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रामचंद्र छत्रपतिः वो पत्रकार, जिसने राम रहीम के खिलाफ आवाज़ उठाई और मार दिया गया

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हरियाणा का सिरसा शहर. तारीख – 24 अक्टूबर, 2002. शाम को निकलने वाला एक ‘स्थानीय’ अखबार चलाने वाला एक पत्रकार-संपादक कुछ देर पहले ही घर पहुंचा है. उसे बाहर से आवाज़ लगाई जाती है. वो बाहर आता है. जैसे ही वो दहलीज़ लांघता है, उसे पॉइन्ट ब्लैंक रेज पर गोलियों से भून दिया जाता है. पांच गोलियां उसके शरीर में धंस जाती हैं. इसी के साथ राम रहीम का ‘पूरा सच’ सामने लाने वाले पत्रकार संपादक रामचंद्र छत्रपति खुद खबर बन जाते हैं.

हम रामचंद्र छत्रपति को इसलिए याद कर रहे हैं कि उनकी हत्या के मामले में पंचकुला की एक अदालत अपना फैसला सुनाने वाली है. साध्वियों से रेप के मामले में 20 साल की सज़ा काट रहे डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख रहे राम रहीम को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है.

इस केस की पूरी कहानी रौंगटे खड़े कर देने वाली है, जिसे ‘दी लल्लनटॉप’ ने रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति के बेटे से बात कर के तैयार किया है. पढ़िएः

देखें वीडियोः रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस

साध्वियों से रेप वो पहला मामला नहीं था, जब रामचंद्र छत्रपति ने डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ रिपोर्टिंग की थी. डेरा में होने वाले भ्रष्टाचार पर वो खबरें छापते रहते थे. लेकिन एक ऐसा संस्थान, जहां राज्यों के सीएम तक हाज़री लगाते हों, एक स्थानीय अखबार को उतना गंभीर खतरा नहीं मानता था. फिर 13 मई, 2002 को एक डेरा की एक साध्वी ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक लेटर लिख कर डेरा में हो रहे साध्वियों के यौन शोषण और रेप के बारे में बताया. इस लेटर की एक कॉपी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, हरियाणा पुलिस के अफसरों और मीडिया को भी भेजी गई. इस पर छिटपुट रिपोर्टिंग हुई, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं. लेकिन सिरसा में दबी ज़बान में चर्चाएं होने लगीं.

एक ड्राइवर की ज़िद ने डेरा को डुबो दिया

30 मई, 2002 को सिरसा के एक बाज़ार में पुलिस बेतरतीब ढंग से खड़ी गाड़ियां हटाने पहुंची. इनमें से एक गाड़ी डेरा सच्चा सौदा की थी. पुलिस जब उस गाड़ी को हटाने पहुंची, तो उसका ड्राइवर अड़ गया और डेरा की धौंस दिखाने लगा. बहस बढ़ी तो पुलिस अधिकारी ने एक पर्चा निकाल लिया. ये डेरा की साध्वी के खत की कॉपी थी. उस शाम इस खत की कॉपियां सिरसा के बाज़ार में बांटी गईं. इसी शाम रामचंद्र छत्रपति ने ‘पूरा सच’ में ये वाकया छाप दिया जिसमें साध्वी के खत और उसके मजमून का ज़िक्र था.

डेरे की एक साध्वी ने डेरे में हो रहे यौन शोषण के बारे में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ये खत लिखा था.
डेरे की एक साध्वी ने डेरे में हो रहे यौन शोषण के बारे में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ये खत लिखा था.

साध्वी को चुप करने के लिए उसके भाई को मार डाला

10 जुलाई, 2002 को खबर आई कि डेरा सच्चा सौदा में मैनेजर रहे रंजीत सिंह की हत्या हो गई है. रंजीत साध्वी के गुमनाम खत के आने से कुछ समय पहले ही अपनी बहन को लेकर डेरा छोड़कर अपने घर कुरुक्षेत्र चले गए थे. इसलिए डेरा को लगता था कि उस खत के पीछे रंजीत हैं. यहां से मामला गंभीर हो गया. डेरा अपनी साख बचाने के लिए कुछ भी करने को आमादा था. रंजीत के बाद उसका ध्यान छत्रपति की ओर हो गया, जो लगातार डेरा पर रिपोर्टिंग कर रहे थे. उन्हें धमकियां मिलने लगीं.

रंजीत सिंह. डेरा का मानना था कि साध्वी के गुमनाम खत रंजीत की बहन ने लिखा था
रंजीत सिंह. डेरा का मानना था कि साध्वी के गुमनाम खत रंजीत की बहन ने लिखा था.

