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स्वामीनाथन कमेटी की वो बातें, जिनकी वजह से MP के किसान गदर काटे हैं

एमपी में किसानों के हिंसक प्रदर्शन पर राजनीति शुरू हो चुकी है. बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर किसानों को भड़काने और खुद प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप लगा रही हैं. इन सबसे दूर हम आपको बताएंगे कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के प्रदर्शनों में क्या समानता है, यहां के किसानों की दिक्कतें क्या हैं और स्वामीनाथन कमेटी की वो सिफारिशें, जो किसानों के अच्छे दिन लाने के लिए सोची गई थीं.

मध्य प्रदेश में हिंसक हो चुका किसान आंदोलन आइसबर्ग जैसा है. किसानों का 25 ट्रक फूंकना और गोलीबारी में 6 किसानों का मारा जाना आइसबर्ग का वो हिस्सा है, जो हमें दिख रहा है. लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा अब तक अनदेखा है.

महाराष्ट्र से शुरू हुआ किसान आंदोलन जब मध्य प्रदेश पहुंचा, तो इसे मंदसौर में मैदान मिला. गूगल पर मंदसौर की लोकेशन देखिए. एमपी का ये जिला गुजरात और राजस्थान के करीब है. गुजरात में इस साल के आखिरी महीने दिसंबर में और बाकी दोनों राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं. किसान आंदोलन इन चुनावों का प्लेटफॉर्म बनाते नज़र आ रहे हैं.

गूगल पर मंदसौर की लोकेशन

गुजरात में पिछले साल पटेलों ने आरक्षण के लिए प्रदर्शन किया था, जिसमें लोगों के घर, गाड़ियां और पुलिस चौकियां जला दी गई थीं. अहमदाबाद और सूरत जैसे जिलों में तोड़फोड़, आगजनी हुई और कर्फ्यू लगा. इसे 2002 के दंगों के बाद सबसे बड़ी हिंसा माना गया.

गुजरात में पाटीदार आंदोलन के दौरान की एक तस्वीर
गुजरात में पाटीदार आंदोलन के दौरान की एक तस्वीर

1 जून को शुरू हुआ मध्य प्रदेश के किसानों का प्रदर्शन 6 जून को हिंसक हो गया, जिसके परिणाम सामने हैं. अब ये हवा राजस्थान पहुंच रही है. 4 जून को राजस्थान के चुरू में किसानों ने बिजली और कर्जमाफी की मांग पर सरकार-विरोधी नारे लगाए. वहां भी किसानों के उग्र प्रदर्शन की आशंका है.

मंदसौर में किसानों का नेतृत्व कौन कर रहा है

हार्दिक पटेल गुजरात के पाटीदार आंदोलन का चेहरा थे, लेकिन हफ्तेभर की कवायद के बाद भी एमपी से कोई ऐलानिया आवाज नहीं, बल्कि शोर आ रहा है. एमपी के एक बड़े अखबार के मुताबिक मंदसौर में कोई बड़ा चेहरा किसानों का नेतृत्व नहीं कर रहा है. 6 जून को उग्र प्रदर्शन करने वाले अधिकतर युवा किसान थे. हालांकि, इस आंदोलन की तैयारी दो महीने पहले ही शुरू हो गई थी. किसान यूनियन दो महीने से गांव के लोगों को लगातार फोन और मेसेज करके साथ जोड़ रहा था.

मंदसौर के अस्थिर हालात
मंदसौर के अस्थिर हालात

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के आंदोलन में क्या समानता है

महाराष्ट्र में किसान आंदोलन नासिक, अमहदनगर और पुणे से सतारा, सांगली और कोल्हापुर तक फैला है. मध्य प्रदेश में यही अखाड़ा रतलाम से मंदसौर और नीमच तक बना हुआ है. ये दोनों बेल्ट अपने राज्यों के पश्चिमी इलाके में आती हैं, जहां बाकी राज्य के मुकाबले आर्थिक रूप से मजबूत किसान रहते हैं. महाराष्ट्र में मराठवाड़ा और विदर्भ के किसानों की बहुत बुरी है और मध्य प्रदेश में यही हाल बुंदेलखंड का है.

