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26 जनवरी को मोदी के मेहमान बन रहे ब्राज़ील के प्रेजिडेंट को नार्कोज़ के पाब्लो ने 'घिनहा’ क्यूं कहा?

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वैग्नर मोरा आजकल इफ्फी आए हुए हैं. अपनी फिल्म ‘मारिगेला’ के साथ. यहां इन्होंने ऐसी बात कह डाली है जिसे IFFI 2019 की सबसे विवादास्पद बात कहा जा रहा है. वो भी अपने ही प्रेजिडेंट के बारे में. क्या है वो बात? वैग्नर मोरा कौन हैं? इफ्फी मतलब क्या? प्रेजिडेंट कौन? आइए इस सब के उत्तर छोटे-छोटे पॉइंटर्स में जानते हैं.

# वैग्नर मोरा-

वैग्नर मोरा (तस्वीर: AP)
वैग्नर मोरा (तस्वीर: AP)

वैग्नर मोरा एक ब्राज़ीलियाई कलाकार हैं. हालांकि पूरी दुनिया में वो नार्कोज़ में अपने ‘पाब्लो एस्कोबार’ वाले किरदार के लिए जाने जाते हैं.

लेकिन वो सिर्फ एक्टर ही नहीं हैं. वो पत्रकार, संगीतकार और अब तो निर्देशक भी हो चुके हैं. इफ्फी में अपनी फिल्म लेकर आए हैं. ‘मारिगेला’. जो एक निर्देशक के तौर पर उनकी पहली फिल्म होगी. ब्राज़ीलियाई मूल के वैग्नर मोरा अब यूएस में सैटल हो गए हैं. शायद इसलिए ही वो ब्राज़ील के बारे में वो सब कह पाए, जिसकी बात हम आगे विस्तार से करेंगे.

# इफ्फी-

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का लोगो.
इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का लोगो.

इफ्फी का फुल फॉर्म है ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया’. ये फुल फॉर्म ही IFFI को काफी हद तक एक्सप्लेन कर देता है. भारत में होने वाला एक फेस्टिवल जिसमें देश-विदेश से आई फ़िल्में दिखाई जाती है. इन फिल्मों के साथ उनके कलाकार भी आते हैं. दर्शकों से रूबरू होते हैं. सवाल जवाब. समीक्षा. फीडबैक, बहसों और बातचीत के माध्यम से आम लोगों और फिल्ममेकर्स के बीच एक ‘टू वे कम्यूनिकेशन’ स्थापित होता है. किसी भी अन्य फिल्म फेस्टिवल की तरह इसमें भी कुछ बेहतरीन वर्ल्ड मूवीज़ पुरस्कृत भी होती हैं. 1952 से शुरू हुए इस फेस्टिवल को अब 67 साल हो चुके हैं. इसके पहले कुछ संस्करण देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित हुए थे. लेकिन 35वें फेस्टिवल से IFFI को एक स्थाई पता मिल गया- गोवा.

IFFI एक सालाना फिल्म फेस्टिवल है जिसे गोवा सरकार और सूचना और प्रसारण विभाग मिलकर आयोजित करते हैं. यानी भारत के ‘मामी’ या फ़्रांस के ‘कान’ फिल्म फेस्टिवल की तरह ये एक प्राइवेट या गैर-सरकारी आयोजन नहीं है.

# नार्कोज़-

पाब्लो एस्कोबार के किरदार में वैग्नर मोरा
पाब्लो एस्कोबार के किरदार में वैग्नर मोरा

वैग्नर मोरा ने बेशक कई अच्छे-बुरे प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाए. कई से उन्हें प्रसिद्धि भी मिली. लेकिन दुनिया भर में उन्हें उनके ‘पाब्लो एस्कोबार’ वाले रोल के लिए ही जाना जाता है. जो उन्होंने ‘नार्कोज़’ नाम की वेब सीरीज़ में निभाया था. नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने वाली वेब सीरीज़ ‘नार्कोज़’ कुछ सबसे बेहतरीन वेब सीरीज़ में से एक मानी जाती है. ये सीरीज़ ‘पाब्लो एस्कोबार’, उसके दुनिया भर में फैले ड्रग्स के कारोबार, अमेरिका में इसके कारण हो रही दिक्कतों और अमेरिकन ड्रग नियंत्रक एजेंसीज़ के काम-काज को बड़े ही रोमांचक ढंग से दिखाती है. यानी बेशक ये एक ‘फिक्शनल’ वेब सीरीज़ है, लेकिन पूरी तरह पाब्लो एक्सोबर की ज़िंदगी पर बेस्ड है. दस-दस एपिसोड के तीन सीज़न्स में फैली ये वेब सीरीज़ 1970 से 1993 तक का समय दिखाती है.

