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वो एक्ट्रेस जो शर्मिला टैगोर और रेखा को अपने आगे कुछ नहीं गिनती थीं

बॉलीवुड की हर एक्ट्रेस की अपनी खासियत रही है, लेकिन दर्शकों में जैसा करिश्मा और तिलिस्म मुमताज़ का था वो किसी का न था.

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दर्शकों में जितनी फैंटेसी उन्होंने पचास साल पहले पैदा की, उतनी आज सब एक्ट्रेस मिलकर भी नहीं जगा पाती हैं.

‘छुप गए सारे नज़ारे’, ‘कोई शहरी बाबू’ और ‘गोरे रंग पे’ जैसे दर्जनों गाने और बहुत फिल्में हैं, जिनमें उनका आकर्षण चुंबकीय था. शाहरुख खान का बचपन उनके सम्मोहन में बीता और आज भी सिर्फ उन्हीं के दीवाने हैं. वे मुमताज़ हैं. बंबई में 31 जुलाई, 1947 को जन्मी, 11 की उम्र में फिल्मों में आ गईं, 16 की उम्र में हिट हो गईं, 22 की उम्र में सुपरस्टार बन गईं और 26 की उम्र में युगांडा के बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर ली, 30 की उम्र में फिल्में छोड़ दीं. लंदन में रहती हैं. आज 72वें बर्थडे पर कुछ किस्सों में उनकी जादुई याद.

#1. ऐसी सुपरस्टार जो तब 8 से 10 लाख रुपये की जोरदार फीस लेती थीं

फिल्म 'सावन की घटा' (1966) और 'सिकंदर-ए-आज़म' (1965) में मुमताज़.
फिल्म ‘सावन की घटा’ (1966) और ‘सिकंदर-ए-आज़म’ (1965) में मुमताज़.

आज के दौर में भी जब हीरोइन्स को हीरोज़ के मुकाबले मामूली फीस मिलती है, करीब पचास बरस पहले मुमताज़ उन चंद एक्ट्रेस में से थीं जिन्होंने एक-एक फिल्म में काम करने के 10 लाख रुपये तक लिए. ये उन दिनों में बहुत ही ज्यादा बड़ी रकम हुआ करती थी. उसमें भी खास ये है कि उन फिल्मों में उन्हें बहुत सारी डेट्स नहीं देनी पड़ती थीं. मतलब छोटे से रोल्स के लिए वे ये रकम लेती थीं. यहां तक कि सुपरस्टारडम पाने से पहले भी उनकी फीस बहुत ज्यादा थी. वे चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर फिल्मों में आ गई थीं. जब वे 15 साल की थीं तब दारा सिंह के साथ फीमेल लीड के तौर पर फिल्म ‘फौलाद’ (1963) उन्हें कास्ट किया गया. ये उनका पहला बड़ा ब्रेक था. आगे चलकर उन्होंने दारा सिंह के साथ कुल 16 फिल्में कीं. हालांकि उनकी फिल्में दर्शकों के बीच हिट थीं लेकिन उन्हें फिल्म इंडस्ट्री वाले बी-ग्रेड टाइप मानते थे. हालांकि ऐसा नहीं था. इन फिल्मों में जहां दारा सिंह की फीस करीब 4.5 लाख होती थी और पूरी फिल्म में उनके सीन होते थे, वहीं कुछेक सीन करने के लिए मुमताज़ को 2.5 लाख रुपये दिए जाते थे. ये तब इस अनुपात में बहुत बड़ी रकम थी.

#2. शाहरुख खान को जिस एक एक्ट्रेस से प्यार हो गया

मुमताज और शाहरुख.
मुमताज और शाहरुख.

मुमताज़ की फिल्में देखकर बड़े हुए शाहरुख उनके दीवाने थे. वे एक ऐसी एक्ट्रेस थीं जो स्क्रीन पर आती तो उनकी आंखें ठिठक जाती थी. इस क्रश के बारे में उन्होंने सुपरस्टार बनने के बाद खुलेआम कहा. जब मुमताज़ को इस बारे में पता चला तो वे खुद सरप्राइज़ हो गई थीं. एक इवेंट में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देने शाहरुख आए थे. उन्होंने कहा कि वे उनके बहुत बड़े दीवाने हैं और गौरी (पत्नी) के अलावा वे अकेली ऐसी (एक्ट्रेस) हैं जिनसे वे बहुत प्यार करते हैं. इस पर मुमताज़ का कहना था कि जिन शाहरुख खान को पूरी दुनिया प्यार करती है उनका ये बोलना, उनके लिए बहुत बड़ी प्रशंसा की बात है.