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क्या उगाते हैं रतलाम, मंदसौर और नीमच के किसान

सोयाबीन, गेहूं और चना जैसी फसलें पूरे मध्य प्रदेश में होती हैं, लेकिन आंदोलन वाली जगहों के किसान मेथी, धनिया, जीरा और अजवाइन जैसे मसाले और अदरक, इसबगोल, मूसली और अश्वगंधा जैसी औषधियां भी उगाते हैं. महाराष्ट्र में भी आंदोलन वाले जिलों के किसान ज्यादा दूध देने वाली क्रॉसब्रीड गायों में निवेश करने के अलावा अंगूर, प्याज और अनानास जैसी चीजें उगाते हैं.

मध्य प्रदेश के किसानों की असल समस्या क्या है

मौजूदा समस्या फसलों की कीमत घटने की वजह से है. इस साल किसानों का प्रोडक्शन अच्छा रहा, तो नोटबंदी ने मुश्किल कर दी. इससे किसानों को फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल रहा. जैसे मेथी पिछले साल 4000-4500 रु. प्रति क्विंटल बिकी थी, जबकि इस साल इसकी कीमत 2500-3000 रु. प्रति क्विंटल रह गई. नासिक में प्याज पिछले साल 800 रु. प्रति क्विंटल तक बिका था, लेकिन इस साल ये 450 रु. प्रति क्विंटल ही बिका.

मंदसौर में अब ये देखने को मिल रहा है
मंदसौर में अब ये देखने को मिल रहा है

अंगूर की कीमत भी पिछले साल 50 रु. प्रति किलो के मुकाबले इस साल 15 रु. प्रति किलो रह गई. सोयाबीन भी 3500 रु. प्रति क्विंटल से 2700 रु. प्रति क्विंटल रह गया. आंध्र प्रदेश के गुंटूर और कुरनूल के किसान और तेलंगाना के खम्माम के किसान भी प्रभावित हैं. किसानों को जो पेमेंट कैश में मिलना था, उसका एक हिस्सा नोटबंदी के फैसले की वजह से या तो लटका है या मर चुका है. बैंक का कर्ज भी सिर पर है.


ऐसे में उग्र होकर प्रदर्शन करने वाले अधिकांश किसान स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे हैं. आइए जानते हैं स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें:

प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन
प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन

18 नवंबर 2004 को प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसे देश में किसानों की हालत सुधारने के रास्ते खोजने थे. करीब दो साल बाद 2006 में कमेटी ने अपनी सिफारिशें दे दीं, जो अब तक लागू नहीं की जा सकीं. तब की कांग्रेस सरकार और अब की बीजेपी सरकार ने इन सिफारिशों को सीधे तौर पर लागू नहीं किया. एक किसान नीति बनाई गई और कहा गया कि सरकार की नई योजनाएं और फैसले कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही लिए जा रहे हैं. स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें:

#1. लैंड रिफॉर्म के लिए: किसानों को कितनी जमीन मिले, ये हमारे देश में बड़ा मसला है. खेती और बाग की जमीन को कॉरपोरेट सेक्टर या खेती के अलावा किसी भी दूसरे मकसद के लिए न दिया जाए. ‘नेशनल लैंड यूज अडवाइजरी सर्विस’ बनाया जाए, जो मौसम और बिजनेस जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए फैसला ले सके कि जमीन को किस उपयोग में लाया जाएगा.

#2. सिंचाई के लिए: नियमों-कानूनों में सुधार किया जाए, ताकि किसानों को लगातार और जरूरत के मुताबिक पानी मिल सके. रेनवाटर हार्वेस्टिंग के जरिए पानी की सप्लाई अनिवार्य कर देनी चाहिए. कुओं को रीचार्ज करने का प्रोग्राम शुरू करना होगा.

#3. प्रोडक्शन के लिए: दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय किसान उपलब्ध जमीन के अनुपात में प्रोडक्शन नहीं कर पाते. इसलिए सिंचाई, पानी निकालने, वाटर हार्वेस्टिंग, रिसर्च डिवेलपमेंट और रोड कनेक्टिविटी के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए सार्वजनिक निवेश को बढ़ाना होगा. मिट्टी के पोषण से जुड़ी कमियों को सुधारने के लिए मिट्टी की टेस्टिंग वाली लैबों का बड़ा नेटवर्क तैयार करना होगा.