# पाब्लो एस्कोबार-

पाब्लो एस्कोबार (तस्वीर: AP)
पाब्लो एस्कोबार (तस्वीर: AP)

पाब्लो एस्कोबार. जिसके बारे में जितने सच हैं उतनी ही किंवदतियां. जैसे जब उसकी लड़की को ठंड लग रही थी तो उसने रात भर डॉलर्स जलाकर उसकी जान बचाई. उसके पास इतने पैसे थे कि उन्हें बांधने में लगने वाले रबड़-बैंड्स का खर्चा ही हजारों डॉलर्स में था. वो 4 से 5 हजार मौतों का जिम्मेदार था. सरकारी अफसरों के लिए उसकी पॉलिसी साफ थी. ‘मेरी रिश्वत खाओ या मेरी गोली’. अब इनमें से कितनी बातें सच है कितनी झूठ, ये तो उसके बारे में बहुत सारा पढ़ चुकने पर ही पता चलेगा. या फिर नार्कोज़ देखकर. लेकिन अगर हमें दो लाइन का इंट्रोडक्शन देना हो तो हम कहेंगे, कोलंबिया का जन्मा एक इंटरनेशनल ड्रग माफ़िया, जो अपनी लोकैलिटी में देवता की तरह पूजा जाता था. था नहीं लेकिन, रॉबिन हुड समझा ज़रूर जाता था. हल्के फुल्के क्राइम के बाद किडनैपिंग के रास्ते ड्रग के धंधे तक पहुंचा. बेहिसाब-बेशुमार दौलत का मालिक. लेकिन जैसा हर क्रिमिनल का होता है इसका भी अंत ‘मौत’ और ‘धोखेबाजी’ से हो गया. सर्च ब्लॉक, कोलंबियाई पुलिस की एक नई ब्रांच थी. 2 दिसंबर 1993 को ‘सर्च ब्लॉक’ ने एस्कोबार को मार गिराया.

# वैग्नर मोरा ने इफ्फी में क्या-क्या बोला-

वैग्नर मोरा इफ्फी के तहत पंजिम में आयोजित ‘The Magnificent Artists’ (कमाल के कलाकार) नाम के सेशन में लोगों और पत्रकारों से मुखातिब थे. वहां उन्होंने अपनी फिल्म ‘मारिगेला’ और अपने फ्यूचर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ ब्राज़ील की मौजूदा हालत और वहां के प्रेज़िडेंट के बारे में भी तल्ख़ बातें कह डालीं. उन्होंने कहा-

# पाब्लो एस्कोबार का किरदार निभाना एक कमाल की यात्रा सरीखा था.

# नार्कोज़ जैसे इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स दूर-दराज़ के लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करते हैं.

# मैं नार्कोज़ का स्पिन ऑफ, ‘मैक्सिकन नार्कोज़’ डायरेक्ट करने वाला हूं.

# नार्कोज़ के रोल के लिए मुझे अपना वज़न बहुत बढ़ाना पड़ा था. अब ऐसा कभी नहीं करूंगा. ये मेरी हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है. दूसरे सीज़न में मुझे बहुत भारी-भारी महसूस हुआ. साथ ही ऊर्जा भी कम हुई सी लगी.

# इस दौरान मुझे हॉलीवुड का भी बड़ा प्रोजेक्ट मिला. डायरेक्टर भी रुकने को तैयार था. लेकिन मैं इतना थका हुआ था कि मना कर दिया.

