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PM मोदी ने दलित CM वाली घटना के लिए राजीव गांधी को जो कोसा, उसमें हुआ क्या था

मोदी जी बहुत चतुर नेता हैं. एक तीर से कई निशाने लगाने में एक्सपर्ट. 7 फरवरी को उन्होंने संसद में लंबा-चौड़ा भाषण दिया. पूरे भाषण में गांधी-नेहरू परिवार का जिक्र था. और इसी जिक्र में राजीव गांधी भी आए. और जिक्र आया ‘दलित सम्मान’ का. कि कैसे एक बार राजीव गांधी ने एक दलित नेता (जो कि CM भी था) की सरेआम बेइज्जती कर दी थी.

जिस दलित नेता को मोदी जी ने याद किया, उनका नाम था टी अंजाइया. कांग्रेस के नेता थे. दलित समुदाय से आते थे. आंध्र प्रदेश के 7वें मुख्यमंत्री थी. ये वो ही नेता थे, जो मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद बोले थे:

मैडम की कृपा से मैं यहां तक पहुंचा. अब उनके ही आदेश पर जा भी रहा हूं. न तो मुझे ये मालूम चला कि मैं मुख्यमंत्री क्यों बनाया गया था. न ही मुझे ये मालूम है कि मैं हटाया क्यों जा रहा हूं.

क्क्क्कक्
टी अंजाइया को हटाना इंदिरा के पक्ष में नहीं गया. आंध्र प्रदेश में एन टी रामा राव की जो लहर आई, उसमें थोड़ा हाथ अंजाइया और राजीव के बीच हुई घटना का भी था.

स्मृति ईरानी के लिए वोट मांगते वक्त भी सुना आए थे ये किस्सा
कांग्रेस में दो ही मैडम इतने बड़े कद की हुईं कि लोगों पर ‘कृपा’ कर सकें. एक हुईं इंदिरा गांधी. दूसरी हुईं सोनिया गांधी. टी अंजाइया ‘इंदिरा’ मैडम का जिक्र कर रहे थे. मोदी जी ने इनके ही जिक्र से राजीव गांधी का जिक्र कर कांग्रेस पर दलितों के अपमान का इल्जाम लगाया है. मगर ये पहला मौका नहीं था जब PM मोदी ने ये बात छेड़ी हो. इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त भी उन्होंने ये बात कही थी. मौका था स्मृति ईरानी के लिए वोट मांगने का. मोदी अमेठी पहुंचे थे. राहुल गांधी की इस सीट पर उनके खिलाफ खड़ी हुई थीं स्मृति ईरानी. इनके लिए चुनाव प्रचार करने जब मोदी अमेठी गए, तो उन्होंने वहां मौजूद जनता को याद दिलाने के अंदाज में कहा था:

राजीव गांधी बहुत आक्रामक स्वभाव के थे. याद है, किस तरह उन्होंने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री टी अंजाइया की सबके सामने बेज्जती की थी.

23 जून, 1980 को एक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई. राजीव राजनीति में नहीं आना चाहते थे. मगर संजय की मौत के बाद उनके पास कांग्रेस से दूर रहने का कोई विकल्प नहीं बचा था.
23 जून, 1980 को एक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई. राजीव राजनीति में नहीं आना चाहते थे. मगर संजय की मौत के बाद उनके पास कांग्रेस से दूर रहने का कोई विकल्प नहीं बचा था.

PM मोदी ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है
तब मोदी जी का मकसद अमेठी की जनता के बीच राजीव गांधी की ‘पोल’ खोलना था. उन्हें गांधी परिवार के ‘तिलिस्म’ से आजाद करना था. संसद में टी अंजाइया और राजीव के किस्से का जिक्र करके मोदी जी डबल निशाना मार रहे थे. एक ओर कांग्रेस को दलित विरोधी साबित करने की कोशिश कर रहे थे. दूसरी ओर आंध्र प्रदेश के नेताओं की नाराजगी (बंटवारे के बाद की मांगें पूरी न होने पर) पर ठंडे पानी की छींटे डालने की कोशिश की. तो मोदी ने जिस वाकये का जिक्र किया, वो क्या था. हुआ क्या था?

