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रोओ मत स्टोक्स, छिलने दो अपनी देह को : खुला ख़त

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डियर स्टोक्स,

मैं पहली बार किसी को ख़त लिख रहा हूं. इसलिए नहीं क्यूंकि मुझे किसी को लिखना ही था. बल्कि इसलिए क्यूंकि मुझे तुमसे कुछ कहना है. मैं क्रिकेट को सिर्फ देखता ही नहीं, उसके बारे में सिर्फ बात ही नहीं करता, उसे जीता भी हूं. मैं क्रिकेट और क्रिकेट से जुड़ी हर चीज़ और हर इंसान से प्यार करता हूं. क्रिकेट देखते हुए हंसा भी हूं, कई बार रोया भी हूं. कल आखिरी ओवर की तीसरी गेंद फेंकने के बाद तुम्हें सर झुकाए अपने घुटनों पर बैठे देखा तो सचमुच बुरा लगा. मैं बता दूं कि मैं वेस्ट इंडीज़ को जीतते हुए देखना चाहता था, तुम्हें हारता हुआ नहीं. मैं चाहता था कि उस आखिरी ओवर में 19 रन बनें, पर तुम्हारे आंसुओं की कीमत पर नहीं.

मैं क्रिकेट में सबसे ऊपर अगर किसी को मानता हूं तो वो है सचिन तेंदुलकर. इंडियन क्रिकेट फैन होने के नाते, ये कोई नयी बात नहीं है. वानखेड़े स्टेडियम सचिन तेंदुलकर का होम ग्राउंड है. इंटरनेशनल लेवल पर 17 साल क्रिकेट खेलने के बाद, उसी मैदान पर एक दिन सचिन तेंदुलकर को पवेलियन जाते वक़्त उनकी अपनी क्राउड ने हूटिंग करके भेजा था. उन्होंने उस दिन 21 गेंदों में 1 रन बनाये थे. उसी सचिन तेंदुलकर ने 5 साल बाद उसी मैदान पर, उसी क्राउड के सामने अपने हाथों में पहली बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाई थी. उस दिन मैदान में आये कई लोग रोये होंगे. मैं अपने दोस्तों के बीच रोया था.

2009 का ऑस्ट्रेलियन ओपन. रॉजर फेडरर हार गया था राफ़ेल नडाल से. मैच खतम होने के बाद माइक पर आने पर फेडरर के मुंह से आवाज़ नहीं निकल रही थी. वो रो रहा था. उसने बोलने की लाख कोशिश की मगर वो बोल न सका. एरीना मैं बैठे फेडरर के फैन्स ने इतनी तालियां बजाईं कि फेडरर को बोलने की ज़रुरत ही नहीं पड़ी. वो सभी उसके साथ खड़े थे. और सच कहूं तो वो सभी रो रहे थे. उसी बीच नडाल को ट्रॉफी दी और फेडरर को आराम करने का टाइम मिला. नडाल को ट्रॉफी मिलते ही फेडरर जल्दी से माइक पर आया, दो बातें कहीं और चला गया. उसने कहा कि मैं आखिरी में नहीं बोलना चाहता. वो काम आज नडाल का है. उस दिन तक मैं फेडरर का सिर्फ़ एक फैन था. उस दिन के बाद से मैं फेडरर की इज्ज़त करने लगा था.

विराट कोहली ने मलिंगा को एक ओवर में 24 रन मारे थे. तो क्या मलिंगा की महानता खत्म हो गई? सचिन ने सेंचुरियन में शोएब को सिर्फ एक ओवर में ऐसे मारा था कि उसे अगला ओवर ही नहीं मिला. तो क्या दुनिया के सबसे तेज़ और खतरनाक गेंदबाजों की लिस्ट से शोएब अख्तर का नाम काट दिया गया? मैं आज भी उसकी यॉर्कर याद करता हूं तो लगता है मेरा पैर का अंगूठा नीला पड़ गया है. नुवान कुलासेकरा की गेंद पर छक्का मारकर धोनी ने वर्ल्ड कप जिताया था. तो क्या श्री लंका ने उसे खिलाना छोड़ दिया?