बोल्सोनारो के सपोर्टस मार्च निकाल रहे हैं. ये प्रो गवर्नमेंट मार्च है. यानी तब का जब बोल्सोनारो सत्ता में आ चुके थे. (May 26, 2019. REUTERS/Marcelo Chello)
बोल्सोनारो के सपोर्टस मार्च निकाल रहे हैं. ये प्रो गवर्नमेंट मार्च है. यानी तब का जब बोल्सोनारो सत्ता में आ चुके थे. (May 26, 2019. REUTERS/Marcelo Chello)

# मैं 15 सालों से लगातार काम कर रहा हूं. मेरा उद्देश्य लैटिन लोगों को केंद्र में लेकर मूवी बनाना है. अभी मैंने इराक में मारे गए ब्राज़िलियन सर्गियो विएरा के ऊपर बन रही एक मूवी में एक्ट किया है और उसका निर्माता भी मैं ही हूं.

# मैं नहीं जानता कि आप लोग ब्राज़ील के हालात से कितने वाकिफ हो, लेकिन हालत बहुत खराब है. जब से वहां तानाशाही शुरू हुई है, हमने इतिहास के सबसे बुरे दौर में रहना शुरू कर दिया है.

# हमने धुर-दक्षिणपंथी, फासिस्ट प्रेजिडेंट को चुना. वो तानाशाही और यातना को बढ़ावा देते हैं. उन्हें लगता है कि जांच करने का सबसे अच्छा ज़रिया है किसी को टॉर्चर करना. वो एक ‘घिनौने’ (despicable) इंसान है.

# उन्होंने खुद एक वीडियो रिकॉर्ड किया. जिसमें मेरे और मेरी फिल्म (मारिगेला) के बारे में बकवास बातें रिकॉर्ड कीं. मेरी फिल्म सेंसर की हुई है. हमारा ब्राज़ील में प्रीमियर रद्द कर दिया गया था.

# ‘मारिगेला’ बनाने का उद्देश्य इतिहास में इस मिटा दिए गए नाम को फिर से लिखना था. लेकिन जैसा आजकल ब्राज़ील में चल रहा है, उस हिसाब से तो फिल्म केवल  60 के दशक में विरोध करने वालों पर ही नहीं उनपर भी बन गई जो आज के दौर में विरोध दर्ज़ कर रहे हैं. और इसलिए ही तो ये फिल्म सेंसर कर दी गई है.

# जब आपका प्रेज़िडेंट कहे ग्लोबल वार्मिंग कुछ नहीं है, तो ये बात आपको सब कुछ जला डालने की शक्ति देती है. जब आपका प्रेज़िडेंट कहे टॉर्चर एक अच्छी चीज़ है तो ये बात आपको टॉर्चर करने की शक्ति देती है. जब आपका प्रेज़िडेंट औरतों का सम्मान न करता हो तो ये बात आपको सेक्सिस्ट (लिंगभेद करने वाला) होने की शक्ति देती है. जब आपके प्रेज़िडेंट को समलैंगिकों को लेकर डर लगता हो तो ये आपको भी वैसा ही होने ही शक्ति देता है.

# मारिगेला-

मारिगेला मूवी का एक सीन
मारिगेला मूवी का एक सीन

Marighella – O Guerrilheiro que Incendiou o Mundo (मारिगेला- एक गुरिल्ला योद्धा जो जगत में उजियारा लेकर आया). ये एक बोयोग्राफी है. राजनेता और गुरिल्ला योद्धा कार्लोस मारिगेला के बारे में. वैग्नर मोरा ने इसी बायोग्राफी को स्क्रिप्ट में बदलकर एक ब्राज़ीलियाई मूवी बनाई है. ये वैग्नर मोरा का निर्देशक के तौर पर डेब्यू होगा. मूवी वैसे तो थियेटर में आज तक रिलीज़ नहीं हुई, लेकिन इसे 14 फरवरी, 2019 को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में रिलीज़ कर दिया गया.

साल 1964. 21 साल की सैन्य तानाशाही की शुरुआत होने को थी. ऐसा अमेरिकी एजेंसी सीआईए के सपोर्ट से हुए एक तख्तापलट के चलते होने वाला था. इस दौर में कार्लोस मारिगेला ने ब्राज़ील में बढ़ती तानाशाही के खिलाफ हथियार उठाए थे. ‘मारिगेला‘ फिल्म इसी दौर और घटना के इर्द गिर्द बुनी गई है.