#3. राजेश खन्ना का बुरा डांस वो संभाल लेती थीं

फिल्म 'सच्चा झूठा' (1970) के गाने 'यूं तुम मुझसे करती हो' में राजेश खन्ना और मुमताज़.
फिल्म ‘सच्चा झूठा’ (1970) के गाने ‘यूं तुम मुझसे करती हो’ में राजेश खन्ना और मुमताज़.

इन दोनों की मुलाकात फिल्म ‘दो रास्ते’ (1969) के सेट पर हुई थी जिसे राज खोसला ने डायरेक्ट किया था. खन्ना ने इसमें बलराज साहनी के कैरेक्टर नवेंदू के बेरोजगार छोटे भाई का रोल किया था जिससे रईस रीना (मुमताज़) को प्यार हो जाता है. ये फिल्म फैमिली ड्रामा थी. इस फिल्म के बाद से दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई. दोनों ने कई हिट्स साथ में दी. ‘जय जय शिव शंकर’ और ‘बिंदिया चमकेगी’, ‘गोरे रंग पे न इतना गुमान कर’ जैसे गानों में इन दोनों की जोड़ी को बहुत याद किया जाता है. मुमताज़ ने याद किया कि राजेश खन्ना अपने दोस्तों को लेकर बहुत चूज़ी थे लेकिन वे उनकी करीबी दोस्त हो गई थी. दोनों एक-दूसरे के पड़ोसी थे. वे मुमताज़ को मज़ाक में “ऐ मोटी इधर आ” कहकर बुलाते थे. वहीं वो फीमेल फैन फॉलोइंग को लेकर उन्हें चिढ़ाती थीं. राजेश डांस के मामले में कच्चे थे. इन दोनों के जितने भी हिट गाने रहे हैं उनमें दोनों के साथ वाले शॉट्स में जहां राजेश फिसलते थे और कमजोर पड़ते थे वहां मुमताज़ अपने परफॉर्मेंस से संभाल लेती थीं. वहां डांस मास्टर राजेश खन्ना की कमज़ोरी दिखाने के बजाय उनके क्लोज़ अप शॉट लेकर गाना पूरा कर देते थे. ऐसी ही दिक्कत राज खोसला की फिल्म ‘प्रेम कहानी’ (1975) में ‘चल दरिया में डूब जाएं’ गाना फिल्माते हुए हुई थी. मुमताज ने बताया कि उन्होंने जैसे तैसे वो गाना संभाल लिया था.

#4. शर्मिला टैगोर और रेखा को कुछ नहीं गिनती थीं

मुमताज़, शर्मिला टैगोर और रेखा.
मुमताज़, शर्मिला टैगोर और रेखा.

तब के दौर में अभिनेत्रियों में शत्रुता की चर्चाएं होती रहती थीं. हर किसी को नंबर एक के स्थान पर स्थापित होना और बने रहना था. खुद मुमताज का मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री जैसी जगह में जहां आप बेस्ट लोगों के साथ काम करने के मौके अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहते हो, वहां एक हद तक जोड़-तोड़ चलता था. किसी दूसरी एक्ट्रेस को रोल नहीं मिले इसलिए मुमताज़ अपनी फीस तक घटा देती थी और रोल ले लेती थीं. वो अपनी साथी एक्ट्रेसेज़ को लेकर ज्यादा असुरक्षित भी नहीं थीं. जैसे रेखा को लेकर उनका कहना था कि जब से सुपरस्टार थीं तब रेखा नई-नई ही आई थी और उसे अच्छे से नाचना नहीं आता था. हालांकि वे डांस के मामले में वे सिर्फ हेमा मालिनी को अपना कंपीटिशन बताती थीं. शर्मिला टैगोर से उनकी शत्रुता के चर्चे खास हैं क्योंकि दोनों ने तब के सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्में की थीं और एक किस्म की तुलना बनी रहती थी. मुमताज़ तो ये भी कहती हैं कि उनके और शर्मिला के बीच फर्क ये है कि शर्मिला ने राजेश खन्ना के साथ फ्लॉप फिल्में दीं और उन्होंने एक भी नहीं! उनका कहना था कि कोई एक्ट्रेस, भले ही वो शर्मिला ही क्यों न हो, उनके लिए खतरा नहीं बन सकती थी. जब उन्होंने फिल्में छोड़ी तब राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी टॉप पर थी.