दुनिया ब्रेथवेट के बारे में बात कर रही है. कह रही है कि उसने चार गेंदों पर लगातार अपना 100% देते हुए 100% आउटपुट दिया. मुझे दिख रहे थे तुम. जिसने पहली, फिर दूसरी, फिर तीसरी गेंद और फिर चौथी गेंद अपना 100% देते हुए 100% की अपेक्षा करते हुए फेंकी. किसी भी गेम में इसके सिवा और क्या चाहिए होता है? किसी भी टीम को अपने प्लेयर में ये नहीं चाहिए तो और क्या चाहिए? फ़रिश्ता? तुम ठीक वो काम कर रहे थे जो तुम्हारी टीम तुमसे चाहती थी. फंसे हुए किसी भी मैच का आखिरी ओवर फेंकना आसान काम नहीं होता. और ये तो वर्ल्ड कप फाइनल था. गेंद मिलने पर तुम एक बार भी झिझके नहीं थे. असल में तुम वहीँ जीत गए थे.

तीसरी गेंद पर तीसरा छक्का देने के बाद तुम जब पिच पर बैठे थे, तुम्हारे आस पास कोई भी नहीं था. चिल्लाता हुआ मार्लोन सैमुएल्स था. तुम अकेले थे. उस बाईस गज की भूरी पट्टी पर जो मखमल सी घास के बीचों-बीच बिछाई जाती है. तुमने सोचा है कि कैसे उस भूरी, कठोर, और रूखी पिच में और तुममें कितनी समानताये हैं? वो पिच भी अकेली होती है, घास के बीच. उसका अकेलापन उसे रूखा, कठोर बना देता है. तुम्हारा कल का अकेलापन भी तुम्हें कठोर बनाएगा. हर इंसान का अकेलापन उसे ऐसा ही बना देता है. मैं तुम्हें ऐसा बनता देखना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि उस कड़ी पिच पर बॉल पड़ने के बाद जैसे उछाल पाती है, वैसे ही अगली बार किसी ब्रेथवेट के तुमसे टकराने पर वो दूर उछल पड़े.

इस अकेलेपन में तुम्हें खुद को खुद का साथ देना होगा. कुछ ऐसा करो कि कल दुनिया ब्रेथवेट को तुम्हें लगातार चार छक्के मारने के लिए किस्मती मानने लगे. मगर हां, याद रहे कि किस्मत जैसा कुछ भी नहीं होता. सब कुछ तुम्हारे खुद के ऐक्शन का रिऐक्शन होता है. किस्मत वाली बात इस दूर से तमाशा देखती दुनिया के हिस्से छोड़ दो.

मैंने तुम्हें जितना देखा है, देखते हुए जितना जाना है, मुझे विश्वास है कि तुम निराश नहीं हुए होगे. निराश हुए भी होगे तो दो पल बाद तुम गुस्से से भर गए होगे. मैं चाहता हूं की तुम खुद से गुस्सा हो जाओ. इतना गुस्सा जितना तुम अपनी हार से भी नहीं हुए होगे. तुम्हारे लोअर से बाहर झांकती टीशर्ट और चढ़ी हुई बाहें, और कुहनियों पर चढ़ा एल्बो गार्ड ये बताता है कि तुम खुद से मीटरों दूर जाती हुई गेंद कैसे भी बाउंड्री तक पहुंचने से पहले रोकना चाहते हो. तुम दौड़ो, तुम गेंद देखते ही कूद पड़ो. सड़क पर फ़ील्डिंग की प्रैक्टिस करो. छिलने दो अपनी देह को. निकाल दो गुस्सा अपना अपने सवा किलो बल्ले, साढ़े पांच आउंस की गेंद, और उस बाइस गज की पट्टी जो तुम्हारे जितनी ही कठोर और रूखी बन चुकी है और उस पट्टी पर बहते हुए पसीने के बीच. मैं तीन छक्के पड़ने के बाद गिरते तुम्हारे आंसुओं से ज़्यादा चौथी गेंद के लिए दौड़ते वक़्त गिरते हुए तुम्हारे पसीने से उस पिच को गीला होता हुआ देखना चाहूंगा.

– तुम्हारा सबसे नया फैन और सपोर्टर
केतन

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