ब्राज़ील में इस फिल्म को लेकर हुई कंट्रोवर्सी के बारे में तो वैग्नर ने बोल ही दिया था लेकिन ब्राज़ील ही नहीं बल्कि दुनिया भर में इसको लेकर थोड़ी बहुत कंट्रोवर्सी हुई है. ‘मारिगेला’ के बारे में समीक्षक कह रहे हैं कि वैग्नर ने उन्हें अश्वेत दिखाया गया है, लेकिन वो अश्वेत नहीं थे. साथ ही वो एक स्वयंभू मार्क्सवादी थे जो आज कल की परिभाषा के हिसाब से आंतकवादी घोषित हो जाते.

# जायेर बोल्सोनारो-

ईश्वर सबसे ऊपर है. धर्म निरपेक्ष राज्य का कोई इतिहास नहीं रहा है. ये एक ईसाई राज्य है. जो इसके खिलाफ हैं वो इसे छोड़कर जा सकते हैं. अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के सामने झुकना ही होगा.

ये कहना है बोल्सोनारो का. जायेर बोल्सोनारो. ब्राज़ील के प्रेज़िडेंट. वही जिनकी बात वैग्नर मोरा ने अपने इंटरव्यू में की है. वही जिन्हें वैग्नर मोरा ने ‘घिनौने’ (despicable) कहा है.

बोल्सोनारो एक पॉलिटिशियन होने से पहले सेना में थे. 1 जनवरी 2019 को प्रेज़िडेंट बने बोल्सोनारो को अभी एक साल नहीं हुआ है और सिर्फ अपने स्टेटमेंट्स से ही इतना रायता फैला चुके हैं कि उसे समेटने में दशकों लग जाएं.

क्या बोल्सोनारो सेक्सिस्ट हैं, जैसा वैग्नर का दावा है?

जायेर बोल्सोनारो (तस्वीर: रॉयटर्स)
जायेर बोल्सोनारो (तस्वीर: रॉयटर्स)

एक ऐसा नेता जो एक महिला सांसद से कहता है कि मैं रेपिस्ट नहीं हूं, लेकिन अगर होता भी तो तुम्हारा रेप नहीं करता क्योंकि तुम मेरे टाइप की नहीं हो. तुम बदसूरत हो. एक बार तो उन्होंने ये भी कहा था कि मेरे पांच बच्चे हैं. चार लड़के और पांचवीं लड़की और यह मेरी कमज़ोरी थी. एक स्टेटिस्टिक्स पर गौर करें-

महिला वोटर्स में से उन्हें सिर्फ 18 प्रतिशत ने वोट किया.

अब उनका एक स्टेटमेंट देखें-

ब्राज़ील में बिजनेस की दुनिया का हाल देखकर मुझे दुःख होता है. क्योंकि इतने सारे लेबर लॉज़ वाले इस देश में बॉस होना एक दुर्भाग्य है. एक पुरुष और एक जवान महिला के बीच अगर चुनना हो, तो व्यवसायी क्या सोचेगा? इस औरत की उंगली पर तो अंगूठी है (यानी इसकी सगाई हो गई है), जल्द ही प्रेगनेंट हो जाएगी, फिर छह महीने की मैटरनिटी लीव पर चली जाएगी. इन सबके पैसे कौन देगा? जिसका बिजनेस है वो. अंत में पैसा सोशल सिक्योरिटी से कट जाएगा लेकिन काम का फ्लो तो टूट गया न. और जब वो वापस आएगी, तो एक महीने की छुट्टी भी लेगी. आखिर में एक साल में सिर्फ पांच महीने काम करेगी.

क्या बोल्सोनारो होमोफोबिक (समलैंगिकों से डरने वाले) हैं, जैसा वैग्नर का दावा है?

इमैनुएल मैक्रॉन. फ़्रांस के प्रेजिडेंट. जिनके विचार सेम टू सेम वैग्नर मोरा सरीखे हैं. (तस्वीर: रॉयटर्स)
इमैनुएल मैक्रॉन. फ़्रांस के प्रेजिडेंट. बोल्सोनारो को लेकर जिनके विचार सेम टू सेम वैग्नर मोरा सरीखे हैं. (तस्वीर: रॉयटर्स)

बोल्सोनारो कहते हैं कि अगर मेरा बेटा एक्सीडेंट में मर जाए तो ठीक रहे. लेकिन समलैंगिक हो जाए, ये मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा. ज़रा उनका एक स्टेटमेंट देखिए-

अगर मेरी बिल्डिंग में कोई गे कपल रहने आएगा, तो उसकी कीमत घट जाएगी. अगर वो आस-पास हाथ पकड़ कर चलें, एक दूसरे को चूमें, तो उसकी कीमत गिर जाएगी. कोई भी ये इस डर के मारे नहीं कहता कि कहीं उसे होमोफोब (समलैंगिकों से घृणा करने वाला) का तमगा न मिल जाए.