क्या था वो मामला जिसका मोदी ने जिक्र किया
ये सन् 1982 की बात है. इंदिरा थीं तब. देश की और कांग्रेस पार्टी की सर्वेसर्वा. राजीव राजनीति में घुस चुके थे. 23 जून, 1980. ये वो तारीख थी जब एक विमान हादसे में उनके भाई संजय गांधी की मौत हो गई. इसके बाद मां को संभालने, उन्हें सहारा देने के लिए राजीव उनके साथ हो लिए. इंदिरा ने उन्हें कांग्रेस का महासचिव बना दिया.

1983 में जब आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव का नतीजा आया, तो कांग्रेस
1983 में जब आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव का नतीजा आया, तो कांग्रेस को 60 सीटें मिलीं. उसे 145 सीटों का नुकसान हुआ था. तस्वीर में दिख रही हैं इंदिरा गांधी. उनके साथ हैं संजय की पत्नी मेनका गांधी. पीछे सोनिया गांधी भी नजर आ रही हैं.

एयरपोर्ट पर राजीव को लेने पहुंचे खुद मुख्यमंत्री
इन्हीं दिनों की बात है. राजीव को किसी निजी काम से आंध्र प्रदेश जाना पड़ा. हैदराबाद में बेगमपेट एयरपोर्ट था. वहीं उतरा राजीव का विमान. अब राजीव राजीव थे. इंदिरा के बेटे. कांग्रेस के वारिस. उनको देखने के लिए भीड़ जुट जाती थी. क्या आम, क्या खास, सब ‘मुंह खोलकर’ देखते राजीव को. मानो देखकर निहाल हो रहे हों. तो उस दिन भी ऐसा ही हुआ. कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच राजीव के आने की खबर फैल गई. उन्हें देखने के लिए एयरपोर्ट पर अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई. राजीव को रिसीव करने आए खुद मुख्यमंत्री टी अंजाइया. ये प्रोटोकॉल तो नहीं था, मगर कुछ चीजें अनकही होती हैं.

और राजीव ने मुख्यमंत्री पर चिल्लाते हुए कहा…
राजीव ने जब भीड़ को देखा, तो चिढ़ गए. टी अंजाइया ने देखा तो. कि राजीव उखड़े-उखड़े हैं. मगर उनको इस अनमनेपन की वजह समझ नहीं आई. सो उन्होंने एयरपोर्ट पर जुटी कार्यकर्ताओं की भीड़ को हटवाने का इंतजाम भी नहीं किया. राजीव और नाराज हो गए. कहते हैं कि इसी नाराजगी में राजीव गांधी CM अंजाइया पर जोर से चिल्ला दिए. उनको ‘मसखरा’ बोल दिया. अंजाइया क्या जवाब देते? उन्हें तो मुख्यमंत्री बनाया ही इंदिरा गांधी ने था.

एन टी रामा राव तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार थे. जब फिल्म छोड़कर राजनीति में घुसे, तब भी जनता ने दिल खोलकर उन्हें अपनाया.
एन टी रामा राव तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार थे. जब फिल्म छोड़कर राजनीति में घुसे, तब भी जनता ने दिल खोलकर उन्हें अपनाया.

इंदिरा ने अंजाइया से कहा- इस्तीफा दो
इस घटना के कुछ दिनों बाद, फरवरी 1982 को इंदिरा ने अंजाइया से इस्तीफा देने को कहा. अंजाइया आंध्र के बड़े दलित नेता थे. मगर जनता के बीच उनकी उतनी पकड़ नहीं थी. मतलब कि जैसे लोकप्रिय नेता होते हैं, वैसे लोकप्रिय नहीं थे अंजाइया. इंदिरा ने सोचा होगा कि उनका जाना भी ऐसे ही निपट जाएगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. जिस दिन अंजाइया ने इस्तीफा दिया, उससे एक दिन पहले उनके समर्थन में 30,000 लोगों की एक भीड़ जुटी. मगर अंजाइया ने कोई ना-नुकुर नहीं की. इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह भावानम वेंकटरामी रेड्डी को आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया.