बात नहीं बनी तो झूठे केस में फंसाने की कोशिश की

जब धमकी से बात नहीं बनी, तो डेरा के एक अनुयायी ने रामचंद्र छत्रपति के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत एक शिकायत दर्ज करा दी. दावा किया कि छत्रपति ने उसे डेरा में घुस कर जातिसूचक गालियां दी हैं. लेकिन शिकायत में वारदात की जो तारीख दर्ज करवाई गई थी, उस दिन छत्रपति और उनका परिवार एक रिश्तेदार की शादी में पंजाब गए हुए थे. उन्होंने पुलिस को शादी की तस्वीरें दिखाईं. साफ हो गया कि ये केस जानबूझ कर छत्रपति को तंग करने के लिए दर्ज कराया गया था.इसके बाद भी डेरा ने छत्रपति का पीछा नहीं छोड़ा. डेरे से मिल रही धमकियों से परेशान होकर छत्रपति ने सिरसा के एसपी को एक चिट्ठी लिखी. लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई.

उधर चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए 24 जुलाई, 2002 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने साध्वियों से रेप के मामले में सीबीआई को जांच के आदेश दे दिए. छत्रपति लिखते रहे. 20 अक्टूबर, 2002 को सिरसा में ‘मीडिया और लोकतंत्र’ नाम से एक कार्यक्रम हुआ जिसमें नामी सेफोलॉजिस्ट और समाजसेवी योगेंद्र यादव भी पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में तकरीबन 250 लोगों के बीच छत्रपति ने कहा कि उनकी रिपोर्टिंग के चलते उन्हें धमकियां मिल रही हैं और उनकी जान को खतरा है.

छत्रपति की हत्या से ठीक चार दिन पहले उन्होंने डेरा में चल रहे यौन शोषण के बारे में योगेंद्र यादव को बताया था
छत्रपति ने अपनी हत्या से ठीक चार दिन पहले उन्होंने डेरा में चल रहे यौन शोषण के बारे में योगेंद्र यादव को बताया था.

फिर वही हुआ जिसका डर छत्रपति ने ज़ाहिर किया था

एक भरी सभा में अपनी जान को खतरा बताने के चौथे दिन छत्रपति पर हमला हो गया. हमलावर पहले उनके ऑफिस गए लेकिन वहां उन्हें हमला करने का मौका नहीं मिला. इसलिए घर पर पहुंचे. छत्रपति का परिवार उस दिन घर पर ही था. किस्मत से सिर्फ छत्रपति को गोलियां लगीं. गोलियां चला कर दोनों हमलावर भागे. लेकिन छत्रपति के घर से कुछ ही दूर एक पुलिस पिकेट था, जहां एक हमलावर पकड़ा गया. उसकी निशानदेही पर उसका साथी गिरफ्तार हुआ. एक पत्रकार को सरेआम गोलियों से भूनने के खिलाफ 25 अक्टूबर, 2002 को सिरसा बंद रहा. छत्रपति पर हमले के विरोध में 16 नवंबर, 2002 को सिरसा में मीडिया महापंचायत भी हुई.

हत्या में डेरा की भूमिका

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि दोनों हमलावर (कुलदीप और निर्मल) डेरा सच्चा सौदा के साधु थे. छत्रपति पर जिस लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चली थी, वो डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर किशन लाल के नाम से रजिस्टर्ड थी. कुलदीप और निर्मल के पास से बरामद वॉकी-टॉकी भी ‘मेसर्स डेरा सच्चा सौदा’ के नाम से ही रजिस्टर्ड था. पुलिस ने इन्हीं तीनों को हत्या का आरोपी बनाया.

छत्रपति पर गोली चलाने वाले दोनों आरोपी डेरा सच्चा सौदा के साधु थे. (फोटोःडेरा सच्चा सौदा डॉट ओआरजी)
छत्रपति पर गोली चलाने वाले दोनों आरोपी डेरा सच्चा सौदा के साधु थे. (फोटोःडेरा सच्चा सौदा डॉट ओआरजी)

पूरे 28 दिन ज़िंदा रहे छत्रपति, लेकिन बयान नहीं हुए

घायल छत्रपति रोहतक के पीजीआई अस्पताल ले जाए गए थे. पुलिस को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि उनपर हमला डेरा मैनेजर ने नहीं बल्कि राम रहीम ने करवाया है. लेकिन अंशुल बताते हैं कि पुलिस ने राम रहीम का नाम दर्ज ही नहीं किया. अस्पताल में हरियाणा के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी छत्रपति से मिले और भरोसा दिलाया कि इंसाफ होगा, लेकिन पुलिस राम रहीम को बचाने में लगी रही. बाद में छत्रपति की तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने 21 नवंबर, 2002 को दुनिया छोड़ दी. तब तक हमले को 28 दिन बीत चुके थे, लेकिन उनका बयान लेने कोई मैजिस्ट्रेट अस्पताल पहुंचा ही नहीं.

सीएम से निराश होकर हाईकोर्ट जाना पड़ा 

छत्रपति की मौत के बाद चौटाला छत्रपति के परिवार से मिलने उनके घर भी पहुंचे थे. लेकिन पुलिस का रवैया नहीं ही बदला. दिसंबर 2002 में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने चौटाला को खत लिख कर मामले में दखल देने को कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ. हार कर जनवरी 2003 में अंशुल ने मामले की सीबीआई जांच के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक अर्ज़ी लगाई.

छत्रपति परिवार के मुताबिक तब के सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने उनके खत को गंभीरता से नहीं लिया था.
छत्रपति परिवार के मुताबिक तब के सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने उनके खत को गंभीरता से नहीं लिया था.