क्या बोल्सोनारो यातनाओं को बढ़ावा देते हैं, जैसा वैग्नर का दावा है?

कर्नल कार्लोस अल्बर्टो उस्त्रा. 2015 में मृत्यु हो गई. उसने सेना की एक कुख्यात खुफिया यूनिट का नेतृत्व किया था. ये यूनिट वामपंथी राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए थी. जिन चार सालों में कर्नल कार्लोस इस यूनिट का नेतृत्व कर रहे थे ये 45 मौतों और यातना के 502 मामलों की कारण बनी. बोल्सनारो ने उस्त्रा की विधवा से मिलने से पहले संवाददाताओं से कहा-

वह एक राष्ट्रीय नायक है, जिसने ब्राज़ील को वो बनने से रोका जो आज वामपंथी चाहते हैं.

क्या बोल्सोनारो ग्लोबल वार्मिंग को नकारते हैं, जैसा वैग्नर का दावा है?

अमेज़न के जंगलों में लगी आग (तस्वीर:रॉयटर्स)
अमेज़न के जंगलों में लगी आग (तस्वीर:रॉयटर्स)

G-7 समिट में एमेजॉन में लगी आग को बुझाने के लिए ब्राजील को कुल 22 मिलियन डॉलर (करीब 157 करोड़ रुपए) की राशि देने पर सहमति बनी. लेकिन ब्राजील ने इसे लेने से इनकार करते हुए इमैनुएल मैक्रॉन से कह दिया था कि- वो इस रकम का इस्तेमाल यूरोप में जंगलों को बढ़ाने के लिए करें तो ज्यादा बेहतर है.

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार- वैसे तो बोलसनारो अपने घरेलू विरोधियों और अंतरराष्ट्रीय आलोचकों के प्रति उदासीन हैं हीं, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की वैज्ञानिक एजेंसियों के निष्कर्षों को भी ‘झूठ’ कहकर खारिज कर दिया है. उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के लिए चिंतित लोगों को खाने और कम शौच करने की सलाह दी है. बोला है, ऐसा करना उत्सर्जन में सामूहिक रूप से कमी लाएगा.

बोल्सोनारो के बारे में केवल वैग्नर मोरा की ही राय ऐसी नहीं है. फ्रांस के प्रेजिडेंट इमैनुएल मैक्रॉन ने G-7 समिट के दौरान एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था-

वैसे तो ब्राजील के लोग अच्छे हैं लेकिन अपने प्रेजिडेंट को देख शर्मिंदा होंगे. उम्मीद है उन्हें जल्द लायक प्रेजिडेंट मिले.

# अंततः-

26 जनवरी. नरेंद्र मोदी.
26 जनवरी. नरेंद्र मोदी.

हमने आपको सारे फैक्ट्स बताए हैं. बिना किसी का पक्ष लिए. अब आपको डिसाइड करना है कि क्या बोल्सोनारो वाकई वैसे हैं जैसा उनके बारे में वैग्नर ने कहा है. क्या मारिगेला वाकई वैसे थे जैसा उन्हें वैग्नर ने अपनी मूवी में दिखाया है. और अगर हां तो ये ये लोग कितने सही और कितने ग़लत हैं?

बहरहाल चलते-चलते आपको एक इंपोर्टेंट इन्फोर्मेशन भी दे देते हैं. वो ये कि अगर आपको बोल्सोनारो को लाइव देखना है तो तो आप 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड की टिकट खरीद लें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें रिपब्लिक डे पर गेस्ट ऑफ़ ऑनर बनने का न्योता दिया है. बोल्सोनारो ने न्योता स्वीकार भी कर लिया है. बाकी सब चंगा सी….


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