एन टी रामा राव को खूब फायदा हुआ
मगर अंजाइया आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा साबित हुए. राजीव ने उनके साथ जो बर्ताव किया, उसपर खूब बातें हुईं. इस मामले का एक ऐंगल तो दलित सम्मान से जुड़ा. दूसरा ऐंगल ‘आंध्र सम्मान’ का भी बना. लोग कहने लगे कि राजीव ने न केवल दलित नेता का अपमान किया है, बल्कि पूरे आंध्र प्रदेश की बेइज्जती की है. इस मामले को सबसे ज्यादा भुनाया एन टी रामा राव ने. सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ.

2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी ने स्मृति ईरानी को उतारा. तब भी नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी के इस प्रसंग का जिक्र किया था. कांग्रेस काफी नाराज भी हुई थी. प्रियंका ने कहा था कि बीजेपी अमेठी की जमीन पर राजीव का अपमान करके बहुत गलत कर रही है.
2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी को उतारा गया. तब भी नरेंद्र मोदी ने राजीव के इस प्रसंग का जिक्र किया था. जवाब में प्रियंका ने कहा था कि बीजेपी अमेठी की जमीन पर राजीव का अपमान करने की गलती कर रही है.

और कांग्रेस मुंह के बल धड़ाम से गिर गई
1983 में आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए. तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार थे एन टी रामा. 350 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे. फिल्म के बाद राजनीति की राह पकड़ी थी. पार्टी बनाई- तेलुगू देशम पार्टी (TDP). 1982 में बनी थी ये पार्टी. 1983 में TDP पहली बार चुनाव लड़ रही थी. उसने राजीव के हाथों हुई टी अंजाइया की बेइज्जती को एक चुनावी मुद्दा बना दिया. उनके मुताबिक, ये ‘आत्मगौरवम’ का सवाल था. चुनाव का नतीजा अब इतिहास है. TDP को भारी बहुमत हासिल हुआ. 294 सीटों की विधानसभा में TDP ने 201 सीटें जीत लीं. कांग्रेस को 145 सीटों का नुकसान हुआ. वो 60 सीटों पर पहुंच गई.

तब राजनीति में नौसीखिया थे राजीव गांधी
इस हार के बाद राजीव ने बहुत बड़ा सबक सीखा होगा. वो राजनीति में नौसीखिया थे. पर सीख रहे थे. उन्होंने समझा होगा कि जातीय भावनाएं कितनी गहरी होती हैं. कि राजनीति करते वक्त बड़ा एहतियात रखना पड़ता है. कि आप एक के साथ कैसे बरतते हैं, इसका असर बाकियों पर भी हो सकता है.

21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या हुई. ये राजीव की अंतिम यात्रा के वक्त ली गई एक तस्वीर है.
21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या हुई. ये राजीव की अंतिम यात्रा के वक्त ली गई एक तस्वीर है.

एक आखिरी बात रह गई है
इस कहानी को यूं खत्म करना अच्छा नहीं लग रहा. इसीलिए एक दिलचस्प बात बताती हूं. राजीव वाली कहानी में टी अंजाइया के अलावा एक और किरदार था. बेगमपेट एयरपोर्ट. ये तीनों किरदार अब नहीं हैं. 1986 में टी अंजाइया गुजर गए. फिर मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या हुई. सबसे आखिर में नंबर आया बेगमपेट एयरपोर्ट. यहां कॉमर्शियल सेवाएं बंद हो चुकी हैं. उसकी जगह एक नए बने एयरपोर्ट ने ले ली है. उस नए हवाईअड्डे का नाम है- राजीव गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट.


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