सीबीआई को भी धमकाया राम रहीम ने

अंशुल की याचिका का संज्ञान लेते हुए 10 नवंबर, 2003 को हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस और रंजीत सिंह मर्डर केस को एक मामला बनाकर जांच शुरू की. लेकिन राम रहीम मामले पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले आए, जो नवंबर 2004 में जाकर हटा. स्टे हटा तो डेरा सच्चा सौदा के ‘प्रेमियों’ ने 2005 में सीबीआई के खिलाफ चंडीगढ़ में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया. खबरे आईं कि डेरा के लोग मामले की जांच कर रहे अफसरों के पते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन सीबीआई डटी रही और 31 जुलाई, 2007 को साध्वी रेप केस, रंजीत सिंह मर्डर केस और रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में सीबीआई कोर्ट में चालान पेश हुए. इसी साल राम रहीम ने अपनी जान का खतरा बता कर सरकार से ज़ेड कैटगरी की सुरक्षा हासिल कर ली. राम रहीम ने कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी हाईकोर्ट में याचिकाएं लगाकर केस को धीमा करने की भरसक कोशिश की. 2014 में कोर्ट में सबूतों पर बहस पूरी हुई.

राम रहीम ने इस केस को जितना हो सका, लेट करने की कोशिश की.
राम रहीम ने इस केस को जितना हो सका, लेट करने की कोशिश की.

गवाह, जो पलटा, फिर लौट आया

इस मामले में राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह की गवाही का बड़ा वज़न रहा है. खट्टा ने गवाही दी थी कि राम रहीम ने उनके सामने अपने आदमियों से कहा था कि राम चंद्र छत्रपति को रास्ते से हटाना ज़रूरी है. खट्टा के मुताबिक राम रहीम 23 अक्टूबर, 2002 की शाम, माने राम चंद्र छत्रपति की हत्या से एक दिन पहले जालंधर से सिरसा में डेरा मुख्यालय पहुंचा था. वहां निर्मल, कुलदीप और किशन लाल ने उसे पूरा सच में छपी खबर के बारे में बताया. इसके बाद राम रहीम ने इन तीनों से राम चंद्र छत्रपति की हत्या करने को कहा. सीबीआई ने भी इस हत्याकांड में राम रहीम को मुख्य साज़िशकर्ता माना था.

2007 में जब सीबीआई ने चालान पेश किया था, तब खट्टा रामचंद्र छत्रपति के साथ-साथ रंजीत सिंह की हत्या के मामले में भी मुख्य गवाहों में से एक थे. लेकिन 2012 में एक रोज़ खट्टा अपने बयान से पलट गए. अगस्त 2017 में राम रहीम को साध्वियों के मामले में सज़ा होने के बाद खट्टा एक बार फिर सीबीआई कोर्ट के सामने आए और कहा कि उन्हें राम रहीम और उसके गुंडों की तरफ से धमकियां मिल रही थीं, इसलिए वो बयान से पीछे हटे थे. लेकिन खट्टा की गवाही दोबारा होना आसान नहीं था. राम रहीम खट्टा की गवाही को खारिज करवाने सुप्रीम कोर्ट तक गया. लेकिन आखिर सुप्रीम कोर्ट ने राम रहीम खट्टा को गवाही देने की इजाज़त दे दी. इसके बाद खट्टा ने सीबीआई अदालत में गवाही से पलटने के लिए माफी मांगी और बयान दर्ज कराए. अब खट्टा डेरा अनुयायियों को जबरन नपुंसक बनाने के मामले में भी गवाह हैं.

खट्टा सिंह की गवाही राम रहीम के सभी मामलों में अहम है.
खट्टा सिंह की गवाही राम रहीम के सभी मामलों में अहम है.

इतनी दहशत कि अदालत नहीं जाएगा राम रहीम

इस मामले में अदालत की कार्यवाही अपने आखिरी चरण में है. अदालत अपना फैसला सुनाने को है. राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है. हरियाणा पुलिस ने सीबीआई अदालत से राम रहीम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश करने की इजाज़त मांगी है. क्योंकि साध्वियों वाले मामले में राम रहीम को सज़ा सुनाए जाने के दिन डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने जमकर तोड़फोड़ मचाई थी. उस दिन 34 लोगों की जान गई थी. अदालत ने इसकी इजाज़त दे दी है.

अगर राम रहीम इस मामले में दोषी पाया जाता है, तो उसके जेल से बाहर निकलने के सपनों पर तगड़ा ब्रेक लग जाएगा. क्योंकि ये आखिरी केस नहीं है, जिसमें राम रहीम मुख्य आरोपी है. डेरा सच्चा सौदा में लगभग 400 प्रेमियों को नपुंसक बनाने के मामले में भी आदालती कार्यवाही चल रही है और सौ से ज़्यादा नपुंसक प्रेमियों ने अदालत में गवाही भी दे दी है. तो राम रहीम बड़ी मुसीबत में है.


गुरमीत राम राम रहीम से जुड़ी सारी ‘द लल्लनटॉप’ की सारी कवरेज यहां पढ़ेंः

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