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#4. क्रेडिट और बीमा के लिए: सरकार को क्रेडिट सिस्टम उन किसानों तक पहुंचाना होगा, जो वाकई गरीब और जरूरतमंद हैं. सरकार की मदद से किसानों को मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर सीधे 4% कम की जाए. जब तक किसान कर्ज चुकाने की स्थिति में न आ जाए, उससे कर्ज न वसूला जाए. किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए अग्रीकल्चर रिलीफ फंड बनाया जाए. किसानों और फसल का साथ में बीमा किया जाए.

#5. फूड सिक्यॉरिटी के लिए: यूनिवर्सल पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाया जाए, जिसके लिए GDP के 1% हिस्से की जरूरत होगी. पंचायत जैसी लोकल बॉडीज की मदद से सरकार की उन योजनाओं को री-ऑर्गनाइज किया जाए, जो कुपोषण दूर करने के लिए चलाई गईं. महिला स्वयंसेवी ग्रुप्स की मदद से ‘सामुदायिक खाना और पानी बैंक’ स्थापित करने होंगे, जिनसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को खाना मिल सके.

#6. किसानों की खुदकुशी रोकने के लिए: उन्हें कम कीमत पर बीमा और चिकित्सा सुविधा दिलवाई जाए. नेशनल रूरल हेल्थ मिशन को उन हिस्सों तक पहुंचना होगा, जहां किसान ज्यादा खुदकुशी करते हैं. सरकार किसानों के लिए जो काम करती है, उन्हें किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्य-स्तर पर कमीशन बनाया जाए, जिसमें किसान ही सर्वेसर्वा हों. हर फसल का बीमा हो. किसानों को हर जगह सस्ती दरों पर बीज और खाद उपलब्ध कराई जाए.

इसके अलावा स्वामीनाथन कमेटी की सबसे बड़ी सिफारिश ये थी कि सरकार किसानों की फसलों को लागत मूल्य से सीधे-सीधे डेढ़ गुना कीमत पर खरीदे और आगे अपने हिसाब से बेचे. (स्वामीनाथन कमेटी ने इनके अलावा भी कई सिफारिशें दी थीं.)

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सिफारिशें लागू करने पर क्या कहती है बीजेपी सरकार

RTI कार्यकर्ता पीपी कपूर ने मार्च 2016 में प्रधानमंत्री कार्यालय और हरियाणा सरकार के कार्यालय में RTI डालकर पूछा था कि-
आयोग की सिफारिशें केंद्र सरकार को कब मिलीं
आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने क्या किया
आयोग की सिफारिशों को लागू कराने में मौजूदा हालात क्या हैं

जून में मिले जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि लागत मूल्य पर 50% बढ़ोतरी मुमकिन नहीं है, क्योंकि इससे मंडी के हालात खराब हो सकते हैं. वहीं हरियाणा सरकार ने ये कहा था कि उन्हें कमेटी की सिफारिशों के बारे में जानकारी ही नहीं है. केंद्र सरकार की तरफ से जवाब देने वाली उप-सचिव सुशीला अनंत ने कहा था कि प्रो. स्वामीनाथन ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय किसान नीति का मसौदा तैयार किया था, जिसके आधार पर 2007 में बनी राष्ट्रीय किसान नीति अब तक चलन में है.

2006 में कमेटी की सिफारिशें लागू करवाने के लिए बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर ओमप्रकाश धनखड़ ने खूब धरना-प्रदर्शन किया था, लेकिन हरियाणा की मौजूदा सरकार के कृषिमंत्री रहते हुए उन्होंने जवाब दिया था कि जब सरकार ने कमेटी के 90% सुझाव मान लिए हैं, तो स्वामीनाथन के नाम का ढिंढोरा पीटने का कोई मतलब नहीं है. वहीं बीजेपी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी कैलाश विजयवर्गीय ने जुलाई 2016 में कहा था, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी किसानों की मांगें पूरी कर दी हैं. स्वामीनाथन आयोग का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है.’

(दि इंडियन एक्सप्रेस से इनपुट के साथ)


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