#5. शम्मी कपूर और बाकी फिल्मस्टार्स से उनके प्रेम का सच

जीतेंद्र, शम्मी कपूर और राजेश खन्ना के साथ मुमताज़.
जीतेंद्र, शम्मी कपूर और राजेश खन्ना के साथ मुमताज़.

मुमताज़ ने खुद माना है कि उनके और शम्मी के बीच प्रेम संबंध थे. कुछ अन्य एक्टर्स और उनके बीच भी आकर्षण था. जब वे 18 बरस की थी तब उन्हें शम्मी कपूर से प्यार हो गया था. फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ (1968) की शूटिंग के दौरान ये परवान चढ़ा. तब शम्मी ने उन्हें प्रस्ताव दिया कि वे फिल्मों में काम करना छोड़कर उनके साथ घर बसा ले लेकिन मुमताज़ नहीं मानीं. उसके अलावा जीतेंद्र से भी उन्हें प्यार था. डायरेक्टर यश चोपड़ा से भी उनका अफेयर बताया जाता है. जब यशराज नए नए डायरेक्टर बने थे, अपनी फिल्म ‘आदमी और इंसान’ (1969) में उन्होंने मुमताज को लिया था. दोनों के प्रेम के काफी चर्चे थे. इतने कि जब यशराज पामेला से शादी करने जा रहे थे तो उनके दोस्त रोमेश से पामेला ने पूछा भी कि ये उस हीरोइन मुमताज़ और यश के बीच में क्या चल रहा है? रोमेश ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, वो सिर्फ अच्छे दोस्त हैं. हालांकि एक इंटरव्यू में पामेला ने कहा कि रोमेश ने ऐसा कहा जरूर लेकिन ये सच नहीं था.

लेकिन इनमें से कोई भी अफेयर मुकाम तक नहीं पहुंचा. इसकी वजह ये थी कि मुमताज फिल्मों से पैसा कमाने और अपने परिवार की जिम्मेदारी पूरी करने में बहुत डूबी थीं. ‘बूंद जो बन गए मोती’ (1967) बनने के दौरान उनकी मां गुजर गईं. उसके बाद परिवार का बोझ उन्हीं पर था. सुबह 4 बजे उठकर रात 9 बजे तक वे काम करती थीं. मुमताज़ के मुताबिक, “मैं लकी थी कि पुरुष (को-स्टार्स) मुझसे शादी करना चाहते थे. हां, एक आकर्षण था, लेकिन मैं आगे नहीं बढ़ी. मेरी जिम्मेदारियां इतनी ज्यादा थीं कि अफेयर्स के लिए टाइम नहीं था.”

#6. देव आनंद ने सबसे लड़कर उन्हें अपनी फिल्म में लिया

फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971) में देव आनंद के साथ मुमताज़.
फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ (1971) में देव आनंद के साथ मुमताज़.

मुमताज़ पहली बार देव आनंद से उनकी फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ के सेट पर 1970 में मिली थीं. फिल्म के पहले शेड्यूल के बाद ही देव ने अपनी अगली फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में भी उन्हें कास्ट कर लिया. लेकिन उन्होंने कैसे साइन किया ये रोचक है. खुद मुमताज बताती हैं कि उन दिनों में एक एक्टर एक साथ सात फिल्में ही साइन कर सकता था. जब सातवीं फिल्म पूरी हो जाती उसके बाद ही वो आठवीं साइन कर सकता था. जब ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ की प्लानिंग हो रही थी तब मुमताज पहले से सात फिल्में साइन करके बैठी थीं.

लेकिन देव आनंद बड़े मजबूत इरादों वाले आदमी थे. उन्हें कोई हिला नहीं सकता था. उन्होंने तय कर लिया था कि मुमताज़ उनकी फिल्म करेंगी ही. वे सबसे लड़े और इंडस्ट्री के लोगों के विरोध के बावजूद उनके सामने पुलिस प्रोटेरक्शन में मुमताज को अपनी फिल्म के शेड्यूल के लिए काठमांडू ले गए. वहां जाकर पूरे 40 दिन लगाकर तसल्ली से शूटिंग पूरी की.

फिल्में छोड़ने के बाद से मुमताज़ का लुक ऐसा होता गया. सबसे आखिरी वाली उनकी लेटेस्ट तस्वीर है.
फिल्में छोड़ने के बाद से मुमताज़ का लुक ऐसा होता गया. सबसे आखिरी वाली उनकी लेटेस्ट तस्वीर है.
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