहस ‘एक्टिविज़्म’ और ‘एक्सिलेंस’ के बीच है. इसका कोई सटीक जवाब नहीं है.

GNU (जिसका मैस्कट बीच में नज़र आ रहा है), FSF का बनाया एक फ्री ऑपरेटिंग सिस्टम है
GNU (जिसका मैस्कट बीच में नज़र आ रहा है), FSF का बनाया एक फ्री ऑपरेटिंग सिस्टम है.

लेकिन ज़रूरी है कि आप कंप्यूटर को चलाएं, न कि वो आपको

कंप्यूटर हमारी ज़िंदगी में इस तरह घुस चुका है कि अब उसके बिना जीवन की कल्पना मुश्किल है. ये स्टोरी भी एक कंप्यूटर पर लिखी जा रही है और एक कंप्यूटर पर पढ़ी भी जाएगी. ज़रूरी है कि इस सवाल पर बात हो कि हमारे और कंप्यूटर में से मालिक कौन है? एक कमांड देने पर कंप्यूटर उसे पूरा कर दे, उतने भर से आप बीस नहीं हो जाते.

इंटरनेट के आने के बाद साइबर स्पेस में आज़ादी का सवाल भी पैदा हो गया है. जिस तरह सुबह ऑफिस के लिए निकलते वक्त आपको गूगल मैप्स का एक नोटिफिकेशन मिल जाता है कि आज रास्ते में ट्रैफिक जाम मिलेगा, उससे अंदाज़ा लगा लें कि आपसे हज़ारों किलोमीटर दूर बैठी कंपनियां आपके और आपकी ज़िंदगी के बारे में कितना जानती हैं. एमेज़़ॉन ने तो किंडल वालों को बिना बताए उनके सिस्टम से ‘1984’ किताब डिलीट कर दी थी. फिर सरकारी एजेंसियों द्वारा कराई जाने वाली जासूसी भी है. एडवर्ड स्नोडन वाला मामला हमारे सामने है ही.

यहां फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन की फिलॉसफी बड़े काम की है. रिचर्ड कहते भी हैं कि फ्री सॉफ्टवेयर की लड़ाई यूज़र की प्राइवेसी की लड़ाई भी है और नेट न्यूट्रैलिटी की भी. इस स्टोरी की शुरुआत में लिखी दो पंक्तियां रिचर्ड की ही हैं. फ्री सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल बढ़े और कॉपीराइट सॉफ्टवेयर को छोड़ने वालों के लिए ऑप्शन मौजूद रहें, इसके लिए फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन के इंजीनियरों और वॉलेंटियरों ने मिलकर GNU ऑपरेटिंग सिस्टम के अलावा लगभग 5000 प्रोग्राम और टूल बनाकर FSF/UNESCO free software directory में अपलोड कर दिए हैं, जिन्हें कोई भी डाउनलोड कर सकता है. दुनियाभर के प्रोग्रामरों के अलावा सरकारें तक फ्री सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती हैं.


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